
‘तिमिर से समर’ कवयित्री ममता ‘अमर’ की सशक्त कविताओं का संग्रह है। कविता-लेखन के संबंध में कहा गया है कि कविताएं मन को भावों को व्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम हैं। इस काव्य संग्रह की रचनाओं में कवयित्री ने वर्तमान युग की विसंगतियों एवं विद्रूपताओं को शब्द-चित्रों के माध्यम से सामने लाने का प्रयास किया है।
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अनेक स्थलों पर जीवन में आने वाली स्थितियों के यथार्थ चित्रण की झलक परिलक्षित होती है। कविताओं के माध्यम से आज के जीवन में व्याप्त संत्रास, घुटन, वेदनाओं एवं अनुभूतियों को शब्द प्रदान किए गए हैं। सहज मनोभावों की ये कविताएं वर्तमान समय की आशा, निराशा, चुनौतियां, संवेदनाएं, अलगाव जैसी तमाम अभिव्यक्तियों तथा आम आदमी के जीवन में उत्पन्न अंतर्मन के द्वंद्व को पाठक के समक्ष प्रस्तुत करती हैं। कथ्य की दृष्टि से संग्रह की रचनाओं में वर्तमान युग की विसंगतियों एवं सामाजिक विडम्बनाओं को शब्द-चित्रों के माध्यम से उकेरने का प्रयास किया गया है। रचनाओं में आज के समय का सच प्रकट होता सा प्रतीत होता है। अनेक रचनाओं में सामाजिक एवं राजनीतिक स्थितियों का यथार्थ चित्रण करने का प्रयास किया गया है। अधिकतर रचनाओं में वर्तमान परिवेश का चित्रण समाहित है। कविताओं में समाज एवं जीवन के अनेक रंग बिखरे हुए हैं। इस संग्रह की कविताओं को कवयित्री ने चार भागों में विभक्त किया है-‘स्त्री’, ‘प्रकृति’,‘प्रेम’ तथा ‘व्यष्टि से समष्टि’ तक। ‘स्त्री’ खंड में स्त्री विमर्श की सशक्त रचनाएं हैं, जिनमें पुरूषत्व के मिथ्या दम्भ को चुनौती दी गयी है। सधी हुई प्रवाहमयी भाषा, मौलिकता, लयात्मकता, रागात्मकता, सराहनीय शिल्प एवं प्रभावी शब्द संयोजन पाठक को अपनी ओर आकृष्ट करता है। शब्द संयोजन उत्तम है। शिल्प की दृष्टि से कहा जाए तो संग्रह में कुछ छन्दबद्ध कविताओं में छन्दानुशासन का अभाव प्रतीत होता है, यद्यपि उन्हें पढ़ते समय लय एवं गेयता का आभास-सा होता है। कुछ रचनाएं अतुकान्त एवं छन्दविहीन भी हैं। संग्रह की रचनाएं पाठकों को आशांवित करती हैं।
पुस्तक: तिमिर से समर, कवयित्री: ममता अमर, प्रकाशक: गुफ़्तगू पब्लिकेशन, प्रयागराज, मूल्य: रुपये 150 रुपये
अजीत कुमार ‘आकाश’


