Wednesday, February 11, 2026
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UP News: माघ मेले से बिना स्नान लौटे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, बोले– अन्याय स्वीकार नहीं, न्याय की प्रतीक्षा करेंगे

जनवाणी ब्यूरो |

यूपी: प्रयागराज में चल रहे माघ मेले से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भारी मन से विदा लेने का ऐलान किया है। बुधवार सुबह आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि वह पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ माघ मेला में आए थे, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बन गईं कि संगम में स्नान किए बिना ही लौटना पड़ रहा है। उन्होंने इसे अपने जीवन का अत्यंत पीड़ादायक क्षण बताया।

शंकराचार्य ने कहा कि प्रयागराज हमेशा से शांति, विश्वास और सनातन परंपराओं की भूमि रही है, लेकिन यहां जो कुछ उनके साथ घटित हुआ, उसने उनकी आत्मा को झकझोर कर रख दिया। उन्होंने बताया कि माघ मेले में स्नान करना उनके लिए केवल धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि आस्था का विषय था, इसके बावजूद मौजूदा हालात में मेला छोड़ने का कठिन निर्णय लेना पड़ा।

उन्होंने बताया कि एक ऐसी घटना घटी जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी। बीते दस दिनों तक वह फुटपाथ पर बैठे रहे और न्याय की प्रतीक्षा करते रहे, लेकिन जब लौटने का निर्णय लिया गया, तभी प्रशासन की ओर से ससम्मान स्नान कराने का प्रस्ताव आया। शंकराचार्य के अनुसार, इस प्रस्ताव में उस दिन की घटना के लिए क्षमा याचना नहीं थी, इसलिए उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया।

शंकराचार्य ने क्या कहा?

शंकराचार्य ने कहा “अगर हम स्नान कर लेते और पुष्पवर्षा स्वीकार कर लेते तो उस दिन हुई घटना अधूरी रह जाती। यह हमारे भक्तों का अपमान होता। हम भारी मन से जा रहे हैं, लेकिन अपने पीछे सत्य की गूंज छोड़कर जा रहे हैं।”

उन्होंने मौन धारण कर प्रार्थना की कि अपमान करने वालों को दंड मिले। साथ ही आरोप लगाया कि उनके सम्मान को ठेस पहुंचाने के पीछे प्रशासनिक तंत्र और शासन की भूमिका है। उन्होंने कहा कि जो कुछ आज हो रहा है, वह मुगल काल की घटनाओं की याद दिलाता है और सरकार के दोहरे चरित्र को उजागर करता है।

शंकराचार्य ने यह भी कहा कि उनकी “भौतिक और पीठ की हत्या” का प्रयास किया गया और इस अपमान को वह कभी स्वीकार नहीं करेंगे। उनके इस फैसले के बाद संत समाज और श्रद्धालुओं के बीच चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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