Thursday, February 12, 2026
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दो प्वाइंटों पर टोल वसूली पर राहत

  • दिल्ली, रुड़की रोड पर नहीं वसूला जाएगा टोल, टंचिंग ग्राउंड के समीप बनेगा वसूली प्वाइंट
  • 11 प्वाइंटों के टोल के नए ठेके के लिए सप्ताह भर में मांगेंगे नई निविदाएं

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: टोल प्वाइंटों की वजह से आम आदमी को हो रही परेशानी दूर करने के लिए जनवाणी की मुहिम रंग लाई। कैंट बोर्ड की गुरुवार को हुई बैठक में जबरदस्त तनातनी और ऊहापोह के बाद आखिरकार दो टोल प्वाइंटों दिल्ली रोड व रुड़की रोड को वाहन एंट्री के नाम पर दिए जाने वाले टोल ठेके में शामिल किए जाने से मनाही हो गई है।

इतना ही नहीं मेरठ नंबर यूपी-15 नंबरों से टोल वसूली न किए जाने का भी निर्णय लिया गया है। दो प्वाइंट खत्म किए जाने के बाद परीक्षितगढ़ रोड टंचिंग ग्रांउड के समीप नए प्वाइंट शुरू किए जाने का निर्णय लिया गया। दरअसल, ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन मेरठ ने भी इसको लेकर आवाज उठायी थी कि मेरठी नंबर वाले कॉमर्शियल वाहनों से टोल वसूली न की जाए।

विधायक और सीईओ आमने-सामने

विधायक सत्य प्रकाश अग्रवाल और सीईओ नवेंद्र नाथ के बीच व्हीकल एंट्री फीस को लेकर तार्किक बहस हुई। सीईओ ने रेवेन्यू की दलील दी तो विधायक ने जन सुविधाओं की। इस दौरान बोर्ड अध्यक्ष ब्रिगेडियर नीरज राठौड़ ने बोर्ड के सभी सदस्यों से उक्त विषय पर उनकी राय पूछी। बीना वाधवा ने बीच का रास्ता निकलने की बात कही।

आय से विकास बोली, मंजू गोयल

मंजू गोयल ने कहा के कैंट बोर्ड में रेवेन्यू बढ़ेगा तो विकास कार्य भी होंगे। अत: ऐसा कोई कार्य न किया जाय, जिससे बोर्ड की आय कम हो। उपाध्यक्ष विपिन सोढ़ी व छह अन्य सदस्यों द्वारा बोर्ड अध्यक्ष को एक लिखित प्रस्ताव भी दिया गया था। जिसमें विधायक की बात का समर्थन करते हुए तीन टोल प्वाइंट कम करने को कहा गया था, लेकिन अंत में उपाध्यक्ष विपिन सोढ़ी ने कहा के पहले समुचित व्यवस्था बन जाय, तब बाकी टोल प्वाइंट पर भी विचार किया जाए।

गड्ढा मार्केट, अमृत होटल के नीचे शिफ्ट होगा

गड्ढा किरायेदार गड्ढा मार्केट के व्यापारियों को आबूलेन अमृत होटल के नीचे बनी फड़े आवंटित की जाएंगी। इसके अलावा आवश्यक ट्रेड लाइसेंस शुल्क के निर्धारण के लिए एक कमेटी का गठन किया गया। जिसमें सीईओ नवेंद्र नाथ व जीई साउथ एन मैतेई व सदस्य बीना वाधवा बुशरा कमाल व नीरज राठौड़ नामित किये गए। इसके अलावा दुकानों का किराया, जिसे पूर्व में 400 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया था, उसे घटा दिया गया है। अब 10 फीसदी वृद्धि की जाएगी। वीना वाधवा ने इस राहत के लिए बोर्ड का आभार जताया।

अन्य निर्णय

बोर्ड के डोर-टू-डोर ठेकेदार को 2016 सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के रूल्स के हिसाब से ठेका चलाने के निर्देश दे दिए गए हैं। जिसका उन्हें अपनी कार्यशैली में पालन करना होगा। बहुत वर्षों बाद कैंट बोर्ड द्वारा भवनों को रजिस्ट्री के लिए अनुमति प्रदान की गई है। सदस्य रिनी जैन बोलीं तोपखाने वाला गेट खुले।

