Sunday, February 15, 2026
- Advertisement -

नाथ अभिमान

 

Amritvani 1


एक घर के मुखिया को यह अभिमान हो गया कि उसके बिना उसके परिवार का काम नहीं चल सकता। चूंकि कमाने वाला वह अकेला ही था इसलिए उसे लगता था कि उसके बगैर कुछ नहीं हो सकता। एक दिन वह एक संत के सत्संग में पहुंचा। संत कह रहे थे, दुनिया में किसी के बिना किसी का काम नहीं रुकता।

Weekly Horoscope: क्या कहते है आपके सितारे साप्ताहिक राशिफल 3 अप्रैल से 9 अप्रैल 2022 तक || JANWANI

यह अभिमान व्यर्थ है कि मेरे बिना परिवार या समाज ठहर जाएगा। सभी को अपने भाग्य के अनुसार प्राप्त होता है। सत्संग समाप्त होने के बाद मुखिया ने संत से कहा, मैं दिन भर कमाकर जो पैसे लाता हूं उसी से मेरे घर का खर्च चलता है। मेरे बिना तो मेरे परिवार के लोग भूखे मर जाएंगे। संत बोले, यह तुम्हारा भ्रम है। हर कोई अपने भाग्य का खाता है। इस पर मुखिया ने कहा, आप इसे प्रमाणित करके दिखाइए। संत ने कहा, ठीक है। तुम बिना किसी को बताए घर से एक महीने के लिए गायब हो जाओ। उसने ऐसा ही किया। संत ने यह बात फैला दी कि उसे बाघ ने अपना भोजन बना लिया है।

मुखिया के परिवार वाले कई दिनों तक शोक संतप्त रहे। गांव वाले आखिरकार उनकी मदद के लिए सामने आए। एक सेठ ने उसके बड़े लड़के को अपने यहां नौकरी दे दी। गांव वालों ने मिलकर लड़की की शादी कर दी। एक व्यक्ति छोटे बेटे की पढ़ाई का खर्च देने को तैयार हो गया। एक महीने बाद मुखिया छिपता-छिपाता रात के वक्त अपने घर आया।

घर वालों ने भूत समझकर दरवाजा नहीं खोला। जब वह बहुत गिड़गिड़ाया और उसने सारी बातें बताईं तो उसकी पत्नी ने दरवाजे के भीतर से ही उत्तर दिया, हमें तुम्हारी जरूरत नहीं है। अब हम पहले से ज्यादा सुखी हैं। उस व्यक्ति का सारा अभिमान चूर-चूर हो गया। संसार किसी के लिए भी नहीं रुकता! यहां सभी के बिना काम चल सकता है संसार सदा से चला आ रहा है। और चलता रहेगा।


janwani address 48

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

UP: योगी सरकार का बड़ा ऐलान, तीन श्रेणी की पेंशन में बढ़ोतरी, अब मिलेगा 1500 रुपये

जनवाणी ब्यूरो | यूपी: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ...
spot_imgspot_img