
देश में इन दिनों ‘रेवड़ी कल्चर’ काफी चर्चा में है। यानी मुफ्त में दी जाने वाली योजनाओं का चलन। जैसे फ्री बिजली, फ्री पानी या चुनाव के दौरान लैपटॉप, कैश या दूसरी चीजों को दिए जाने की घोषणा। आजकल चुनावों से पहले मतदाताओं को लुभाने के लिए मुफ्त में आटा, बिजली, पेंशन, बेकारी भत्ता, प्लॉट या मकान, महिलाओं को बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा आदि तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं। कांग्रेस ने अभी-अभी कर्नाटक विधानसभा चुनाव इसी तरीके से जीता है। सुप्रीम कोर्ट ने मुफ्त रेवड़ी कल्चर पर एतराज किया है। चुनाव आयोग को इसे आचार संहिता का उल्लंघन घोषित कर देना चाहिए। सवाल यह पैदा होता है कि इन मुफ्त की सुविधाओं के लिए पैसा कहां से आएगा। या तो सरकारों को उधार लेना पड़ेगा या फिर नए कर लगाने पड़ेंगे।सवाल उठता है कि राजनेताओं को सत्ता तक पहुंचाने के लिए हम ज्यादा टैक्स क्यों दें।