जनवाणी संवाददाता |
नकुड़: दश लक्षण महापर्व के सातवें दिन 13 दीप विधान का पाठ करते हुए वासुपूज्य भगवान की पूजा के साथ उत्तम तप धर्म की पूजा में 24 तीर्थंकर भगवान को अर्घ्य समर्पित किये गए। इस अवसर पर संदेश दिया कि जीवन का सार तप है इसलिए मन के भीतर की अपार संभावनाओं को पहचानना उत्तम तप है।
श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन वासुपूज्य भगवान की पूजा के साथ उत्तम तप धर्म की पूजा में शांतिधारा करते हुए अर्घ समर्पित किये गए।रात्रि में जैन समाज के अध्यक्ष संदीप जैन द्वारा आयोजित धार्मिक अंताक्षरी प्रतियोगिता में प्रतियोगियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और इनाम जीते और महिलाओं द्वारा श्री जी के सम्मुख किये गए जैन नृत्यों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
जैम मिलन के महामंत्री पंकज जैन,विवेक जैन ने बताया कि विधान पाठ में मनोज जैन,धीरज जैन,अवनीश जैन,निशांत जैन,संयम जैन,वंसुल जैन,पंकज जैन सर्राफ,सुनील जैन,नीलम जैन,इंदु जैन ने भाग लिया।इस अवसर पर अभिषेक जैन, प्रतिभा जैन, राजू जैन आदि उपस्थित रहे।

