- स्वयं सहायता समूह कुटिर व लद्यु उद्योगों को पुर्नजीवित कर समय की मांग को कर रहा है पूरा
जनवाणी ब्यूरो।
बिजनौर: आभूषण महिलाओं के श्रृंगार में चार चांद लगाता है। उम्र दराज स्त्रियों के रूप योवन में आभा फैलाता है। अच्छे-अच्छे आभूषण पा लेना, स्त्रियों की पहली पसंद होते है। सोने, चांदी, हीरे-मोती आदि धातुओं से निर्मित आभूषण स्त्रियां अपनी हैसियत के अनुसार पहनती है। ऐसा ही एक अनोखे आभूषण के कई प्रकार पेपर क्राफ्टिंग से निर्मित किए जा रहे है। यह हुनर दिखाया है, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजिविका मिशन योजना में ग्राम झीरन विकास खंड नूरपुर की समूह की महिलाओं ने पेपर, मोती व नगों का इस्तेमाल कर आभूषण बनाए है। ये आभूषण सस्ते होने के साथ बेहद सुंदर और आर्कषक है। हल्के और टिकाऊ खासियत वाले ये आभूषण महिलाओं के सौंदर्य रुप को निखारनें में सहायक सिद्ध हो रहे है।
गरीब महिलाएं भी इन्हे आसानी से खरीद सकती है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजिविका मिशन योजना पुन: कुटिर उद्योगों को स्थापित करनें के प्रयास में लगी है। स्वयं सहायता समूह द्वारा कुटिर व लद्यु उद्योगों को पुर्नजीवित कर समय की मांग को पुरा किया जा रहा है। पुश्तेनी व नवीन उद्योगों का अपना लेने से ही बेरोजगारी का दमन हो सकेगा।

एक तरह से समूह की महिलाएं अपने पैतृक उद्योग-धंधो को पुन: जीवित करने में लगी है। मिट्टी से बनाये जाने वाले अनेक उत्पाद जैसे दीपक, चिराग, सुराई, घड़े, साज-सज्जा वाले खिलौने तैयार किये जा रहे है। दूसरी ओर हथकरघा में तैयार सिलाई कढ़ाई वाले कपड़े, इसके अलावा मुहड़े खाट- बान आदि पुश्तेनी उद्योग शुरू हुए है। युक्ति चौधरी व सिस्टर एकता की देखरेख में आभूषण तैयार किए जा रहे है।
विकास खंड हल्दौर के एडीओ (आईएसबी) अजय पाल नें बताया कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाए स्वाभिमान के साथ स्वरोजगार कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर है। यही समय की मांग है। इन कुटिर एंव लघु उद्योगों को अपनाने से ही भारत आत्मनिर्भर बनेगा।

