Friday, April 3, 2026
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स्कूल चलो अभियान सही, लेकिन सिस्टम पर सवाल

  • कमालपुर स्थित सरकारी विद्यालयों में व्यवस्थाओं का आभाव
  • प्राथमिक विद्यालय में केवल पांच कमरे, छात्रों की संख्या 300 से अधिक

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: सरकारी विद्यालयों में नए सत्र के दौरान छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए हर संभव उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन स्कूलों में अब भी सिस्टम पर सवाल खड़े हैं। कमालपुर के सरकारी विद्यालयों का जायजा लेने पर कई अव्यवस्थाएं सामने आई। हालांकि स्कूल के स्टाफ ने खुलकर तो ज्यादा कुछ नहीं बताया, लेकिन जो समस्याएं सामने नजर आई, अगर उनमें भी सुधार हो सके तो यहां छात्रों को और अच्छी शिक्षा मिलने की उम्मीद है।

उच्च प्राथमिक विद्यालय कमालपुर

इस विद्यालय में छात्रों की उपस्थिति 70 से 80 प्रतिशत तक रहती है। हालांकि कोरोना काल के दौरान विद्यालय में छात्रों उपस्थिति कमी रही थी, लेकिन अब ठीक है। विद्यालय में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए स्कूल का स्टाफ क्षेत्र में घर-घर जाकर लोगों से मिल रहा है।

अपने बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए परिजनों को जागरूक किया जा रहा है। स्कूल चलो अभियान के तहत छात्रों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, यह अभियान पूरे अप्रैल माह चलाने की तैयारी है। स्कूल की हेडमास्टर मंजुलता ने बताया कि उनके यहां पर हर तरह की व्यवस्था है, जरूरत है अभिभावकों में भी जागरूकता आने की। सोमवार को सीएम के स्कूल चलो अभियान को मोबाइल द्वारा बच्चों को दिखाया गया।

प्राथमिक विद्यालय कमालपुर

इस स्कूल में छात्रों की संख्या अच्छी खासी है, मिड-डे-मील के लिए चार रसोइयां है। विद्यालय में पांच कमरों में शिक्षण कार्य होता है, कक्षा एक में सोमवार को छह नए छात्रों ने दाखिला लिया। कक्षा दो में 74, कक्षा तीन में 71, कक्षा चार में 95, जबकि कक्षा पांचवीं में 99 छात्र है। जिनकी कुल संंख्या 335 है। कुल शिक्षकों की संख्या नौ है। जिनमें एक प्रधानाध्यापिका है। पांच छात्राएं नवोदय विद्यालय में दाखिला लेने की तैयारी कर रही है, जो यहां से कक्षा पांचवीं पास कर चुकी है।

केवल पांच कमरे

विद्यालय में छात्रों की संख्या 335 है। जिनके और बढ़नें की उम्मीद है, लेकिन स्कूल में केवल पांच कमरे ही है। कमरे कम होने के कारण कक्षाओं में अलग-अलग सैक्शन नहीं बन पा रहे हैं। इतनी संख्या के लिए कमरे भी बढ़ने चाहिए। मिड-डे-मील के लिए चार रासोइयां है, जो स्कूल की ही रसोई में दोपहर का भोजन तैयार करती है।

विद्यालय की हेड मास्टर पंकज शर्मा ने बताया कि अगर स्कूल में कमरों की संख्या बढ़ जाए तो छात्रों को और अच्छी शिक्षा मिल सकती है। हर कक्षा का अलग सेक्शन बनाया जा सकता है। नए शिक्षा सत्र की शुरुआत हो गई है। जिसके बाद सरकार भी कदम उठा रही है। जिससे सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का स्तर और अच्छा हो सके, लेकिन अधिकतर विद्यालयों में कई तरह की अव्यवस्थाएं देखी जा रही है। अगर इनको दूर करने को लेकर भी सरकार द्वारा कुछ कदम उठाए जाएं तो काफी हद तक गरीब परिवारों के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सकती है।

कुल 171 छात्र है

उच्च प्राथमिक विद्यालय कमालपुर में कक्षा छह में 18 नए छात्रों ने दाखिला लिया है, कक्षा सातवीं में 88, जबकि कक्षा आठवीं में 75 छात्र है। जिनकी कुल संख्या 171 है। इसके और बढ़ने की उम्मीद है। विद्यालय में कुल आठ शिक्षक है। जिनमें छह शिक्षक व दो अनुदेशक है। स्कूल में प्रोजेक्टर व कंप्यूटर है, लेकिन चुनावों के दौरान वह चले गए, जो अभी वापस नहीं मिले हैं। स्कूल में कोई कंप्यूटर शिक्षक नहीं है। डीबीटी योजना का लाभ 137 छात्रों को मिला है।

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