
मैं(ईश्वर) सभी प्राणियों में हूं। नाम या रंग चाहे कोई भी क्यों न हो, सबकी काबिलियत एक सी है और सबका बराबर सम्मान है। सब मेरे हैं। धर्मग्रंथों के अनुसार कोई ऊंचा या नीचा नहीं है। पंडित जो कहते हैं वह झूठ है। उच्च और निम्न जातियों के काल्पनिक विभाजन में उलझकर हम अपनी राह से भटक गए हैं। यह विभ्रम दूर किया जाना चाहिए।’ ये शब्द हैं हिंदू राष्ट्र निर्माण के प्रोजेक्ट में जुटे ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के। वे संत रैदास से जुड़े आयोजन के अवसर पर बोल रहे थे।आरएसएस, भाजपा के अलावा अनेक संस्थाओं का पितृ संगठन है और ये सभी उसके लक्ष्य की प्राप्ति में उसकी मदद कर रहे हैं। नि:संदेह दलितों को आकर्षित करने का हिंदू राष्ट्रवादियों का यह सबसे ताजा प्रयास है।