- वसूली को पहुंच रहे गैंग, हाउस टैक्स के नाम पर निगम का चल रहा वसूली अभियान
- बिल जमा करने वालों को साल भर में दोबारा भेजे जा रहे हैं बिल
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शहर वाले पहले हाउस टैक्स बिल में खामियों से परेशान थे। अब साल भर में दूसरी बार हाउस टैक्स बिल भेजे जाने से मुसीबत बढ़ गई है। नगर निगम ऐसे हजारों लोगों को हाउस टैक्स असेसमेंट नोटिस जारी कर रहा है, जो पहले ही भुगतान कर चुके हैं। सोने पे सुहागा यह किया जा रहा है कि इन अनाप-शनाप बिलों को वसूलने के लिए खुद नगर निगम के बाबू टोलियों में गिरोह बनाकर वसूली के लिए भी पहुंच रहे हैं। फिर जिस उपभोक्ता से जहां तक सेटिंग हो, उससे वही पैसे लेकर छोड़ने का धंधा फल फूल रहा है। अधिकारियों की मौन स्वीकृति होने की वजह से वसूली के इस धंधे पर रोक नहीं लग पा रही है।
नगर निगम के पास शहर वासियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का दायित्व है। लोगों को पीने के लिए स्वच्छ जल, चलने के लिए साफ सुथरी सड़कें तथा रात्रि में पर्याप्त मात्रा में सड़कों पर प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए। इनमें से नागरिकों को भले ही कोई सुविधा मिले या न मिले, लेकिन नगर निगम इन सुविधाओं को देने की एवज में हाउस टैक्स, वाटर टैक्स, सफाई टैक्स तथा सीवर टैक्स की वसूली करता है। सबसे ज्यादा खेल नगर निगम के हाउस टैक्स अनुभाग में हो रहा है। नगर निगम ने शहर को तीन जोन में बांट रखा है। मुख्यालय जोन, कंकरखेड़ा जोन तथा शास्त्री नगर जोन।
इन तीनों जोनल कार्यालयों में अलग-अलग कर्मचारियों को तैनात किया गया है। ताकि नागरिकों की कोई समस्या न हो, लेकिन हो रहा इसके ठीक उलट है। नगर निगम के हाउस टैक्स अनुभाग के अधिकारी और कर्मचारियों ने इसी अनुभाग को वसूली का जरिया बना लिया है। नगर निगम के हाउस टैक्स अनुभाग में पहले हाउस टैक्स को अनाप-शनाप तरीके से बढ़ाकर भेजा जाता है। फिर इस बकाया धनराशि के लिए उपभोक्ता को नोटिस भी भेजा जाता है। जो इस नोटिस के झांसे में आ जाता है, तो उससे डर के बाद वसूली का धंधा होता है। और जो कायदे-कानून का जानकार होता है तो उसके आगे-आगे यह नगर निगम के बाबू भागे फिरते हैं।
तत्काल बिल जमा करने के नाम पर वसूली
अपनी वसूली बढ़ी हुई दिखाने के लिए हाउस टैक्स के कंकरखेड़ा जोन के अधिकारी और कर्मचारी नया खेल रच रहे हैं। वह छोटे बकायेदारों के घरों पर दस्तक देकर उनको हाउस टैक्स तत्काल जमा करने के लिए धमका रहे हैं। जो तत्काल हाउस टैक्स नहीं देता है तो उससे धमकाकर ऊपरी कमाई का जुगाड़ कर लिया जाता है और जो हीला हवाली करता है तो उसकी दुकान को सील करने की धमकी दी जाती है। अधिकारी भी इस खेल को जानते हैं, लेकिन वह भी चुप्पी साधकर बैठे रहते हैं।
बिल जमा, दोबारा फिर जोड़कर भेज रहे
सेक्टर-10 शास्त्री नगर में रहने वाले अख्तर हुसैन ने बताया कि पिछले साल निगम ने उन्हें 2113 रुपये का हाउस टैक्स बिल भेजा था। 10 प्रतिशत छूट देने के बाद उन्होंने 1902 रुपये जमा करा दिए। अब फरवरी माह के अंत में ही उनको दोबारा टैक्स बिल भेजा गया। इस बार 4226 रुपये का बिल था। इसमें वह राशि भी शामिल है जिसका भुगतान पहले ही गत वर्ष किया जा चुका था।
अख्तर हुसैन का कहना है कि दूसरा बिल मिलने पर वह भागे-भागे हाउस टैक्स मुख्यालय जोन पहुंचे। उनके पास पूर्व में जमा किये गये सभी बिल व उनकी रसीदें भी थीं। इन रसीदों को देखकर उनका पुराना बकाया बिल काटकर दोबारा सिर्फ 2113 रुपये का बिल बनाकर दिया गया। जिसको उन्होेंने तभी जमा कर दिया।
डाक्टरों को दी जा चुकी शत-प्रतिशत छूट
