एक और टूट के कगार पर पाक!

विश्व पटल पर यक्ष प्रश्न कौंध रहा है कि क्या पाकिस्तान की सरजमीं पर वास्तविक जनतंत्र का सूर्योदय हो जाएगा अथवा आर्थिक तौर पर जर्जर पाकिस्तान राजनीतिक अंतर्कलह में पूर्णत: तबाह हो जाएगा? इमरान खान की गिरफ्तारी से आक्रोशित होकर पूर्व प्रधानमंत्री की हिमायत में सड़कों पर उतरी पाक आवाम द्वारा पाक फौज के प्रतिष्ठानों पर भीषण हिंसक आक्रमण, पाकिस्तान के किस मुस्तकबिल की तरफ इशारा कर रहे हैं? पाकिस्तान में निर्माण के कुछ वर्ष के पश्चात ही प्रधानमंत्री लियाकत अली का कत्ल कर दिया गया था और इसी प्रस्थान बिंदु से नवोदित पाकिस्तान में जनतंत्र का अवसान प्रारम्भ हो गया था। पाक राजसत्ता पर आखिरकार पाक के फौजी जनरलों का आधिपत्य स्थापित होता चला गया।