Wednesday, February 11, 2026
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खून से लाल होतीं सड़कें

 

SAMVAD


Rohit mahaswariबीती 10 जुलाई को बिहार से दिल्ली जा रही डबल डेकर बस आगरा एक्सप्रेसवे पर यूपी के उन्नाव जिले में दुर्घटना की शिकार हो गयी और इस दर्दनाक हादसे में बस में सवार 18 यात्रियों की मौत हो गयी। हादसे के बाद बस के सुरक्षा मानकों पर सवाल उठने लगा है। लोग भी हादसा होने के बाद सीख नहीं ले रहे हैं। असल में देश में सड़क हादसों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। इसके लिए वाहन चालकए सरकार और प्रशासन संयुक्त रूप से जिम्मेदार हैं। सड़क हादसों के कई कारण हैं। शराब पी कर वाहन को तेज चलाने और स्टंट करने से भी सड़क हादसे हो रहे हैं। इसलिए शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्ती होनी चाहिए। उत्तर प्रदेश के उन्नाव बस हादसे का शिकार हुई बस का ड्राइवर नशे में था। यह बात सामने आ चुकी है। 30 मई को जम्मू-कश्मीर में अखनूर के पास एक बस के गहरी खाई में गिरने से 20 से अधिक श्रद्धालुओं की मौत फिर से यह बता रही है कि अपने देश में किस तरह आए दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में लोग बड़ी संख्या में अपनी जान गंवाते हैं। इस बस दुर्घटना का कारण यह माना जा रहा है कि ड्राइवर या तो तेज रफ्तार से बस चला रहा थाए जिसके चलते वह सामने से आती कार को बचाने में अपना नियंत्रण खो बैठा या फिर उसे झपकी आ गई होगी। दुर्घटना का मूल कारण कुछ भी हो, जो लोग अपनी जान गंवा बैठे, उन्हें वापस नहीं लाया जा सकता। यह ठीक है कि राहत एवं बचाव कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया और इस हादसे पर राष्ट्रपति समेत प्रमुख नेताओं ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं, लेकिन यह प्रश्न तो अनुत्तरित ही है कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के ठोस उपाय कब किए जाएंगे? बार-बार यह तथ्य सामने आ रहा है कि भारत में कहीं अधिक सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं और उनमें बड़ी संख्या में लोग जान गंवाने के साथ जख्मी भी हो रहे हैं, लेकिन ऐसे कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैंए जिनसे सड़क हादसों पर प्रभावी ढंग से लगाम लगे। तेज गति और नशा करके वाहन चलानेए गलत तरीके से ओवरटेकिंग करनेए मोबाइल पर बात करते हुए ड्राइविंग करने और सड़कों पर गड्ढों के कारण सड़क हादसे ज्यादा हो रहे हैं। यातायात नियमों का पालन नहीं हो रहा है। इसकी एक वजह भ्रष्टाचार भी है नागरिकों में भी जागरूकता की कमी है। खासकर युवा असंयमित रूप से वाहन चलाते हैं। सड़क बनाने में भ्रष्टाचार होने और लापरवाही के कारण सड़क जल्दी टूट जाती है। सड़क पर बने गड्ढे हादसे की वजह बनते हैं।

भारत में कई ड्राइवर यातायात नियमों का पालन नहीं करते हैं और लापरवाही से गाड़ी चलाते हैं, जिससे वे खुद और दूसरों को जोखिम में डालते हैं। साथ ही लोगों को सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों का पालन करने के के बारे में जागरूक करने के लिए लगातार अभियानों चलाने की आवश्यकता है। यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुमार्ने के साथ कठोर सजा भी आवश्यक है। भारत के आज तक के युद्धों में जितने सैनिक शहीद नहीं हुएए उससे ज्यादा लोग सड़कों पर दुर्घटना में एक साल में मारे जाते हैं, इसलिए चिंतित सुप्रीम कोर्ट को यहां तक कहना पड़ा कि देश में इतने लोग सीमा पर या आतंकी हमले में नहीं मरते जितने सड़कों पर गड्ढों की वजह से मर जाते हैं। पिछले एक दशक में ही भारत में लगभग 14 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए हैं। चूंकि सड़क हादसे रोकने के आवश्यक उपाय नहीं किए जा रहे हैं, इसलिए उनमें मरने वालों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार 2022 में सड़क दुर्घटनाओं में एक लाख 68 हजार लोगों की जान गई। सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामले में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर हैए जबकि अन्य देशों के मुकाबले अपने देश में कहीं कम संख्या में वाहन हैं। इन मौतों का दुष्प्रभाव तो मृतकों के परिवार पर पड़ना स्वाभाविक ही है साथ ही देश की प्रगति भी इन हादसों से प्रभावित होती है।

