जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर: महीना रबीउल अव्वल की रौनक के बीच मंगलवार की रात इमामबाड़ा अंसारियान में जश्न-ए-हबीब-ए-खुदा कमेटी के तत्वावधान में भव्य नातिया मुशायरे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सहारनपुर समेत बाहर से आए शायरों ने रसूल-ए-पाक की बारगाह में अपने अशआर के ज़रिए अकीदत का नज़राना पेश किया।मुशायरे की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर कौसर कैरानवी ने की, जबकि पहले सत्र का संचालन डॉ. फरहत महदी काज़मी और दूसरे सत्र का संचालन क़र्तास कर्बलाई ने किया। कार्यक्रम का आगाज़ नन्हे क़ारी हुसैन महदी की तिलावत-ए-कुरआन से हुआ। इस अवसर पर शायरों के साथ-साथ पत्रकारों और विद्वानों को भी सम्मानित कर उपहार भेंट किए गए।
मुशायरे में प्रस्तुत चुनिंदा अशआर ने श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा।
“क्या क्या लिखूँ ज़ुबां से क्या क्या नबी का है / जब सारी कायनात ही सदका नबी का है” — कौसर kairanvi
“मदह-ए-मुरस्ल में ये शायर, ये मुसन्निफ, ये ख़तीब / एक गुज़रता हुआ लम्हा है, सदी बाकी है” — मौलाना बिलाल काज़मी लखनवी
“होते हुए भी कहाँ होश में रहा / जब तक हुज़ूर आपकी आग़ोश में रहा” — बिलाल सहारनपुरी
“सभी को अपने गले से लगाया रसूल ने / देखा न अपना न पराया रसूल ने” — फ़ाज़िल जरीलवी
इसके अलावा काज़िम जारचवी, फ़ैज़ान मंग्लौरी, शब रोज़ कांपौरी सहित कई अन्य शायरों ने भी अपने कलाम से समां बांधा। नात पेश करने वाले शायरों में मौलाना शम्स तबरेज़, क़र्तास कर्बलाई, सैय्यद अज़हर काज़मी, डॉ. फरहत महदी काज़मी, काशान मिर्ज़ा, समर अंजुम, सज्जाद हुसैन, राजू ज़ैदी के नाम प्रमुख रहे। मुशायरा देर रात तक चलता रहा जिसमें बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे। अंत में कमेटी की ओर से सभी शायरों और उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया गया।