नगर निगम में अधिकारियों ने दो वर्ष पूर्व आईएमए हॉल में विशेष शिविर लगाकर शहर के सभी डाक्टरों के हाउस टैक्स के बिलों को एक सिरे से खत्म कर दिया था। जबकि यह सर्व विदित है कि डाक्टरों ने लॉकडाउन में भी चिकित्सा के पेशे को बाला-ए-ताक रखते हुए मरीजों से इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूली थी। फिर ऐसा क्या दान पुण्य का कारनामा डाक्टरों ने अंजाम दिया जो उनको इतनी बड़ी छूट दे दी गई कि पूरा का पूरा ही हाउस टैक्स खत्म कर दिया गया।
कोरे डिमांड नोटिस पर कर देते हैं साइन
नगर निगम के हाउस टैक्स अनुभाग के बाबुओं को जनता से पैसा ठगना होता है तो ठग के इस मकड़जाल को सही दिखाने के लिए कोरे डिमांड नोटिस पर साइन करके इन लुटेरों की फौज को शहर में भेज दिया जाता है। नगर निगम के इन शातिर बाबुओं द्वारा पहले तो फर्जी तरीके से नागरिक को फर्जी बिल भेजा जाता है। फिर जब नागरिक उस बिल को देखकर डर जाता है तो इसी डर को कैश करने का खेल शुरू हो जाता है।
इन बाबुओं के पास कोरी डिमांड नोटिस की पूरी बुकलैट होती है। जिसपर बाकायदा पहले ही अधिकारी के फर्जी साइन करा लिये जाते हैं। फिर मुंहमांगी मुराद पूरी होकर यही कोरे डिमांड नोटिस संबंधित नागरिक को थमा दिये जाते हैं। जबकि वास्तव में उसके खाते में सिर्फ वही रकम जमा कराई जाती है। जो वास्तव में काफी कम होती है। बाकी पैसे को यह शातिर आपस में बांट लेते हैं।
रंगेहाथ पकड़े जाने के बाद भी बेलगाम हो चुके निगम कर्मी
नगर निगम के हाउस टैक्स अनुभाग में बिल बढ़ाकर उसको कम करने का खेल कोई नया नहीं है। यहां कई बार रंगे हाथ बाबू पकड़े जा चुके हैं। गत माह 19 फरवरी को शहर के एक रत्न व्यापारी सुधांशु की शिकायत पर एंटी करप्शन की टीम ने नगर निगम के हाउस टैक्स अनुभाग के दो बाबुओं को डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। सुधांशु को नगर निगम के हाउस टैक्स अनुभाग की ओर से चार लाख रुपये का बकाया हाउस टैक्स को लेकर नोटिस भेजा गया।
विरोध के बाद नगर निगम के आठ कर्मचारी उनकी दुकान पर आए और बोले कि दो लाख रुपये दे दो। आपका आधा बिल खत्म कर दिया जायेगा। सुधांशु को इन टीम सदस्यों ने यह भी कहा कि इसमें से 50 हजार रुपये सरकारी खाते में जमा होंगे और डेढ़ लाख रुपये सेटिंग के लेकर वार्षिक बिल 50 हजार रुपये कर दिया जाएगा। फिर वार्षिक बिल 50 हजार रुपये ही आने की बात पर सुधांशु ने तत्काल 50 हजार रुपये देकर इनको तो चलता किया तथा इसकी शिकायत एंटी करप्शन से शिकायत कर दी।
जिसके बाद जाल बिछाकर हाउस टैक्स में खेल करने वाले बाबुओं को धर दबोचा गया। इसी तरह नगर निगम के गंगा नगर ब्रांच कार्यालय में गत वर्ष 2022 के आखिर में नवल सिंह राघव को भी एंटी करप्शन की टीम ने रंगे हाथों पकड़ा था। नवल सिंह राघव भी हाउस टैक्स कम करने के नाम पर डिफेंस कॉलोनी के एक व्यापारी से मोटी रकम वसूल रहे थे। इसके अलावा लिसाड़ी गेट के किदवई नगर निवासी मोहम्मद जफर भगत सिंह मार्केट में कपड़ों की फड़ लगाते हैं। नगर निगम की राजस्व विभाग की टीम ने उनके ऊपर 10 हजार रुपये प्रतिवर्ष हाउस टैक्स निर्धारित कर दिया था।
इसी टैक्स को कम कराने के लिए जफर ने राजस्व निरीक्षक जितेंद्र कुमार से बात की तो उन्होंने 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी, लेकिन पांच हजार रुपये में बात तय हो गई। राजस्व निरीक्षक ने जफर से रिश्वत की रकम देने को कहा। जफर ने इसकी एंटी करप्शन टीम से शिकायत कर दी। टीम ने बाबुओं को रंगे हाथों पकड़ लिया। यह तो वह मामले हैं, जिनमें रंगे हाथों कर्मचारी पकड़े गये हैं, लेकिन इनका बाल भी बांका नहीं होता है।

