- रात का तापमान गिरा, दिन में गर्मी का रहा असर, तीन चार दिन ऐसे ही रहेगा मौसम
जनवाणी संवाददाता |
मोदीपुरम: रात में हल्की बूंदाबांदी ने राहत दी है। जबकि दिन में गर्मी का आलम अब भी कम नहीं हो रहा है। गर्मी के तेवर लोगों को पेरशान कर रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अभी चार पांच दिन मौसम गर्म रहेगा। जून के प्रथम सप्ताह में गर्मी का प्रकोप कम होता नहीं दिख रहा है। अब भी तापमान 40 डिग्री के आसपास चल रहा है। जिस कारण से मौसम सुबह से लेकर शाम तक गर्म बना हुआ है। रात में भी मौसम के तेवर गर्म है और दिन में गर्म हवाओं के चलते राहत नहीं मिल रही है।
दिन में गर्म हवाओं का असर पिछले एक महीने से कम नहीं हुआ है। राजस्थान की ओर से आ रही गर्म हवाओं के चलते मौसम गर्म बना हुआ है। मौसम कार्यालय पर दिन का अधिकतम तापमान 38.4 डिग्री व रात का न्यूनतम तापमान 22.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम वैज्ञानिक डा. यूपी शाही का कहना है कि राजस्थान की और से आ रही गर्म हवाओं के बीच मौसम गर्म है। अभी कोई ज्यादा राहत के आसार नहीं है। बीच बीच में आ रही छिटपुट बारिश से भी गर्मी का असर कम नहीं हो रहा है। अभी आगामी दिनों में भी मौसम ऐसे ही गर्म रहेगा और दिन में गर्मी परेशान करेगी। जिससे एक बार फिर से लोग गर्मी में बिलबिलाएंगे।
रात में बारिश से फिर गिरा प्रदूषण
रात में अचानक से आयी बारिश के चलते मेरठ और एनसीआर में प्रदूषण का स्तर कम हुआ है। मेरठ का एक्यूआई 154, बागपत का 160, गाजियाबाद का 142, मुजफ्फरनगर का 211, जयभीमनगर का 191, पल्लवपुरम का 128, गंगानगर का 142 दर्ज किया गया। बारिश के चलते एक्यूआई में गिरावट हुई है। अभी दो-तीन दिन ऐसे ही कमी रहने के आसार है।
आखिर कब करेगा प्रदूषण विभाग अस्पतालों पर कार्रवाई?
महानगर में अस्पतालों द्वारा कूड़ा-करकट के जरिए प्रदूषण फैलाया जा रहा है। इन अस्पतालों की बर्बरता पूर्ण कार्य प्रणाली को जानकर भी प्रदूषण विभाग अनजान बना हुआ है। अभी तक विभागीय अधिकारियों द्वारा कोई भी कार्रवाई अस्पताल प्रबंधनों के खिलाफ नहीं की गई है। विभाग द्वारा ऐसे अस्पतालों को चिह्नित करने के बाद भी नोटिस जारी नहीं किए गए है। जिसके चलते प्रदूषण विभाग की कार्य प्रणाली पर प्रश्न ंिचह्न लगा रहे हैं। महानगर में 1200 अस्पताल, लैब और छोटे क्लीनिक है। इनसे निकलने वाला खराब कूड़ा-करकट अमूमन अस्पताल संचालकों द्वारा घरेलू कूडेÞ में मिलाया जा रहा है। क्योंकि अस्पतालों का कूड़ा बेहद खराब एवं प्रदूषण जनक होता है।
इसलिए अस्पतालों से निकलने वाले कू ड़े-करकट को अन्य स्थान पर डाला जाता है, लेकिन महानगर में ऐसे अस्पताल संचालकों की मनमानी साफ देखने को मिल रही है। क्योंकि यह अस्पताल संचालक अस्पतालों से निकलने वाले कूड़े-करकट को घरेलू कूड़े में मिलाकर प्रदूषण को पलीता लगा रहे हैं। विभाग की कार्य प्रणाली को देखा जाए तो आज तक भी विभाग द्वारा किसी भी अस्पताल को नोटिस जारी नहीं किया गया है और न ही अस्पतालों पर जुर्माने की कार्रवाई की गई है। हालांकि क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी भुवन प्रकाश यादव का कहना है कि ऐसे अस्पतालों को चिह्नित किया जा रहा है। उन्हे नोटिस देने के बाद जुर्माने की क ार्रवाई की जाएगी।

