Thursday, March 5, 2026
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गृह राज्यमंत्री की बर्खास्ती को लेकर धरना-प्रदर्शन

  • किसान यूनियन कलक्ट्रेट पर किया धरना प्रदर्शन
  • बर्खास्त कर 120 बी के तहत कार्यवाही की मांग

जनवाणी ब्यूरो |

शामली: मंगलवार को किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सवित मलिक के नेतृत्व में किसान कलक्ट्रेट पर पहुंचें। यहां उन्होंने जोरदार प्रदर्शन करते हुए धरना दिया। इस दौरान सवित मलिक ने अपने संबोधन में कहा कि गत 3 अक्टूबर को हुए लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड में जिसको तीन सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है, में जिस तरह से जांच हो रही है, उससे पूरा देश निराशा और आक्रोश के साथ देख रहा है।

लखीमपुर खीरी कांड को लेकर उच्चतम न्यायालय पहले ही कई प्रतिकूल टिप्पणी कर चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार की नैतिकता की कमी से स्तब्ब है, जहां केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी मंत्रि परिषद में राज्य मंत्री बने हुए हैं, वहीं दिनदहाड़े किसानों की हत्या की घटना में इस्तेमाल किया जाने वाला मुख्य वाहन मंत्री का है। मंत्री के 3 अक्टूबर से पहले के कम से कम तीन वीडियो में रिकार्ड में हैं, जो सांप्रदायिक वैमनस्य और द्वेष को बढ़ावा देते हैं।

उन्होंने प्रदर्शनकारी किसानों के खिलाफ भडकाऊ और अपमानजनक भाषण भी दिया था। वास्तव में, उन्होंने वीडियो में अपने संदिग्ध पूर्ववृत्त का उल्लेख करने में भी संकोच नहीं किया। एसआईटी द्वारा मुख्य आरोपी को समन जारी करने के बाद मंत्री ने शुरू में आरोपियों उनके बेटे और उसके साथियों को पनाह भी दी।

बताया गया है कि न्यायिक/पुलिस हिरासत में बंद आरोपीयों को वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। यह भी देखा गया है कि उच्चतम न्यायालय और देश के नागरिकों द्वारा अपेक्षित गति से गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए जा रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड में हितों का टकराव न्याय के लिए एक प्रमुख बाधा है, और कोई भी सरकार, प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्तों के संदर्भ में, अजय मिश्रा टेनी को अब तक बर्खास्त और गिरफ्तार कर चुकी होती।

इस दौरान किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सवित मलिक ने राष्ट्रपति को संबोधित उप ज्ञापन को सौंपा। ज्ञापन में राष्ट्रपति से केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी को उनके पद से तत्काल बर्खास्त किए जाने तथा टेनी को 120 बी के तहत आपराधिक साजिश में उनकी भूमिका के लिए तुरंत गिरफ्तार किये जाने की मांग की है। साथ ही, लखीमपुर खीरी घटना की जांच उच्चतम न्यायालय की प्रत्यक्ष निगरानी में एसआईटी से कराई जाने की मांग की है।

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