
सधे, सयाने और वक्त माहौल के लिहाज से अपनी सियासी पारी स खेलने वाले शरद पवार ने फिर दिखाया है कि उनके जैसा पैतरेबा राजनीतिज्ञ होना आसान नहीं। अपनी पार्टी एनसीपी में संभावित टूटन के अंदेशों के दरमियां शरद पवार ने आखिर रोटी पलटने के अपने बयान को हकीकत में तब्दील किया। मौका भी गजब का चुना, अपनी आत्मकथा के विमोचन का। 24 साल से एनसीपी प्रमुख की अपनी इनिंग को विराम देने की घोषणा जैसे ही शरद ने घोषणा की, कार्यकर्ता भावुक हो गए। कई की आंखों से आंसू छलक आए, यही तो चाहते थे पवार। शरद को बेहद करीब से जानने वाले भी चार दशक बाद भी ये दावा करने की स्थिति में नहीं होते कि सियासत के इस चाणक्य को हमने समझ लिया है।