मार्ग दुर्घटनाओं के कारण किसी से छिपे नहीं। यातायात नियमों का उल्लंघन, खटारा वाहन, अकुशल चालक सड़क हादसों के मूल कारण हैं। ये ऐसे कारण नहीं, जिनका निवारण न किया जा सके, लेकिन दुर्भाग्य से इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। परिणाम यह है कि देश के किसी न किसी हिस्से में करीब-करीब प्रतिदिन कोई न कोई बड़ा सड़क हादसा होता है और उसमें लोग मारे जाते हैं अथवा गंभीर रूप से घायल होते हैं। शासन-प्रशासन इन हादसों पर शोक संवेदना जताकर कर्तव्य की इतिश्री तो कर लेता है, लेकिन यह देखने से इनकार करता है कि उन्हें रोका जा सकता है और रोका जाना चाहिए। सड़क दुर्घटनाओं में मरने वाले अधिकांश लोग अपने घर के कमाऊ सदस्य होते हैं। उनके न रहने से परिवार विशेष को ही क्षति नहीं पहुंचती, बल्कि समाज और राष्ट्र भी किसी न किसी रूप में कमजोर होता है। विश्व बैंक के एक आकलन के अनुसार देश का सकल घरेलू उत्पाद अभी जितना है, उसमें हर साल तीन प्रतिशत की और बढ़ोतरी होतीए यदि भारत में सड़क दुर्घटनाओं में इतने अधिक लोगों की जान न जाती।

सड़क दुर्घटनाओं के लिए सरकार और खराब सड़कों को दोष देना तो आसान है, मगर लोग इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से साफ बच निकलते हैं। विशेषज्ञों के अनुसारए भारत में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में शहरीकरण की तीव्र दर, सुरक्षा के पर्याप्त उपायों का अभाव, नियमों को लागू करने में विलंब, नशीली दवाओं एवं शराब का सेवन कर वाहन चलाना, तेज गति से वाहन चलाते समय हेल्मेट और सीट बेल्ट न पहनना आदि हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ‘ग्लोबल स्टेटस आॅन रोड सेफ्टी रिपोर्ट 2018’ के अनुसार सड़क हादसों में होने वाली कुल मौतों में 4 प्रतिशत शराब पीकर वाहन चलाने वालों की होती हैं। इसी प्रकार दुर्घटना में मरने वाले पुरुषों की संख्या लगभग 86 प्रतिशत है, जबकि महिलाओं की संख्या लगभग 14 प्रतिशत है।

यातायात पुलिस को जागरूकता अभियान के माध्यम से जनकृजन तक सड़क सुरक्षा का संदेश पहुंचाना चाहिए। अभिभावकों का भी यह कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को यातातात नियमों के बारे में जरूर जागरूक करें। निंयत्रित गति सीमाए यातायात नियमों का पालन और शांत दिमाग से वाहन चाल करके हम इस प्रकार के सड़क हादसों से बच सकते है। सड़क सुरक्षा जागरूकता के लिए लगातार अभियान चलाया जाए। यातायात नियमों का सख्ती से पालन करवाया जाए। देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकना है तो सबसे पहले जो वाहन चालक निर्धारित गति से तेज चला, उसका लाइसेंस निरस्त कर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी। यातायात पुलिस को भी पूरी जिम्मेदारी से काम करना चाहिए।


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