जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता समेत देश के कई बड़े शहरों में बीते एक हफ्ते से जारी विरोध प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुके हैं। सांसदों के ऊंचे भत्तों के खुलासे के बाद जनता का गुस्सा अब नेताओं के घरों तक पहुंच गया है। दक्षिण तंगेरांग, पूर्वी जकार्ता, और दक्षिण जकार्ता समेत कई इलाकों में सांसदों के घरों में लूटपाट, तोड़फोड़ और आगजनी की खबरें सामने आई हैं।
वित्त मंत्री मुलयानी इंद्रावती के घर पर हमला
भीड़ ने दक्षिण तंगेरांग स्थित वित्त मंत्री मुलयानी इंद्रावती के घर पर धावा बोल दिया। प्रदर्शनकारियों ने घर की सुरक्षा में तैनात सैनिकों पर हमला किया, एंट्री गेट तोड़ा, और कीमती सामान लूट लिया। यह घटना उस समय हुई जब मंत्री घर में मौजूद नहीं थीं।
अन्य नेताओं के घर भी बने निशाना
इस दौरान कई अन्य नेताओं के घरों को भी निशाना बनाया गया…
नाफा उरबाक (नास्देम सांसद और पूर्व अभिनेत्री) के घर पर भी हमला हुआ। तोड़फोड़ और लूट की घटनाएं दर्ज की गईं।
पूर्व टीवी होस्ट और PAN सदस्य उया कुया के पूर्वी जकार्ता स्थित घर में प्रदर्शनकारियों ने लूटपाट की।
दक्षिण जकार्ता में विधायक एको पैट्रियो के घर में तोड़फोड़ की गई। प्रदर्शनकारी रेफ्रिजरेटर, कपड़े, गैस सिलेंडर तक उठा ले गए।
इन नेताओं की आलोचना तब शुरू हुई थी जब संसद के वार्षिक सत्र में इनके डांस करने के वीडियो वायरल हुए थे।
भत्तों पर जनता का फूटा गुस्सा
इस हिंसा की मुख्य वजह है वह खुलासा जिसमें सामने आया कि इंडोनेशिया के 580 सांसदों को हर महीने 50 लाख रुपिया (करीब 3,075 डॉलर) का मकान भत्ता दिया जा रहा है। यह भत्ता राजधानी के न्यूनतम वेतन से 10 गुना अधिक है।
महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त जनता ने इस खबर के बाद गहरा आक्रोश जाहिर किया और सड़कों पर उतर आई।
डिलीवरी राइडर की मौत बनी आग में घी
29 अगस्त को जकार्ता में पुलिस की बख्तरबंद गाड़ी द्वारा एक डिलीवरी राइडर को कुचलने की घटना ने आंदोलन को और उग्र बना दिया। इसके बाद देश भर में सुराबाया, योग्याकर्ता, मेदान, मकास्सर, मनाडो, बांडुंग और पापुआ जैसे शहरों में प्रदर्शन तेज हो गए। सड़कें ब्लॉक की गईं, ट्रैफिक ठप हो गया, और कई जगह सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
राष्ट्रपति ने रद्द की चीन यात्रा
देश में बिगड़ते हालात के मद्देनज़र राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो को अपनी प्रस्तावित चीन यात्रा रद्द करनी पड़ी। उन्होंने कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए देश में ही रहने का फैसला किया।
सुरक्षा पर सवाल
प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर पुलिस स्थिति पर नियंत्रण नहीं पा सकी। कुछ स्थानों पर तो पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने रहे, जिससे लोगों का गुस्सा और भड़क गया।

