Wednesday, March 4, 2026
- Advertisement -

सार्वजनिक बोले तो पारदर्शी

एक अदद आदमी न्यूनतम दो चेहरे लेकर घूमता है। उसका एक चेहरा व्यक्तिगत होता है और दूसरा चेहरा सार्वजनिक होता है। लड़ाई बस यहीं से शुरू होता है कि लोगों को उसका कौन सा चेहरा भाता है। उसका व्यक्तिगत चेहरा या सार्वजनिक चेहरा। सार्वजनिक जीवन में व्यक्ति को नख से शीश तक पब्लिक की नजरों में रहना होता है। पब्लिक उसके रहन सहन, जीवन शैली और उसके द्वारा किए जाने वाले कार्यों का पल पल का हिसाब रखना चाहती है। बाकायदा उसके साक्षात्कार सुनती है। साक्षात्कार सुनकर उस व्यक्ति की जीवन चर्या से प्रभावित होकर उसे अपना नायक मानकर या तो उसका अनुसरण करना प्रारम्भ कर देती है या उसे खलनायक की संज्ञा देकर उससे दूरी बनाने लगती है। सार्वजनिक है तो उसका प्रत्येक आचरण भी सार्वजनिक होना सुनिश्चित होता है। ऐसे में अपनी छवि बनाने या बचाए रखने का बड़ा दायित्व सेलिब्रिटी का होता ही है।

अपने एक मित्र हैं। अपनी भाषण कला से सभी को प्रभावित करते हैं। उनकी खासियत यही है कि वे सिर्फ अपनी अपनी ही कहते हैं, किसी दूसरे की नही सुनते। दूसरे की सुनेंगे तो उत्तर भी देना पड़ेगा। एक चुप सौ को हराए की तर्ज़ पर चुप रहते हैं। इसलिए वे किसी की नही सुनते। अलबत्ता जब अपनी बात कहनी होती है, तो विशिष्ट लोगों को ही साक्षात्कार देने के लिए न्यौता देते हैं। फिर अपनी जीवन यात्रा का खुलासा करते हैं कि जिÞंदगी के सफर की शुरुआत उन्होंने कहां से की। उसके बाद कैसे कैसे कष्ट भोग कर वह वीर तुम बढ़े चलो की तर्ज़ पर आगे बढ़ते रहे। उन्हें आम खाने का शौक है, मगर वे आम काटकर नहीं खाते, चूस कर आम खाने में ही उन्हें आनंद की अनुभूति होती है। लोग उनकी जीवन यात्रा पर चर्चा करते हैं और अपने अपने तर्क-कुतर्क करते हैं। यदि वे सार्वजनिक जीवन में मुखर न होते, तब भला कौन उनकी चर्चा करता।

बहरहाल सार्वजनिक जीवन में किसी व्यक्ति का होना सर पर लटकती तलवार के नीचे खड़े होने जैसा है। अपुन के दूसरे मित्र हैं। उनका सार्वजनिक चरित्र ऐसा है जिस पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उनका चरित्र अनुकरण योग्य है भी अथवा नही। उनकी स्थिति बिन पेंदे के लोटे सरीखी रहती है। पता नहीं वे कब किसे चोर बताने लगें और कब किसे ईमानदार। एक मंदबुद्धि बालक की तरह उन्हें कुछ नारे याद करने होते हैं। कभी बच्चों के साथ सड़क पर नारे लगाते हैं कि गली गली में शोर है उनका साथी चारा चोर है।

कभी चारा चोर से हाथ मिलाते हैं कभी किसी दूसरे चोर से। वह नारा लगाते हैं तो बुद्धिजीवी उनके अतीत को खंगालने लगते हैं। उनकी बुद्धि लब्धि से अधिक बुद्धिमान छह छह साल के बच्चे उनके कान में फुसफुसाते हैं कि मंदबुद्धि मित्र सही कह रहे हैं। यदि वे सार्वजनिक जीवन में न होते, तो लोग उनकी असलियत जानकर उनका मजाक न उड़ाते। वे मजाक प्रूफ हैं । कोई उनका कितना ही मजाक उड़ाए, उन पर कोई फर्क नही पड़ता । सार्वजनिक जीवन में निर्लज्ज आचरण अपनाना भी महत्वपूर्ण घटक है।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

Chandra Grahan 2026: ग्रहण समाप्ति के बाद तुरंत करें ये 5 काम, जीवन में सुख-शांति का होगा वास

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत...

US: टेक्सास में गोलीबारी में भारतीय मूल की छात्रा समेत चार की मौत, 14 घायल

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: अमेरिका के टेक्सास राज्य की...
spot_imgspot_img