- शहरभर के मंदिर रंग-बिरंगी लाइटों से सजकर तैयार, साफ-सफाई और सुरक्षा के खास इंतजाम
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शहरभर में भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव को लेकर मंदिर रंग-बिरंगी लाइटों की रोशनी से सजकर तैयार है। मंदिरों में साफ-सफाई की व्यवस्थाओं व सुरक्षा को लेकर मंदिरों में इंतजाम किये जा चुके हैं। शहर के छोटे बड़े मंदिरों में आज रात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण जन्म लेंगे। इसके लिए विभिन्न मंदिर समितियां बाल गोपाल के जन्म की भव्य तैयारियों में जुटी है। इस दौरान शहर के छोटे-बड़े मंदिरों में कृष्ण जन्मोत्सव के आयोजन किये जाएंगे साथ ही फूलों, रंग-बिरंगी लाइट एवं झांकियां द्वारा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का वर्णन किया जाएगा।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पर्व को देखते हुए शहर के ऐतिहासिक औघड़नाथ मंदिर में भी तैयारियां पूरी है। जन्माष्टमी से एक दिन पूर्व से ही मंदिर पीली झालरों व लाल गुलाबी एलईडी लाइटों से सज कर तैयार हो गया है। मंदिर को पीली झालर की चादर से सजाया गया है। इसके साथ ही मंदिर की और आने वाले चारों मुख्य मार्गों को भी लाइटों द्वारा सजाया गया है। मंदिर के चारों तरफ एलईडी लाइट के द्वार लगाए गए हैं। जिसमें भगवान श्रीकृष्ण से जन्म से लेकर उनकी युवावस्था की लीलाओ का वर्णन दिखाया जाएगा।
पंचांग के अनुसार आज रात्रि 11:22 बजे लड्डू गोपाल का अभिषेक, आरती 108 तुलसीदल व कमलदल से किया जाएगा। जिसके बाद जन्म उपरांत उनको चांदी के झूले में झुलाया जाएगा। साथ ही श्रीकृष्ण राधा रानी भवन में वृंदावन के कारीगरों द्वारा 25 कुंतल फूल से फूल बंगले को बंगला सजाया गया है। जिसमें चमेली, गुलाब, आॅर्किड, मोगरा, रजनीगंधा गुलदवारी सहित कई फूल देश-विदेश से मंगाए गए हैं।

द्वापर जैसे महायोग में आज मनेगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद के चैप्टर चेयरमैन ज्योतिषाचार्य आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भादप्रद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस बार भादप्रद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 26 अगस्त को सुबह 3 बजकर 40 मिनट पर शुरू हो जाएगा और इसका समापन 27 अगस्त को सुबह 2 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। भगवान श्रीकृष्ण इस साल 5250 साल के हो जाएंगे और 5251वें वर्ष मे प्रवेश करेंगे। इस बार जन्माष्टमी पर वैसा ही संयोग बन रहा है।
जैसा तब बना था। जब नंदलाल ने द्वापर युग में इस धरती पर जन्म लिया था। ज्योतिष गणित में जो आंकलन किया गया है उसके मुताबिक भगवान कृष्ण द्वापर के अंत में धरती पर 125 वर्ष तक रहे, कलयुग की आयु 5125 वर्ष बताई गई है। हिंदू धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी के पर्व को बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हर वर्ष भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।
- अष्टमी तिथि का प्रारंभ-26 अगस्त, सुबह 3 बजकर 40 मिनट से
- अष्टमी तिथि का समापन-27 अगस्त, सुबह 2 बजकर 20 मिनट तक
- जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र
- रोहिणी नक्षत्र का प्रारंभ-26 अगस्त, शाम 3 बजकर 55 मिनट से
- रोहिणी नक्षत्र का समापन-27 अगस्त, शाम 3 बजकर 38 मिनट पर
श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व
जब जब पाप और अधर्म हद पार करता है, तब तब भगवान पृथ्वी पर अवतार लेते हैं और अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, द्वापर युग में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में ही भगवान विष्णु ने अपना आठवां अवतार श्रीकृष्ण के रूप में लिया था। इस बार यह शुभ तिथि 26 अगस्त दिन सोमवार को है। भगवान कृष्ण मथुरा नगरी में राजकुमारी देवकी और उनके पति वासुदेव के आठवें पुत्र के रूप में अवतरित हुए थे। मान्यता है कि जो व्यक्ति कृष्ण जन्माष्टमी का उपवास करते हैं और विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करते हैं, उनके सभी कष्ट व परेशानी दूर हो जाती है।

