Thursday, March 5, 2026
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स्टाफ की कमी दे रही ऊर्जा निगम को झटके

  • पीवीवीएनएल के फोन घुमाओं अभियान में सबसे स्टाफ की कमी का शट डाउन
  • एमडी पावर का इस बार पीवीवीएनएल को 25 फीसदी ज्यादा रेवेन्यू कलेक्शन फरमा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: स्टाफ की कमी के शटडाउन से बिजली महकमे के अफसरों का फ्यूज उड़ाया हुआ है। इसकी वजह उत्तर प्रदेश पावर कारपोशन चेयरमैन का रेवेन्यू को लेकर वो फरमान है, जिसमें पिछले कलेक्शन के अनुपात में कम से कम 25 फीसदी ज्यादा कलेक्शन की हिदायत दी गयी है। 25 फीसदी ज्यादा कलेक्शन की इस हिदायत ने पीवीवीएनएल समेत सभी 14 डिस्कॉम अफसरों खासकर उन अफसरों का फ्यूज उड़ाकर रख दिया है।

जिनके कंधों पर उनके डिस्कॉम की रेवेन्यू कलेक्शन की जिम्मेदारी है। इतना ही नहीं यूपी पावर कारपोरेशन एमडी कार्यालय ने पच्चीस फीसदी ज्यादा रेवेन्यू जेनरेट करने के आदेश जारी करने के साथ ही प्रदेश भर के डिस्कॉम अफसरों को फोन घुमाओ अभियान चलाए जाने के निर्देश दिए हैं।

कैसे घुमाएं फोन, मीटर लैब में सब सून?

राज्य विद्युत परिषद प्राविधिक कर्मचारी संघ उत्तर प्रदेश के पश्चिमांचल महासचिव अभिमन्यु कुमार ने बताया कि फोन घुमाओ अभियान जारी कर दिया गया है, लेकिन मीटर लैब की हालात से लगता है कि अफसर अंजान है। मीटर लैब की हालत इस वक्त बद से बदतर बनी हुई है।

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नियमानुसार मीटर लैब में एक एसडीओ, दो अवर अभियंता, एरिया यदि छोटा है तो कम से कम छह संविदा कर्मचारी, एक लिपिक, दो कम्प्यूटर आपरेटर और एक सहायक इंजीनियर होना अनिवार्य है और एरिया यदि ज्यादा क्षेत्रफल वाला है तो अवर अभियंता, संविदा कर्मी, लिपिक व कम्प्यूटर स्टाफ की संख्या बढ़ भी सकती है। मीटर लैब का यदि भौतिक सत्यापना कर लिया जाए तो हकीकत बेपर्दा हो जाएगी।

आसान नहीं है फोन घुमाना

एमडी यूपी पावर कारपोरेशन ने अभियान जारी कर दिया और तरीका भी बता दिया कि फीसदी ज्यादा रेवेन्यू कैसे जनरेट करना है, लेकिन राज्य विद्युत परिषद प्राविधिक कर्मचारी संघ उत्तर प्रदेश के नेताओं का कहना है कि डिस्कॉम अफसरों का एमडी यूपी पावर कारपोरेशन को तमाम डिस्कॉम में स्टाफ की कमी की बात बतानी होगी। जहां तक स्टाफ की बात है तो ऐसा नहीं है कि केवल कोई एक डिस्कॉम स्टाफ की कमी के संकट से जूझ रहा हो। सभी का एक सा हाल है।

नियमित काम भी हैं अटके

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि स्टाफ की कमी की हालात यह है कि जो नियमित काम होने चाहिए वो भी अटक जाते हैं। नियमित कामों का मतलब बिजली की निर्वाद्ध आपूर्ति, लाइन लॉस न होने देना, लाइन में आने वाले फाल्ट प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाना। इन कामों को ही समय से पूरा नहीं किया जा रहा है, ऐसे में फोन घुमाओ अभियान की बात करने की फुर्सत ही कहां रह जाती है।

ये करना है फोन घुमाओ अभियान में

लखनऊ से जारी फोन घुमाओ अभियान की यदि बात की जाए तो इस अभियान के दौरान डिस्कॉम के तमाम अफसरों को संगठित होकर इस अभियान में अपनी-अपनी सीट के अनुसार सहयोग करना है ताकि जो टारगेट दिया गया है वो हासिल कर लिया जाए। कराना क्या अब यह भी समझ लीजिए। बिजली महकमे के जो भी बकायेदार हैं उनमें छोटे बडे़-सभी बकायेदार शामिल हैं, को बार-बार काल कर बिजली महकमे का जो भी बकाया है

उसका भुगतान करने को प्रेरित करना है। हालांकि सूत्रों ने जानकारी दी है कि इस अभियान में मेरठ के संदर्भ में यदि बात की जाए तो जो 10 हजार या 10 हजार से ऊपर के बकायेदार हैं, उन पर टारगेट किया जा रहा है। इसमें अभी कितनी कामयाबी मिली है कह कहना जल्दबाजी होगा, इस काम में जुटे अफसरों का कहना है कि पीवीवीएनएल मुख्यालय से जब यूपी पावर कारपोरेशन लखनऊ रिपोट भेजी जाएगी यह तो तभी साफ हो सकेगा।

गलत पता और रॉन्ग नंबर बने मुसीबत

फोन घुमाओ अभियान की यदि बात की जाए तो इसमें सबसे बड़ी मुसीबत वो बकायेदार बने हैं, किसी भी कारण से जो अपने दर्ज कराए गए पते पर नहीं मिल रहे हैं। जो मोबाइल नंबर उन्होंने कनेक्शन लेने के वक्त बताए थे वो नंबर या तो मिल नहीं रहे हैं या फिर उस पर यह नंबर अब मौजूद नहीं है का रिप्लाई मोबाइल कंपनी से आ रहा है। इसकी वजह कुछ भी हो सकती है, लेकिन हो यही रहा है। इन तमाम बातों को लेकर इस संवाददाता ने पीवीवीएनएल के आला अफसरों से संपर्क किया।

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