Tuesday, March 3, 2026
- Advertisement -

धान की फसल में लगने वाले पौध फुदके और तना छेदक कीट

KHETIBADI

धान की फसल में कई प्रकार के कीट लगते हैं जो पत्तियों, तनों और दानों को नुकसान पहुंचाते हैं। इन कीटों के कारण फसल की पैदावार कम होती है और गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। उनके कारण फसल की गुणवत्ता में गिरावट आती है और उपज में कमी होती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसके अतिरिक्त, ये कीट बीमारियों का प्रसार भी कर सकते हैं, जो फसल की संपूर्णता को खतरे में डालते हैं। इसलिए, धान की फसल में लगने वाले कीटों के बारे में जागरूक होना और उनके प्रबंधन के लिए उचित उपाय करना बहुत जरूरी है।

पौध फुदके

ये धान की फसल में लगने वाला एक खतरनाक कीट है जो फसल को भी नुकसान पहुंचाता हैं, भूरा पौध फुदका सम्पूर्ण भारत में धान का प्रमुख कीट है। पौध फुदकों की मादाएं लीफशीथ पर अंडे देती हैं। उत्तरी भारत में भूरा फुदके की जनसंख्या विस्फोट के परिणामस्वरूप वर्ष 2008 एवं 2013 में भयंकर नुकसान हुआ था। इस कीट के शिशु एवं वयस्क तने व लीफशीथ से रस चूसकर पौधे की वृद्धि पर दुष्प्रभाव डालते हैं जिससे पौध पीले हो जाते हैं। इस तरह के लक्षणों को ‘हॉपरबर्न’ कहते हैं। कीटों के अधिक प्रकोप से पौधा सूख कर गिर जाता है। जैसे-जैसे प्रकोप बढ़ता है, खेत में सूखी फसल के गोलाकार क्षेत्र (हॉपरबर्न) नजर आते हैं।

पौध फुदके के प्रबंधन के उपाय

-इस कीट से बचाव के लिए खेतों की मेड़ों पर खड़े पौध एवं खरपतवारों को हटा दें।

-खेत को लगातार पानी से भर कर न रखें, धान के खेत में पानी सूखने के बाद ही सिंचाई करें।

-इस कीट की रोकथाम के लिए धान की फसल में नाइट्रोजन का अधिक उपयोग न करें।

-इस कीट का नियंत्रण करने के लिए नीम बीज अर्क (5प्रतिशत) या ब्यूवेरिआ बैसिआना 10 एससी 2 मि.ली. / लीटर पानी प्रयोग करें।

-आवश्यकतानुसार पाईमेट्रोजिन 50 डब्ल्यूजी 1 ग्राम / लीटर या ट्राइफ्लूमेजोपाइरिम 10 एससी 1 ग्राम / 2 लीटर या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल 1 मि.ली. प्रति 3 लीटर या बीपीएमसी 50 ई सी 1 मि.ली. प्रति 5 लीटर या एथिपरोल 40 + इमिडाक्लोप्रिड 40 डब्ल्यू.जी. 80 प्रतिशत 1 मि.ली. / 4 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें या दानेदार कीटनाशी फिप्रोनिल 0.3 जी, 18 कि.ग्रा. प्रति हैक्टेयर की दर से भुरकाव करें।

तना छेदक

तना छेदक भी धान के घातक कीटों में से हैं जो की फसल को बहुत नुकसान पहुंचाता हैं, तना छेदक की तीन प्रजातियां पीला, गुलाबी और सफेद तना छेदक धान की फसल को नुकसान पहुंचाती हैं। इनमें से केवल पीला तना छेदक ही धान का महत्वपूर्ण कीट है। इन कीटों के वयस्क पतंगे होते हैं और केवल सुंडी ही फसल को नुकसान पहुँचाती है। सुंडी तने में छेद करके तने में घुस जाती है और इसे काट देती हैं।

फसल के फुटाव की अवस्था में इनके प्रकोप के लक्षण को ‘मृत-केन्द्र’ व बाली आने के उपरान्त इनके लक्षणों को ‘सफेद बाली’ के नाम से जाना जाता है। इससे फसल की उपज को बहुत हानि होती हैं।

तना छेदक के प्रबंधन के उपाय

-रोपाई से पहले पौधों की चोटियों को कुतर दें। यही उपाय हिस्पा कीट के लिए भी अपनाएं।

-मृत-केन्द्र और सफेद बालियों को चुनकर निकालें व नष्ट कर दें।

-फेरोमोन पाश (स्काइर्पो ल्युर) का भी प्रयोग कर सकते हैं। निगरानी के लिए 2 फेरोमोन पाश/एकड़ तथा पतंगों को इकट्ठा कर मारने के लिए 10 पाश/एकड़ लगाएं।

-रोपाई के 30 दिन के बाद ट्राइकोग्रामा जैपोनिकम 1,00,000 – 1,50,000 प्रति हैक्टेयर की दर से 2-6 सप्ताह तक छोड़ें।

-पौधों की कटाई जमीन स्तर तक करें और फसल के ठूंठों को नष्ट कर दें, जिससे कीट की सुंडियां नष्ट हो जाएं।

नीम बीज अर्क (5 प्रतिशत) का प्रयोग करें।

-आवश्यकतानुसार, कारटेप हाइड्राक्लोराइड 4 जी 20 कि.ग्रा. या क्लोरेनट्रानिलीप्रोल 0.4 जी 10 किलो या फिप्रोनिल 0.3 जी 18 किलो प्रति हैक्टेयर की दर से भुरकाव करें या कारटेप हाइड्राक्लोराइड 50 एस.पी. 2 ग्राम प्रति लीटर या क्लोरेनट्रानिलीप्रोल 18.5 एससी 1 मि.ली. प्रति 3 लीटर या फ्लुबेनडायामायड 20 डब्ल्यूजी 1 ग्राम प्रति 5 लीटर या फिप्रोनिल 5 एससी 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

janwani address

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

Chandra Grahan 2026: ग्रहण समाप्ति के बाद तुरंत करें ये 5 काम, जीवन में सुख-शांति का होगा वास

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत...

US: टेक्सास में गोलीबारी में भारतीय मूल की छात्रा समेत चार की मौत, 14 घायल

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: अमेरिका के टेक्सास राज्य की...
spot_imgspot_img