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‘लापरवाही’ के विस्फोट ने कई घरों में कर दिया ‘अंधेरा’

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‘लापरवाही’ के विस्फोट ने कई घरों में कर दिया ‘अंधेरा’
  • पुलिस चौकी से चंद कदमों की दूरी पर हुआ हादसा
  • सबसे बड़ा सवाल: पड़ोसियों को किस गलती की मिली सजा

जनवाणी संवाददाता |

सरधना: क्षेत्र में हुए इतने बड़े विस्फोट ने विभाग पर हजारों सवाल खड़े कर दिए हैं। लापरवाही के धमाके से हंसते-खेलते घर-आंगनों पर चीख-पुकार मच गई। जिन घरों में किलकारियां गूंज रही थी, पलक झपकते ही वहां मातम छा गया। ऐसा नहीं है कि सरधना में यह पहला विस्फोट हुआ है। एक वर्ष पूर्व भी अवैध पटाखों के जखीरे में विस्फोट हुआ था। जिसमें दो मंजिला मकान जमींदोज हो गया था और एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।

ये हादसा भी पुलिस चौकी से चंद कदमों की दूरी पर हुआ है। या यूं कहें कि पुलिस की नाक के नीचे अवैध पटाखों का बड़े स्तर पर व्यापार किया जा रहा था। इन सभी सवालों के बीच सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा हो रहा कि इतने बड़े हादसे का जिम्मेदार कौन है? जिन मजदूर परिवारों के मकान ध्वस्त हुए हैं, उनका क्या कसूर था? कौन उन मजदूर परिवारों के आशियाने फिर से खड़े करेगा? लोगों की दीपावली रोशन करने के लिए जमा किए गए इस जखीरे ने कई घरों में अंधेरा कर दिया है।

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जिस मकान में हादसा हुआ है, वह पुलिस चौकी से चंद कदमों की दूरी पर ही है। ऐसा नहीं है कि पुलिस को इस अवैध पटाखों के काले कारोबार का पता नहीं था। पहले भी यहां पुलिस ने अवैध पटाखों का जखीरा पकड़ा था। दीपावली का पर्व नजदीक है। त्योहार को भुनाने के लिए इन लोगों ने पटाखों का स्टोक लगाना शुरू कर दिया। यानी त्योहार की तैयारी में लग गए। मगर पुलिस-प्रशासन ने इस ओर कोई तैयारी नहीं की।

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लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि पलभर में दो लोगों की जान चली गई और आधा दर्जन मकान ध्वस्त हो गए। पुलिस-प्रशासन की लापरवाही के चलते मजदूर परिवारों के आशियानें मलबे में तबदील हो गए। ऐसा नहीं है कि यह हादसा पहली बार हुआ है। इससे पहले गत वर्ष 30 मई को ईदगाह रोड पर भी अवैध पटाखों की फैक्ट्री में विस्फोट होने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और दो मंजिला मकान जमीन दोज हो गया था।

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इस घटना से भी पुलिस-प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया। इस पूरी घटना ने प्रशासन पर हजारों सवाल खड़े कर दिए हैं। जिनमें सबसे बड़ा सवाल ये है कि विस्फोट का जिम्मेदार कौन है? उन मासूम मजदूरों की क्या गलती थी, जिनके मकान मलबे में तब्दील हो गए? इन परिवारों के मकान कौन बनाकर देगा? जिस गलती की सजा इन परिवारों को मिली है?

दीपावली रोशन करने के चक्कर में कई घरों में अंधेरा पसर गया है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि सरधना में किसी पर भी पटाखों का लाइसेंस नहीं है। बावजूद इसके दर्जनों लोग यहां अवैध रूप से पटाखों का कारोबार करते हैं। मगर,  अधिकारियों की नींद नहीं टूटती है। या यूं कहिए कि सब सामने होने के बाद भी मिलीभगत की चश्मा पहनकर नजर अंदाज कर दिया जाता है। इतने बड़े हादसे के बाद प्रशासन कितना भी भाग दौड़कर ले या फिर पटाखों के जखीरें पकड़ ले। चाहें उच्चाधिकारी संबंधित पुलिसकर्मी या दारोगा को सस्पेंड कर गंभीरता दिखा लें। हादसे में जिन लोगों की जान गई है और जिनके आशियानें टूटे हैं।

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शादी में गए हुए थे महिला और बच्चे