बुशरा बोलीं, विधायक का साथ दिया

बोर्ड में एक मात्र गैर भाजपा सदस्य बुशरा कमाल ने टोल विषय पर कैंट विधायक का सहयोग किया। इस पर उनका कहना था कि विधायक के जनहित के मुद्दों पर हमेशा सहयोग देती रहेंगी।

भावुक हुए सीईओ

सीईओ कैंट बोर्ड को आय न होने पर सेलरी व पेंशन आदि की समस्या बताते हुए भावुक हो गए। उनका कहना था कि कोरोना काल के सबसे बड़े योद्धा सफाई कर्मचारियों की तनख्वाह के संकट है। पिछले कई वर्षों से ग्रेच्युटी आदि का भुगतान नहीं हो पा रहा।

ये रहे बैठक में मौजूद

बोर्ड बैठक में बोर्ड अध्यक्ष ब्रिगेडियर नीरज राठौड़, कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल, उपाध्यक्ष विपिन सोढ़ी, एडम कमांडेंट व अन्य सैन्य अधिकारी और सिविल सदस्यों में रिनी जैन, बुशरा कमाल, बीना वाधवा, नीरज राठौड़, अनिल जैन, मंजू गोयल, धर्मेंद्र सोनकर व प्रशासनिक सदस्य एडीएम सिटी व कार्यालय अधीक्षक जयपाल तोमर शामिल हुए। बोर्ड बैठक के बाहर ठेकेदार व समर्थकों के अलावा ट्रांसपोर्टर गौरव शर्मा व विपुल सिंहल, भाजपा नेता गौरव शर्मा, पूर्व सदस्य अजमल कमाल आदि भी मौजूद रहे।

ठेकेदार की ‘ना’

दो प्वाइंट हटाए जाने तथा मेरठ नंबर की सभी प्रकार की गाड़ियों से टोल वसूली को मना किए जाने के बाद प्रस्तावित टोल ठेके के लिए निविदाएं डालने वाले ठेकेदार ने ठेका लेने से ना कर दिया है। उनका कहना है कि कैंट बोर्ड बैठक में जो निर्णय लिए हैं।

अब ठेका चलाना कोई समझारी नहीं होगी। करीब 19 लाख सालाना के ठेके में अब ऐसा कुछ नहीं, आगे बढ़ा जाए। माना जा रहा है कि ठेके के नई शर्तें तैयार कर नया ठेका शीघ्र छोड़ा जाएगा। केपी सिंह ने बताया कि नए ठेके की नियम व शर्तें देखकर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल छह फरवरी तक उनके लोग वसूली करेंगे।

अंदर सीईओ तो बाहर ओएसओ की भिड़ंत

कैंट बोर्ड की बैठक के दौरान सदन के भीतर सीईओ कैंट व विधायक के बीच तनातनी चल रही थी। जबकि बाहर सीईओ के पीएसओ और कैंट विधायक के व्यक्तिकसहायक भिड़ गए थे। दरअसल, हुआ यह कि टोल के तीन प्वाइंट खत्म किए जाने को लेकर सदन में सबसे ज्यादा आमना सामना सीईओ व विधायक के बीच ही हुआ।

किसी तरह यह मामला निपटा तो कैंट बोर्ड के वार्ड सात के सदस्य धर्मेंद्र सोनकर का प्रकरण विधायक व उपाध्यक्ष ने सदन में उठाया। धर्मेंद्र सोनकर को अपमानित किए जाने के आरोप सीईओ पर लगाए। सदन में सीईओ ने इसको लेकर खेद व्यक्त किया। बोर्ड बैठक के बाद इसकी चर्चा हो रही थी कि सीईओ ने खेद जताया। ये बात शायद सीईओ के पीएसओ को अखरी और वह कैंट विधायक के व्यक्तिक सहायक से जा उलझा। अन्य लोगों ने किसी प्रकार मामले को शांत कराया।

उपाध्यक्ष को लगाई लताड़

कैंट बोर्ड अध्यक्ष ब्रिगेडियर अर्जुन सिंह ने बैठक के दौरान उपाध्यक्ष विपिन सोनी को जमकर लताड़ दिया। दरअसल हुआ यूं कि उपाध्यक्ष ने बैठक में अचानक बोर्ड के स्टाफ को लेकर शिकायत भरे लहजे में कहा कि आजकल कैंट बोर्ड के स्टाफ का रवैया ठीक नहीं है।

