Friday, April 3, 2026
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चुनाव से गौण हो रहे जनता के मुद्दे

  • सियासी नेताओं में तेज हुई जुबानी जंग
  • विकास और रोजगार पीछे छूटा, जाति-धर्म पर हो रही चर्चाएं

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: यूपी चुनाव में मतदान की तारीख को नजदीक आता देख सियासी दलों में जुबानी जंग तेज हो गई है। नेताओं की इस जुबानी जंग में जनता के मूल मुद्दे पीछे छूट रहे हैं। जबकि अभी तक सूबे में विकास-रोजगार की बात करने वाली राजनीतिक पार्टियां विकास के बजाए जाति-धर्म और दंगे पर पहुंच गई हैं।

भाजपा ने जहां एक ओर गठबंधन नेताओं की चुनावी गर्मी निकालने की बात कही है, वहीं गठबंधन ने गर्मी निकालने वालों की चर्बी उतारने की बात कहकर चुनावी माहौल को गर्मा दिया है। राज्य में मतदान का पहला चरण आगामी 10 फरवरी को है। जनवरी माह तक सूबे में विकास कार्यों और रोजगार के मुद्दों को सियासी दलों द्वारा बढ़ा-चढ़ाकर उछाला जा रहा था, मगर फरवरी माह प्रारंभी होते ही एकाएक यूपी का सियासी माहौल गर्मा गया है।

नेताओं में जनता के मूल मुद्दों को छोड़कर हिंदु-मुसलमान, जाति और दंगे पर राजनीति शुरू हो गई। जैसे ही नेताओं की यह जुबानी जंग हुई, वैसे ही विकास, रोजगार, महिला सुरक्षा और नारी सशक्तिकरण के मुद्दे चुनाव में पीछे हो गए हैं।

योगी ‘गर्मी’ तो जयंत आ गए ‘चर्बी’ पर

चुनावी संग्राम के बीच सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने गठबंधन के नेताओं की गर्मी निकालने की बात कही है। योगी का यह बयान आने के बाद रालोद सुप्रीमो जयंत चौधरी ने गर्मी निकालने वालों की चर्बी उतारने की बात कह दी। इसके बाद दोनों ओर से नेताओं में जुबानी जंग तेज हो गई।

यूपी के पहले चरण के चुनाव प्रचार के दौरान अब लगातार सीएम योगी अपनी गर्मी निकालने वाले बयान को दोहरा रहे हैं। बुधवार को बुलंदशहर में प्रचार के दौरान भी उन्होंने अपने इस बयान को पुन: दोहरा दिया है।

अपनी चुनावी पिच पर भाजपा दे रही न्योता

भाजपा विरोधी दलों को अपनी तैयार की गई चुनावी पिच पर खेलने के लिए धीरे-धीरे खींचकर ला रही है। हालांकि अभी तक गठबंधन भाजपा की पिच से बचकर चुनावी बैटिंग कर रहा है, मगर योगी ने अपने गर्मी और अमित शाह ने दंगे वाला बयान देकर गठबंधन की दुखती रग को छेड़ने की कोशश की है।

हालांकि इसके बाद जयंत चौधरी ने भाजपा पर प्रहार किया है, मगर उनकी पिच पर खेलने से खुद को बचाकर। शायद यही भाजपा चाहती है, कि गठबंधन के नेता भी किसान, विकास और रोजगार के मुद्दे से हटकर उनकी जुबानी जंग का जवाब दें। फिलहाल चुनावी प्रचार से लेकर अखबार और चैनलों तक पर गर्मी और चर्बी के बयान को हवा दी जा रही है।

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