- बहुचर्चित प्रकरण में तीन दशक बाद आया फैसला
- 25 जनवरी 1995 को सीबीआई ने दर्ज कराए थे मुकदमें
जनवाणी संवाददाता |
मुजफ्फरनगर: देशभर को हिलाकर रख देने वाले रामपुर तिराहा कांड में पीएसी के दो सिपाहियों को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है और दोनों पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना भी किया गया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-7 के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने सजा सुनाई है।
अभियोजन के अनुसार एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच की और 25 जनवरी 1995 को सीबीआई ने पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे।
शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजीव शर्मा, सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी परवेंद्र सिंह और उत्तराखंड संघर्ष समिति के अधिवक्ता अनुराग वर्मा ने बताया कि मिलाप सिंह की पत्रावली में प्रकरण में फैसले पर कोर्ट ने दोनों सिपाहियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दुष्कर्म के मामले में अभियुक्त पीएसी के सिपाही मिलाप सिंह और वीरेंद्र प्रताप पर दोष सिद्ध किया। पीएसी गाजियाबाद में सिपाही मिलाप सिंह मूल रूप एटा के निधौली कलां थाना क्षेत्र के होर्ची गांव का रहने वाला है, जबकि दूसरा आरोपी सिपाही वीरेंद्र प्रताप मूल रूप सिद्धार्थनगर के गांव गौरी का रहने वाला है।