कैंट बोर्ड का माहौल खराब होने की बात कही इसको लेकर अध्यक्ष ब्रिगेडियर अर्जुन सिंह ने नसीहत देते हुए उपाध्यक्ष को लता लगानी शुरू कर दी। उन्होंने यहां तक कह दिया कि आपका रवैया ठीक नहीं, बजाएं आम आदमी की समस्याएं उठाने और समस्याओं का समाधान व सुझाव देने के बजाय इधर-उधर की बातें अधिक हो रही हैं। ये ठीक नहीं है। अध्यक्ष की इस बात से एक बार तो सदन में सन्नाटा पसर गया।

कैंट बोर्ड पर संकट डीईओ में मर्ज होगा स्टाफ

सभी आठ वार्डों के नगर निगम में शामिल होने के आसार बंगला खाली करना होगा या फिर कराना होगा फ्री होल्ड

कैंट प्रशासन ने पीएमओ को भेजी मर्ज किए जाने की सिफारिश

कैंट बोर्ड के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। यदि सब कुछ तय प्लॉनिंग के अनुसार हुआ तो कैंट बोर्ड पूरी तरह से खत्म किया जाएगा। इसका स्टाफ डीईओ कार्यालय में मर्ज होगा। इसके साथ ही कैंट क्षेत्र में जितने भी ओल्ड ग्रांट के बंगले हैं सभी को फ्री होल्ड किया जाएगा।

इसके दो फायदे होंगे। पहला यह कि फ्री होल्ड कर सरकारी खजाने में भारी भरकम रकम आ जाएगी। दूसरा यह कि बंगलों की अवैध खरीद फरोख्त और अवैध कब्जों को भी खत्म किया जा सकेगा। जो बंगले बाकी रह जाएंगे उनकी देखरेख का काम भर डीईओ के पास रह जाएगा। इसके चलते कैंट बोर्ड के स्टाफ में बड़ी कटौती की बात से भी जानकारी इनकार नहीं कर रहे हैं।

सूत्रों ने जानकारी दी कि पिछले साल माह सितंबर में पीएमओ से इसको लेकर देश भर की सभी 62 छाबनियों से राय मांगी गई थी। मेरठ छाबनी ने सभी आठ वार्डों की भौगालिक स्थिति के अलावा किस वार्ड में कितने मतदाता हैं। इसके अलावा कितने स्कूल कालेज व चिकित्सा व अन्य संस्थान हैं, इन सब को लेकर बिंदुवार रिपोर्ट तैयार कर पीएमओ को भेज दी गई है।

बताया गया है कि सेना की ओर से अब देश की छावनियों का भार उठाने से ना किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने देश भर की सभी छाबनियां खत्म कर उनके स्टाफ को रक्षा संपदा कार्यालय के साथ मर्ज कर दिए जाने की संभावना तलाशनी शुरू की है। माना जा रहा है कि इसको लेकर नीतिगत निर्णय लिया जा चुका है। अब केवल औपचारिक घोषणा होनी बाकी है।

इस प्रकार की जानकारियों की आहट ने कैंट बोर्ड के उन सदस्यों की नींद उड़ाकर रख दी है जो फुल टाइम केवल कैंट बोर्ड की राजनीति करते हैं या पूरी तरह से कैंट बोर्ड पर ही निर्भर हैं। इस प्रकार की खबरों को उनके लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है चुनावी तैयारियों में लगे हुए हैं। हालांकि जहां तक चुनावी तैयारियों का सवाल है तो उसको लेकर भी तमाम प्रकार की अटकलें लगाई जा रही हैं।

कयास लगाए जा रहे हैं कि बोर्ड भंग किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में प्रशासन की तैनाती की जाएगी। क्योंकि उपाध्यक्ष का चुनाव सीधे पब्लिक द्वारा कराए जाने की स्थिति में जो विधायी कार्रवाई की जानी चाहिए उसमें विलंब के चलते ही एक बार फिर लंबे अरसे तक कैंट बोर्ड के भंग रहने की अटकलें लगाई जा रही हैं। इसके संकेत आज भाजपाइयों ने भी दिए हैं।

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