
एक ताकतवर डिजिटल माइंड के तौर पर तेजी से लोकप्रिय हो चुका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित चैट-जीपीटी ने थोड़े समय में ही कई स्तर पर खतरे की घंटी भी बजा दी है। डेटा चोरी की शिकायतें मिलने और नौकरियां छीने जाने की शुरुआत हो चुकी है। इसके द्वारा बौद्धिक और व्यावसायिक स्तर पर कामकाज के प्रभावित होने, मेधाशक्ति की मौलिकता में भोथरापन आने, विवेक की बुनियाद के झकझोरे जाने आदि समेत वैचारिक, ऐतिहासिक, भौगोलिक और सामाजिक तथ्यों के दस्तावेजों में सेंध लगाने की चिंता ने नई चुनौतियां पैदा कर दी है। माइक्रोसॉफ्ट संचालित प्लेटफार्म ओपन-एआई के चैटजीपीटी पर चालाकी, गलत जानकारियां और व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए डेटा संग्रहित करने के आरोप तक लग रहे हैं।