नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। आज पूरे देश में हरियाली तीज का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व खासतौर पर महिलाओं के लिए अत्यंत महत्व रखता है, क्योंकि यह मां पार्वती और भगवान शिव के दिव्य मिलन की स्मृति में मनाया जाता है। यह दिन केवल एक व्रत या त्योहार नहीं, बल्कि वैवाहिक जीवन की सुख-शांति, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। विवाहित महिलाएं इस दिन व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं। वहीं कुंवारी कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए माता पार्वती से प्रार्थना करती हैं। इस पर्व की पवित्रता को ध्यान में रखते हुए विशेष धार्मिक नियमों और सावधानियों का पालन किया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 26 जुलाई 2025 को रात 10 बजकर 41 मिनट पर हो रही है, और यह आज यानी 27 जुलाई की रात 10 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। पंचांग और धार्मिक परंपराओं के अनुसार, व्रत 27 जुलाई को ही रखा जाएगा।
हरियाली तीज के दिन कुछ ऐसी चीजें हैं, जिन्हें भूलकर भी नहीं करना चाहिए, वरना व्रत अधूरा रह सकता है और मां पार्वती की कृपा कम हो सकती है। इसलिए, इस शुभ पर्व पर सही तरीके से व्रत रखने के साथ-साथ उन नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है ताकि आपकी मनोकामनाएं पूरी हों और परिवार में सुख-शांति बनी रहे। ऐसे में आइए जानते हैं हरियाली तीज के दिन किन-किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए।
अगर आप पहली बार हरियाली तीज का व्रत रख रहे हैं तो सबसे महत्वपूर्ण बात है कि यह व्रत निर्जला और निराहार होता है। यानी इस दिन न तो कोई भोजन करें और न ही पानी पीएं। यह नियम व्रत को पूर्ण और सफल बनाने के लिए बहुत जरूरी है। खाने-पीने से व्रत अधूरा माना जाता है और मां पार्वती की कृपा कम हो सकती है।
हरियाली तीज के दिन अगर आप व्रत का सामान खरीदने जाएं तो ध्यान रखें कि मंगलवार के दिन ऐसा न करें। शास्त्रों में माना गया है कि मंगलवार को इस व्रत का सामान खरीदना अशुभ होता है और इससे व्रत के शुभ प्रभावों में बाधा आ सकती है। इसलिए खरीदारी के लिए अन्य दिन चुनना ही बेहतर रहेगा।
इस दिन अशुद्ध वस्तुओं से पूरी तरह बचना चाहिए। चमड़े से बनी चीजें, अंडा, शराब, मांस-मछली आदि को न तो छूना चाहिए और न ही इनके आस-पास रहना चाहिए। ऐसा करने से व्रत की पवित्रता भंग हो जाती है और व्रत का फल नहीं मिलता।
पूजा सामग्री के संदर्भ में खास बात यह है कि सुहागिन महिलाएं अपने मायके से मिली सामग्री का ही उपयोग करें। ऐसा करने से उनके दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है और अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है। घर में उपलब्ध सामग्री से पूजा करना व्रत के प्रभाव को बढ़ाता है।
इस दिन काले रंग की चूड़ियां पहनना मना है क्योंकि काला रंग इस अवसर पर अशुभ माना जाता है। हरे रंग की चूड़ियां पहनें, जो हरियाली, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक हैं। इससे आपके जीवन में खुशहाली बनी रहती है।
घर में इस दिन कोई भी वाद-विवाद न करें। किसी भी सुहागिन महिला का अपमान करना या उनके साथ अनुचित व्यवहार करना व्रत के प्रभाव को कम कर देता है। मां पार्वती को शांति और प्रेम पसंद है, इसलिए इस दिन क्रोध और गुस्से से दूर रहना चाहिए।
व्रत का पारण केवल शुभ मुहूर्त में करें। पारण समय से पहले करने पर व्रत अधूरा माना जाता है और उसका फल नहीं मिलता। इसलिए पारण का समय देखकर ही व्रत खोलें ।

