- जांच समिति ने आडियो टेप को फोरेसिंक जांच के लिए भेजा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: चकबंदी विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर हैं। बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी का पहले आॅडियो टेप वायरल हुआ था, जिसमें दस लाख की घूस मांगी गई थी। इस मामले में बंदोबस्त अधिकारी नप गए। उनका तबादला हो गया। अब उनकी ही अदालत में बैठने वाले पेशगार विकास शर्मा का आॅडियो टेप वायरल हो रहा हैं, जिसमें छह लाख की रिश्वस्त मांगी जा रही हैं। यही नहीं, ये पेशगार एक ही सीट पर पिछले 25 वर्षों से जमे हुए हैं। इनका तबादला करने की हिम्मत किसी अधिकारी के पास नहीं हैं। अधिकारी बदल रहे हैं, लेकिन इनको हिलाया नहीं गया।
बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के आॅफिस में भ्रष्टाचार इस कदर है कि दर्जन भर से ज्यादा भ्रष्टाचार की शिकायत शासन तक पहुंच गई हैं। गंभीर आरोप लग रहे हैं, जिसके बाद ही लखनऊ से एक अधिकारियों की टीम यहां जांच करने के लिए पहुंची थी। टीम ने भ्रष्टाचार से संबंधित तमाम दस्तावेज जुटाये हैं, जिसके आधार पर भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता हैं। बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी संजय सिंह का तबादला तो हो गया हैं, लेकिन अब उनके पेशगार विकास शर्मा का भी एक आॅडियो टेप वायरल हो रहा हैं,
जिसमें पेशगार छह लाख रुपये की किसान से रिश्वत मांग रहा हैं। ये आॅडियो टेप डीएम को दी गई थी, जिसमें डीएम ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए एडीएम(ई)को जांच सौंपी गई, लेकिन एडीएम ई ने ये जांच पूरी नहीं की। जांच को पेडिंग में डाले रखा, जिसके बाद ही शासन ने दूसरी जांच टीम लखनऊ से मेरठ भेज दी थी। अब इस मामले में विकास शर्मा के खिलाफ अभी कोई कार्रवाई अधिकारियों ने नहीं की हैं। आॅडियो टेप में आवाज विकास शर्मा की हैं, इसकी फोरेंसिक जांच कराई जाएगी, ताकि पेशगार पर भी शिकंजा कसा जा सके।

