Thursday, October 28, 2021
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रैपिड रेल के काम ने पकड़ी स्पीड

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  • अधिकारियों ने बेगमपुल का किया निरीक्षण
  • प्रशासन और मेट्रो की टीम ने व्यापारियों से भी की बातचीत
  • स्टेशन वाली जगह के कई बिन्दुओं पर डाली नजर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: बहुत जल्द रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) ट्रेन यानी रैपिड रेल का काम बेगमपुल पर शुरु होता दिखने लगेगा। इसको लेकर मेट्रो के अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने बेगमपुल के उन स्थानों को बारीकी से देखा जहां पर स्टेशन का निर्माण होना है। अधिकारियों ने बेगमपुल के उन व्यापारियों से बात की जिनकी दुकानें इस हद में आ रही है।

बुधवार को मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े तमाम अधिकारियों के साथ अपर जिलाधिकारी नगर अजय तिवारी ने बेगमपुल के उन प्वाइंटों को बारीकी से देखा जहां पर मेट्रो स्टेशन प्रस्तावित है। अधिकारियों ने सड़क के दोनों तरफ कई राउंड निरीक्षण किया।

बाद में गड्ढा मार्केट के पास गए और स्टेशन की रूपरेखा के बारे में विचार-विमर्श करते रहे। अपर जिलाधिकारी नगर ने बताया कि मेट्रो के अधिकारी भविष्य में होने वाले निर्माण कार्यों के बारे में रूपरेखा पर चर्चा कर रहे थे। बाद में अधिकारियों ने कुछ व्यापारियों से बात भी की।

व्यापारियों ने उनसे मुआवजे की बात की तो उनसे कहा कि इस संबंध में कैंट बोर्ड के सीईओ से मेट्रो और प्रशासन की वार्ता चल रही है। इस बाजार के 65 दुकानदारों को संभवत हटना होगा। कुछ व्यापारियों ने कहा कि उनको मुआवजा किस आधार पर मिलेगा, इस पर अधिकारियों ने कहा कि कैंट बोर्ड व्यापारियों को किरायेदार मानता है और सीईओ से वार्ता भी इस बारे में हुई है।

मेट्रो के अधिकारियों के दौरे से बेगमपुल के व्यापारियों की बैचेनियां बढ़ गई है और हर कोई इस बात को लेकर आशंकित था कि मेट्रो का काम अगर शुरु हो गया तो यहां से जाना होगा। अधिकारियों के जाने के बाद व्यापारियों ने काफी देर तक आपस में विचार-विमर्श भी किया। अधिकारियों के एक घंटे के दौरे ने पूरे बेगमपुल में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया।

केंद्र सरकार एनसीआर के लोगों को सुविधा देने के लिए दिल्ली से गाजियाबाद होते हुए मेरठ तक रैपिड रेल चलाने की परियोजना पर काम कर रही है। इसे 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना में लागत का 15 प्रतिशत राज्य सरकार और शेष 85 प्रतिशत केंद्र सरकार को देना है।

दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर प्राथमिकता वाले तीन आरआरटीएस कॉरिडोर में से एक है। 82 किमी लंबा दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर भारत में लागू होने वाला पहला आरआरटीएस कॉरिडोर है। यह कॉरिडोर दिल्ली से मेरठ के बीच यात्रा के समय को लगभग एक तिहाई कर देगा।

वर्तमान में सड़क मार्ग से दिल्ली से मेरठ तक जाने में 3-4 घंटे का समय लगता है। आरआरटीएस की मदद से यह दूरी 60 मिनट से भी कम मे तय की जा सकेगी। साहिबाबाद से शताब्दी नगर के बीच लगभग 50 किमी लंबे खंड पर सिविल निर्माण कार्य पूरे जोरों से जारी हैं।

साथ ही गाजियाबाद, साहिबाबाद, गुलधर और दुहाई आरआरटीएस स्टेशन का निर्माण कार्य भी पूरे जोरों पर चल रहा है। साहिबाबाद से दुहाई के बीच के 17 किमी लंबे प्राथमिक खंड पर परिचालन 2023 से प्रस्तावित है। जबकि पूरे कॉरिडोर को 2025 में खोल दिया जाएगा।

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