Thursday, March 5, 2026
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भ्रष्टाचारी को भ्रष्टाचारी ही बचाता है

गुड़की की लंबी प्रतीक्षा और कई देवी देवताओं को ढोकने के बाद आखिर चांदी कूटने वाले विभाग में इंजीनियर की नौकरी मिल गई। वह दो माह की नौकरी के बाद घर पर मिलने आया। मैंने जानना चाहा, कैसा कुछ रहा नौकरी करना, कोई समस्या तो नहीं? वह बोला, अंकल! सरकारी नौकरी में काहे की समस्या? बस लक्ष्मी का पहाड़ा पढ़ना सीखने लगा हूं। एक वर्ष बाद देखना कितनी चतुराई से पैसा खेंचने लगता हूं। वेतन के भरोसे तो वह रहते हैं जो संस्कार, संस्कृति और नैतिकता को कमर पेटी की तरह अपने साथ बांधे रखते हैं। अब अवसर मिला है, ऊपरी कमाई से जेबें भरने का, तो फिर उसका लाभ उठाने में क्यों दूरी बनाए रखूंगा? आज की इस दुनिया में जहां भी जाएं वहीं पैसे वाले की वैल्यू है। सभी उसे सलाम ठोकते हैं। आज का ही अखबार देख लो, तीन चार भ्रष्टाचार के समाचार देखने को मिल रहे हैं। वह कोई बेवकूफ नहीं है वह भी समय की धारा को पहचान अपने को वैसा ही ढाल रहे हैं।

गुड़की तुम नई नौकरी वाले हो, लेकिन तुम्हारा उत्साह ऊपरी कमाई में लगा हुआ है। कभी जांच एजेंसी की पकड़ाई में आ गए तो सारे चमत्कारी सपने धरे के धरे रह जाएंगे। गुड़की बोला, अरे अंकल! काम जादूगर की तरह करो, जो देखते ही देखते अपने जादू से सफलता प्राप्त कर अपना नाम कमा लेता है। किसी की फंसे हुए काम को निकलवाना हो तो उसे रोकड़े खर्च करना होता। बहुत पहले एक समाचार चर्चा में था कि एक महिला अधिकारी ने अपने पहले ही दिन नई नौकरी में भ्रष्टाचारी कमाई कर ली। अभी पिछले दिनों ही एक इंजीनियर के यहां पड़े छापे में करोड़ों रुपए की संपत्ति मिली। यहां वहां धंधा फैला रखा था। महंगे फ्लैट लिए हुए थे। ऐसे ही एक पटवारी ने काम करने के लिए एक जने से हजारों रुपए ले लिए। वह काम निकलाने वालों के सामने सदा अकड़ कर ही रहता। वह इस धरती पर पटवारी का महत्व जानता है। नीचे पटवार, ऊपर करतार। बस सब भ्रष्टाचार के सौदागर बने हुए हैं।

यदि कभी कभार कोई पकड़ाई में आ भी जाए तो कोई गर्दन तो कटती नहीं। मामला ले देकर निपटा ही लिया जाता है। और नहीं निपटा तो कोई विशेष सजा तो मिलती नहीं। दुर्भाग्य से जेल जाना ही पड़ जाए तो बेल हो जाती है। धीरे-धीरे सारा मामला रफा दफा हो जाता है। बाकी जो आपाधापी से पैसा कमाने निकला है वह पहले अपनी शर्म लाज कोट की तरह खूंटी पर टांगदेता है। मैं कहता हूं यह मानव जीवन जो कई योनियों के बाद नसीब हुआ है, उसे लक्ष्मी की टनाटन से मजेदार फलदाई बनाने में ही भलाई है। मेरे पास टैलेंट है, चांदी कूटने की तरकीब है। दूसरों का काम फंसा कर कर सुलझाने की तरकीब याद है। गरीब गुरबा बनकर नहीं जीऊंगा। सरकार भले ही भ्रष्टाचार के लिए कहती रहे, नो टॉलरेंस। पर इसके बिना काम नहीं चल सकता। यह तो जंग खाई मशीन में लुब्रिकेंट की तरह महत्वपूर्ण होता है? देश में चारों ओर भ्रष्टाचार अंगद के पैर की तरह जमा हुआ है। सरकने का नाम तक नहीं लेता। अपनी यहां वहां उपस्थिति बनाए हुए है।

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