आसिम व उसके भाई का परिवार एक दिन पहले ही मेरठ शादी समारोह में शामिल होने गए थे। हादसे के समय मकान में पुरुष ही थे। हादसे से चंद मिनट पहले ही आसिम के पिता अब्दुल माबूद भी चिकित्सक के पास दवाई लेने गए थे। यानी मकान में परिवार के चंद ही लोग मौजूद थे। यदि पूरा परिवार मकान में होता था तो हादसा और भी भयावह हो सकता था।

दो वर्ष पूर्व भी पकड़े गए थे पटाखे

बताया गया है कि ये परिवार लंबे समय से पटाखों का कारोबार कर रहा था। करीब दो वर्ष पूर्व भी मकान से अवैध रूप से रखा पटाखों का जखीरा पकड़ा गया था। यहां पुलिस की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। यदि पुलिस को अवैध कारोबार करने वालों का पता था तो समय-समय पर इसकी जांच करना भी जरूरी था। जो इस तरह के हादसे को रोक सकती थी।

दूर तक दिखाई दिया धुएं का गुब्बार

विस्फोट इतना भीषण था कि पूरे कस्बे में इसकी दहल महसूस की गई। करीब 500 मीटर तक मकानों में भूकंप की तरह कंपन हो गया। इतना ही नहीं कस्बे के साथ आसपास के गांव के लोगों ने धुएं का गुब्बार उठता देखा। मानों आसमान से हवाई हमला हो गया हो।

खुफिया तंत्र भी नहीं सूंघ पाया पटाखों की गंध

क्षेत्र में तमाम अधिकारियों से लेकर खुफिया तंत्र अपना नेटवर्क बिछा होने का दावा करके अपनी पीठ खुद थपथपाते हैं। मगर इस तरह के होने वाले हादसे साफ कर देते हैं कि सारा विभाग रामभरोसे चल रहा है। सवालों के बीच से एक सवाल ये भी निकल कर सामने आ रहा है कि खुफिया तंत्र कहां सो रहा है।

पुलिस चौकी से चंद कदमों की दूरी पर चल रहे अवैध कारोबार और पटाखों की गंध क्यों विभाग नहीं सूंघ सका। या फिर खुफिया तंत्र के नाम पर केवल मजाक हो रहा है। इस घटना से उठे सवालों पर यदि उच्चाधिकारी गंभीरता से ध्यान दें तो बहुत लोगों की लापरवाही सामने आएगी।

आसपास के लोगों ने बताय कि मकान में लंबे समय से अवैध रूप से पटाखों का कारोबार किया जा रहा था। जो पुलिस चौकी से चंद कदमों की दूरी पर है। यहां से कुछ ही मीटर दूर एसडीएम से लेकर सीओ और इंस्पेक्टर भी बैठते हैं। साथ ही साथ खुफिया तंत्र भी कस्बे की गतिविधि पर नजर रखने का दावा करता है।

दावे तो किए जाते हैं कि पत्ता हिलने की सूचना भी अधिकारी तक पहुंच रही है। मगर इस तरह के हादसे होने पर इन दावों की हवा निकल जाती है। गुरुवार को हुए विस्फोट ने भी इस तरह के दावों को बेनकाब कर दिया। तमाम सवालों के बीच ये सवाल खड़ा कर दिया कि पुलिस को क्यों इस अवैध कारोबार का पता नहीं चल सका। क्यों खुफिया तंत्र अवैध पटाखों की गंध को सूंघ नहीं सका।

सिस्टम की लापरवाही के चलते दो लोगों की जान चली गई और कई लोगों के आशियानें बिखर गए। जो इन मजदूरों ने जिंदगी भर तिनका-तिनका करके न जाने कैसे बनाए थे। यदि उच्चाधिकारी इस हादसे से उठ रहे सवालों पर गंभीरता से नजर डाले तो बहुत से लोगों की लापरवाही सामने आएगी। जिसका जवाब उनसे लेना भी जरूरी है कि आखिर क्यों उन्हें पता नहीं चल सका। जांच चलेगी तो यह भी पता चलेगा कि बाकी किन जगहों पर इसी तरह का काला कारोबार किया जा रहा है।

