- निजी डाक्टरों की हड़ताल का असर मरीजों पर दिखाई दिया
- दूसरे जिलों से इलाज के लिए आने वाले मरीजों का हाल बेहाल
- बिना इलाज के ही वापस लौटे, निजी अस्पतालों ने काटी चांदी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: निजी चिकित्सकों द्वारा 24 घंटे की हड़ताल का असर मरीजों पर भी देखा गया। दूसरे जिलों से इलाज के लिए पहुंचे कई मरीजों व तीमारदारों को इलाज न मिलने से बैरंग लौटना पड़ा। वहीं, हड़ताल का फायदा निजी अस्पतालों के डाक्टरों ने खूब उठाया। शुक्रवार को मेरठ में आइएमए के सदस्य 400 चिकित्सक हड़ताल पर रहे। इस दौरान चिकित्सकों के क्लीनिक बंद रहे, जिस कारण इलाज के लिए मरीज भटकते नजर आए।

मुजफ्फरनगर से बेटी विशाखा को इलाज के लिए मेरठ लेकर पहुंचे जगबीर ने बताया कि उनकी बेटी मानसिक रोग से ग्रस्त है, उसका इलाज डा. विनोद अरोड़ा के यहां चल रहा है। सुबह घर से मेरठ इलाज के लिए पहुंचे, लेकिन यहां पर डाक्टर का क्लीनिक बंद मिला। इसके बाद वह दूसरे डाक्टर के पास जानें को भटकते रहे। अंत में बेटी को बिना इलाज के ही वापस ले जानें को मजबूर हो गए।
निजी अस्पतालों ने काटी चांदी
शहर के कई निजी अस्पतालों में इलाज के लिए भटक रहे मरीजों को देखा गया। इस दौरान मरीजों का इलाज तो किया गया, लेकिन उनसे मुंह मांगी फीस भी वसूली गई। बेगमपुल से कचहरी वाले रास्ते पर पड़ने वाले एक निजी अस्पताल में मरीजों का इलाज होता मिला। यहां पर मरीजों की अच्छी खासी भीड़ नजर आई।
पिछले दरवाजे से दिया फर्ज को अंजाम
ईव्ज चौराहे के पास एक बाल व नवजात रोग विशेषज्ञ का क्लीनिक बाहर से तो बंद मिला, लेकिन साइड के दरवाजे से वह मरीजो का इलाज करते दिखाई दिए। इन डाक्टर के क्लीनिक पर अपने बच्चों का इलाज कराने आने वाले मरीजों की संख्या भी अच्छी खासी रही। हड़ताल होने के बाद भी यह डाक्टर अपने फर्ज को अंजाम देते नजर आए।

हालांकि जनवाणी रिपोर्टर के मौके पर पहुंचते ही इन्होंने मरीजों को बाहर ही रोक दिया, लेकिन फिर इलाज करने में जुट गए। हड़ताल के कारण मरीजों को इलाज मिलने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन कुछ डाक्टरों ने अपने फर्ज को अंजाम देने का फैसला लिया। जिसके लिए वह पिछले दरवाजे से मरीजों को देखते दिखाई दिए।

