Monday, June 14, 2021
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कागजों में नियम, धरातल पर नहीं हो रही पानी की बचत

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  • शहर में बने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम हो रहे कूड़ेदान में तब्दील
  • कसेरू बक्सर और अम्हेड़ा के तालाबों में बने सिस्टम अपनी बदहाली बहा रहे आंसू

मनोज राठी |

गंगानगर: जल है तो कल है, यह महज नारा नहीं बल्कि हकीकत है। यदि हम नहीं चेते तो आने वाले कल में हमें एक-एक बूंद पानी के लिए तरसना पड़ेगा। इसका परिणाम गर्मी शुरू होते ही जलस्तर में गिरावट के रूप में दिखने लगता है। बारिश के जल को संरक्षित करने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सबसे बेहतर तरीका है।

भूजल के स्तर को सुधारने के लिए यह सबसे उत्तम पद्धति है। साल-दर-साल गिरते जा रहे भूमिगत जल के स्त्रोतों को बचाने सरकारी उपाय फेल होते दिखाई दे रहे हैं। जल संरक्षण को बढ़ावा देने वाटर हार्वेस्टिंग पिट के निर्माण का नियम भी केवल कागजों की शोभा बढ़ाने तक सीमित है।

निजी मकान व भवन के निर्माण में वाटर हार्वेस्टिंग बनाए जाने की शर्त के बावजूद इसे लगातार नजर अंदाज किया जा रहा है। जल संरक्षण के कागजों में खूब नियम और कानून बनाए गए हैं, लेकिन इन नियमों को धरातल में कोई पालन नहीं हो रहा है।

दृश्य-1             

रेन वाटर हार्वेस्टिंग के तालाब बने कूड़ेदान

जिले में भूजल स्तर निरंतर गिरता जा रहा है। जिले का कोई इलाका ऐसा नहीं है, जहां भूजल स्तर संतोषजनक हो। कई ब्लॉक में तो भूजल स्तर खतरे के निशान से भी नीचे चला गया है। सबसे ज्यादा भूगर्भ से पानी के अतिदोहन के शिकार कसेरू बक्सर और अम्हेड़ा के पक्के तालाब में बने रेन वाटर हार्वेस्टिंग के इंतजामों का फेल होना भी एक कारण है।

आलम यह है कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए बने तालाब कूड़ेदान में तब्दील हो गए हैं। तालाबों पर अतिक्रमण से स्थित बेहद नाजुक है। वहीं, बारिश के पानी का संचय नहीं हो पा रहा है। बारिश का पानी भूमिगत न होकर नालों के माध्यम से सीधे नदी में जा रहा है। तालाबों में बनाया गया रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अब कूड़ेदान में तब्दील हो चुके हैं। आगामी कुछ दिनों में बारिश शुरू हो जाएगी।

ऐसी स्थिति में ऐसे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को दुरुस्त नहीं किया गया तो बारिश का पानी बेकार बह जाएगा। रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सालों से खराब पड़ा है। खराब सिस्टम जहां अफसरों की लापरवाही का दर्शाता है, वहीं इस बात को भी बता रहा है कि जल बचाने को लेकर प्रशासन कितना गंभीर है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सालों से साफ नहीं किया गया है। जिसके चलते उसमें कूड़ा करकट भर गया है।

नालियों में बह जाता है बारिश का पानी

शहर के भवनों और तालाबों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बदहाल होने के कारण बारिश का पानी सड़कों पर बहकर बर्बाद हो रहा है। मानसून में बारिश का पानी नाला-नालियों में बहकर बर्बाद हो रहा है। बारिश पानी के नुकसान के पीछे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का बदहाल होना है।

प्रशासन नहीं सजग

एक ओर जहां प्रशासन जल संरक्षण और रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को सख्ती से लागू करने की बात करता है, वहीं, दूसरी ओर प्रशासन और सरकारी विभागों द्वारा ही भूजल बचाओ अभियान के खिल्ली उड़ाई जा रही है। यदि रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए भी गए हैं तो वो मेंटीनेंस के अभाव में दम तोड़ रहे हैं।

दृश्य-2                

प्रशासन की उदासीनता के शिकार रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

सबसे ज्यादा भूगर्भ से पानी के अतिदोहन के शिकार कसेरू बक्सर और अम्हेड़ा के पक्के तालाब में बने रेन वाटर हार्वेस्टिंग के जरिये वर्षा जल संचयन के प्रति लापरवाही यूं ही नहीं है। जिनके विभागों के पास जल संचयन को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी है, वह ही इस ओर उदासीन बने हुए हैं।

जिला प्रशासन, नगर निगम पर इसे लागू कराने की जिम्मेदारी है, लेकिन यहां पर लगे सिस्टम की दुर्दशा पर ही नजर नहीं हैं। जनवाणी टीम ने सोमवार को इसकी पड़ताल की तो व्यवस्था बदहाल मिली है। यहां वर्षा जल संचयन के इंतजामात किये गए हैं, लेकिन इनकी हालत बहुत ही दयनीय स्थिति में है।

सिस्टम के एक पिट में कूड़ा भरा है। नाली पूरी तरह चोक है। दूसरे पिट की नाली भी गंदगी से पटी है। बारिश का पानी पिट के अंदर भेजने के लिए जो नाली बनवाई गई थी, वह टूट गई है। नालियां भी जुगाड़ से बनाई गई नजर आती हैं। चारों ओर गंदगी व कूड़े का ढेर है।

लाखों रुपये स्वाहा

एक सामान्य रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पर एक से डेढ़ लाख रुपये का खर्च आता है। इसी खर्चे के साथ नगर निगम ने तालाबों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित किए थे, लेकिन लाखों की कीमत के ये सारे सिस्टम लापरवाही की भेंट चढ़ गए।

मंशा ताक पर

लाखोंं रुपये की लागत से निर्मित कसेरू बक्सर और अम्हेड़ा गांव के पक्के तालाब में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण किया गया है। नालियां कचरे से अटी होने से वर्षा जल का संरक्षण नहीं हो रहा है। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से जल संरक्षण की यह अहम् योजना दम तोड़ती नजर आ रही है।


यह उनके संज्ञान में नहीं है। इसकी जानकारी कर संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण लिया जाएगा।

                                                 -मनीष बंसल, नगरायुक्त नगर निगम, मेरठ

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