ताश के पत्तों की तरह बिखर गए सपनों के आशियाने

गुरुवार सुबह लोग अपने घरों में आराम कर रहे थे। किसी ने नहीं सोचा था कि पलक झपकते ही उनकी जिंदगी में इतना बड़ा तूफान आने वाला है। तेज ब्लास्ट हुआ और मकान ताश के पत्तों की तरह धराशाई हो गए। एकाएक मकान मलबे में तब्दील हो गए। विस्फोट इतना भीषण था कि दो मंजिला मकान जमींदोज हो गया और आसपास के आधा दर्जन मकान भी ध्वस्त हो गए। किसी को समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या।

धमाके के कुछ देर तक आसपास के लोग सुन हो गए। आंख खुली तो चारों ओर धुआं और मलबा नजर आ रहा था। बदहवास लोग समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर क्या करें। चारों ओर चीख-पुकार मची हुई थी। पूरी गली में मलबा ही मलबा फैला हुआ था। आसपास मोहल्ले के लोग वहां पहुंचे और बिना कुछ सोचे मलबा हटाकर लोगों को निकालना शुरू किया। घायलों को अस्पताल भेजा गया। मृतकों की हालत ऐसी थी कि मानों मांस के लौथड़े पड़े हों। इस मंजर को देखने वाले अभी तक स्तब्भ हैं।

वक्त था करीब साढ़े नौ बजे का। कांग्रेस नगर अध्यक्ष आसिम खान अपने दोस्त कासिम के साथ ऊपर कमरे में बैठा था। आसपास मकानों में लोग आने काम में लगे हुए थे। तभी आसिम के नीचे वाले कमरे में अचानक से तेज धमाका हुआ। विस्फोट इतना तेज की मकान की छत और दीवारें दूर मकानों पर जाकर गिरी। पलक झपकते ही दो मंजिला मकान जमींदोज हो गया। इतना ही नहीं आसपास के आधा दर्जन मकानों की छत और दीवारें भी गिर गई।

दर्जनों लोग मलबे में दब गए। धमाके की दहल कस्बे के दूसरे छोर तक पहुंची। लोगा धमाके वाले जगह पर पहुंचे तो धुएं का गुब्बार उठ रहा था। चारों ओर धुआं और मलबा फैला हुआ था। लोगों को लगा कि आसमान से शायद कोई हवाई हमला हो गया। कुछ देर के लिए धमाके के साथ आसपास के लोग सुन हो गए।

आंखें खुली तो चीख-पुकार मची हुई थी। लोगों ने देर लगाए बिना बचाव कार्य शुरू कर दिया। मलबे से लोगों को निकाल कर अस्पताल भेजा। दिनभर बचाव कार्य चलता रहा। इस एक धमाके ने कई परिवारों की जिंदगी बदलकर रख दी। दो चराग बुझ गए और आधा दर्जन आशियाने ताश के पत्तों की तरह बिखर गए।

छत फाड़ कर दूसरे मकानों पर जाकर गिरे शव

मकान में जब विस्फोट हुआ तो छत और दीवारें दूर तक घरों पर जाकर गिरी। प्रत्येक्षदर्शियों ने बताया कि मरने वाले दोनों लोगों के शव भी छत को फाड़कर दूसरे मकानों पर जाकर गिरे। लोग परिवारजनों को मकान में तलाश रहे थे। पड़ोस के लोगों ने उन्हें दूसरे मकान की छत पर पड़ा देखा। पूरा लिंटर भी उनके साथ दूसरे मकान में जाकर गिरा।

शव की हालत भी ऐसी हो गई थी कि देखने वालों की रुह कांप गई। मकान में तेज ब्लास्ट के साथ एक बड़ा धुएं का गुब्बार उठा। जिसे दूरदराज के लोगों ने देखा। मौके पर चारों ओर धुआं और मलबा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि समझ नहीं आ रहा था कि हादसे वाली जगह पर मकान था भी या नहीं।

क्योंकि मकान की दीवारें और छत उड़कर दूसरे मकानों पर जा गिरी थी। मलबे में लोगों को तलाश किया गया। मगर आसिम और कासिम नजर नहीं आए। आसपास के लोगों ने देखा कि दोनों दूसरे मकान की छत पर पड़े हैं। यानी मलबे के साथ वह दोनों भी दूर जाकर गिरे। दोनों के शव मकान की छत के साथ करीब 20 मीटर दूर जाकर गिरे। दोनों के शव की हालत ऐसी थी कि जिसने भी उन्हें देखा, रुह कांप गई। घटना स्थल का हर एक मंजर हादसे की दास्तां बयां कर रहा था।