Monday, April 6, 2026
- Advertisement -

खुद के आदेश बने हैं गले की फांस

  • बेनतीजा रही प्रशासन की बैठक
  • 15 को सुनवाई के मद्देनजर अफसर झाड़ रहे पुरानी फाइलों की धूल

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: आबादी के बीच चल रही डेयरियां बाहर किए जाने को लेकर अपने ही आदेश अफसरोें के गले की फांस बने हुए हैं। इसको लेकर बुधवार को अफसरों के साथ हुई डेयरी संचालकों की बैठक बेनतीजा रही। वहीं दूसरी ओर 15 मार्च को हाईकोर्ट में होने जा रही सुनवाई के मद्देनजर पुरानी फाइलों की धूल झाड़ी जा रही है।

महानगर में चल रही पशु डेयरियों पर कार्रवाई के मामले में प्रशासन ही नहीं बल्कि नगर निगम, मेविप्रा, प्रदूषण नियंत्रण सरीखे विभागों के अफसरों के लिए मुसीबत खड़ी हो गयी है। दरअसल इस मुददे को लेकर साल 2016 में तत्कालीन नगरायुक्त देवेन्द्र कुशवाह ने हाईकोर्ट में दिए गए व्यक्तिगत हलफनामे में महानगर में पांच स्थानों पर कैटल कालोनी विकसित कर आबादी के बीच चल रही डेयरियां शिफ्ट किए जाने का दावा किया था।

लेकिन, देवेन्द्र कुशवाह के यहां से तवादले के बाद यह मामला भी बाद में दब गया। उनके बाद कई अधिकारी आए और गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई के बजाए इस मसले से जुड़े तमाम विभागों का रवैया एक दूसरे के पाले में गेंद डालने सरीखा अधिक नजर आया।

बुधवार को कलक्ट्रेट में जिलाधिकारी के बालाजी की अध्यक्षता में हुई बैठक में मेविप्रा, नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण सरीखे विभाग के अधिकारी डेयरी संचालकों व आरटीआई एक्टिविस्ट के सवालों पर बंगले झांकते दिखाई दिए। एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने 2016 को तत्कालीन नगरायुक्त देवेन्द्र कुशवाह की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल किया गया हलफनामा पटल पर रख दिया।

जिसमें शहर से बाहर पांच स्थानों पर कैटल कालोनी विकसित कर आबादी से बाहर डेयरियां शिफ्ट किए जाने की बात कही गयी है। वहीं दूसरी ओर डेयरी संचालकों ने भी गेंद निगम अफसरों के पाले में डाल दी। उनका कहना था कि वो अपने पशु ले जाने को तैयार हैं। कोर्ट द्वारा तय की गयी गाइड लाइन के मुताबिक उन्हें कैटल कालोनी की व्यवस्था कर दी जाए।

गोबर बाहर, डेयरी अंदर

बैठक में निगम व मेविप्रा के अधिकारियों की ओर से डेयरी संचालकों को कहा गया कि गोबर डंप करने के लिए शहर से बाहर आबादी से दूर उन्हें जगह देने को तैयार हैं। गोबर शहर से बाहर डंप किया जाए। इस पर अधिकारियों से कहा गया कि यह बात वह मिनिटस में दर्ज करें ताकि कोर्ट को बताया जा सके।

मिनिटस में दर्ज किए जाने की बात पर अधिकारी कन्नी काटते नजर आए। दरअसल जो प्रस्ताव डेयरी संचालकों को दिया गया, उसके मुताबिक डेयरियां तो आबादी के बीच चलेंगी, लेकिन गोबर शहर से बाहर किसी डंपिंग ग्राउंड पर डाल जाएगा। तर्क वितर्क के चलते बैठक बगैर किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गयी।

ये रहे मौजूद

बैठक में जिलाधिकारी के बालाजी, नगरायुक्त मनीष बंसल, मेविप्रा सचिव प्रवीणा, निगम के संपत्ति अधिकारी राजेश के अलावा पर्यावरण अधिकारी, आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना व डेयरी संचालक भी मौजूद रहे।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

Subashini: तमिल टीवी अभिनेत्री सुभाषिनी ने की आत्महत्या, पारिवारिक विवाद बना वजह

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत...

LPG Crisis: गैस सिलिंडर नहीं मिलेगा! 1 जुलाई से इन घरों में एलपीजी आपूर्ति बंद

जनवाणी ब्यूरो | यूपी: पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) उपयोग करने...

Share Market: लाल निशान में खुला बाजार, सेंसेक्स 510 अंक गिरा और निफ्टी 22,600 से नीचे

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में युद्ध बढ़ने...
spot_imgspot_img