- कक्षा एक से पांचवीं तक का स्कूल एक ही कमरे में हो रहा संचालित
- छत टूटने की वजह से बच्चों को दूसरी जगह किया गया शिफ्ट
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शहर और देहात में सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में गिरते शिक्षा के स्तर के साथ छात्र संख्या भी कम होती चली गई। शिक्षा और स्कूलों का अच्छा संदेश देने के लिए सरकार ने खजाने का मुंह खोल दिया है। जिसका असर देहात में बेसिक शिक्षा विभाग के सरकारी स्कूलों पर दिखाई दे रहा है। इन स्कूलों में साफ-सफाई कराकर रंगाई पुताई कराई गई है। दावा किया जा रहा है कि मार्च तक महानगर के सभी स्कूलों की बिल्डिंग पर रंगाई पुताई करा दी जाएगी। वहीं शिक्षा का स्तर सुधाने की भी प्रयास किया जा रहा है।
सभी सरकारी स्कूलों का अपना भवन नहीं है। भवन न होने से ये स्कूल किराये के भवन में संचालित होते हैं। भवन निर्माण के लिए भूमि की अनुपलब्धता बता विभाग आसानी से अपनी जिम्मेदारी टाल जाता है। इस तरह बुनियादी शिक्षा में सुधार के तमाम दावों के बीच यह तस्वीर बयां कर रही है कि परिषदीय शिक्षा व्यवस्था संसाधनों की कमी से जूझ रही है और शिक्षकों की कमी के अलावा यहां भवन की भी दरकार है। सरकार देश के हर बच्चे को अच्छी शिक्षा देने के दावे करती है। इसके लिए सरकारी स्कूलों की कायाकल्प करने की बाते कही जाती है, लेकिन क्या होगा उस स्कूल के लिए जिसकी सभी कक्षाएं एक ही कमरे में चलाई जाती। यहां पर छात्रों की संख्या भी बेहद कम है।
मेरठ के मोहनपुरी क्षेत्र में पड़ने वाला सरकारी प्राथमिक विद्यालय अपनी बदहाली के लिए आंसू बहा रहा है। विद्यालय में कक्षा एक से पांचवीं तक की कक्षाओं के बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन विडंबना देखिए कि पिछले 30 सालों से पांचों कक्षाएं एक ही कमरे में चलती है। स्कूल में पांचों कक्षाओं के छात्रों की संख्या पर अगर गौर किया जाए तो वह केवल 18 है। इन छात्रों को पढ़ाने के लिए दो शिक्षकों की भी नियुक्ति सरकार ने कर रखी है। जबसे स्कूल अस्तित्व में आया है, यह किराए के कमरे में ही चल रहा है।
45 रुपये प्रतिमाह जाता है किराया
जिसका किराया भी 45 रुपये प्रतिमाह है। हेडमास्टर अनिल कुमार ने बताया कि इस बिल्डिंग की छत अभी हाल ही में टूटी है। जिस कारण बच्चों को एक अनाथलय में पढ़ाया जा रहा है। देखने वाली बात ये है कि जो स्कूल खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। उसमें पढ़नें वाले बच्चे किस तरह की शिक्षा ग्रहण करेंगे। आगे चलकर उनका भविष्य क्या होगा? किस तरह से वह अपने माता-पिता के सपनों को साकार करेंगे।
शिक्षा से महरूम रहते हैं बच्चे
शिक्षा के क्षेत्र में इस स्कूल को एक काले धब्बे के रूप में देखा जाए जो अतिश्योक्ति नहीं होगी। सरकार ने इस स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के लिए अच्छी-खासी तनख्वाह पर शिक्षकों की भी नियुक्ति कर रखी है, लेकिन यह शिक्षक किस तरह की पढ़ाई करा रहे हैं। यह बताने की जरूरत नहीं है। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का कैसा स्तर होता है। यह भी इस स्कूल के माध्यम से साफ हो रहा है।
छोटे बच्चों के लिए परेशानी
इस विद्यालय का भी अपना भवन नहीं है। इस संबंध में हमने शिक्षा विभाग को भी लिखा था, लेकिन इस पर अब तक काम नहीं हुआ है। जिला स्तर पर भी अधिकारियों को संबंध में लिखा गया था, लेकिन विभाग की ओर से कोई इसका जवाब भी नहीं आया, लेकिन विद्यालय के दूर होने से छोटे बच्चों की परेशानी काफी बढ़ जाएगी और वे शिक्षा से वंचित हो।

