Monday, April 6, 2026
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उत्खनन में प्राचीन दीवार मिलने के मिले संकेत

  • हस्तिनापुर के उल्टाखेड़ा से रोज निकल रहे रहस्य

जनवाणी संवाददाता |

हस्तिनापुर: महाभारत की धरा हस्तिनापुर ने खुदाई प्रारंभ होते ही फिर नए रहस्य उगलने शुरू कर दिए हैं। खुदाई में निकले सभी प्राचीन अवशेष इस धरती के नीचे मौर्य काल, राजपुताना काल आदि सहित दर्जनों काल के दफन होने का सबूत दे रहे हैं। पहले से पांचवें चरण की खुदाई के बाद कंकाल, मिट्टी के बर्तन, मृदभांड आदि सहित हस्तिनापुर की तबाही के निशान भी धरती के गर्भ से बाहर निकल रहे हैं।

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हस्तिनापुर के पांडव टीले में खोदाई लगातार चल रही है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्थान की टीम को एक प्राचीन दीवार यहां मिलने के संकेत मिल रहे हैं। हस्तिनापुर को इतिहास जाने के लिए कई दिनों से एएसआई की टीम द्वारा टीले पर चल रहे उत्खनन में धरती के गर्भ से रोज नये रहस्य निकल रहे हैं। उत्खनन के समय बार-बार आ रही रेत, जहां गंगा में बाढ़ बता रही है। वहीं, कई राजपुतान काल के भी राज धरती के गर्भ से बाहर आने लगे हैं।

1952 में हस्तिानपुर हुए उत्खनन में भी हजारों वर्ष पुराने कई रहस्यों पर से पर्दा उठा था। पांडवों की यह धरती अभी कितने राज उगलेगी। अधीक्षण पुरातत्वविद् डा. दिबिषद ब्रजसुंदर गड़नायक के निर्देश पर एएसआई की टीम फिर हस्तिनापुर के जंगल में पांडव टीले में उन्हीं भवनों को ढूंढ रही है, जिसका इतिहास में वर्णन है। टीम की कोशिश है कि महाभारतकालीन अवशेष जो कई सालों से मिट्टी में ही दफन हैं, उनको सामने लाया जा सके।

कुछ राज मुगलकालीन तो कई मौर्य काल से संबंधित नजर आ रहे हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी उत्खनन में निकल रहे राज एकजुट कर रहे हैं, उत्खनन में मिल रहे अवशेषों के बारे में कुछ भी बताने से इनकार कर रहे हैं। पांडव टीला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अंतर्गत सुरक्षित है। समय-समय पर टीले से पौराणिक अवशेष मिलते रहे हैं। इन अवशेषों को एएसआई कार्यालय पर तैनात कर्मचारी संरक्षित कर लेते थे।

टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा

एएसआई के अधिकारियों का कहना है कि अब आने वाले दिनों में यहां आने वाले टूरिस्ट को सारी सुविधाएं मुहैया होंगी। अब पर्यटकों को यहां टॉयलेट पार्किंग स्पेस से लेकर ड्रिंकिंग वॉटर और कैफेटेरिया तक उपलब्ध होगा। गौरतलब है कि एएसआई के नए सर्किल आॅफिस से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 16 जिलों के इतिहास को संजोया जा रहा है। इन 16 जिलों की 82 साइट्स पर एएसआई की टीम फोकस कर रही है, लेकिन सबसे प्रमुख एजेंडे पर है महाभारतकालीन धरती हस्तिनापुर। उम्मीद है कि हस्तिनापुर की धरती महाभारतकालीन और राज अब उगल सकेगी।

उत्खनन में मिले पुरावशेष

महाभारत कालीन तीर्थ नगरी स्थित उल्टाखेड़ा टीला में उत्खनन टीम द्वारा अवशेष क्षतिग्रस्त नहीं हो इसको लेकर अनुभवी कार्मिकों द्वारा छोटे-छोटे औजारों से वैज्ञानिक पद्धति से खुदाई की जा रही है। टीम को उत्खनन के दौरान अच्छी आकृति वाला बीड का टुकड़ा, कौड़ियां, सीप से बनी हुई चूड़ियों के टुकड़े, हल्के पत्थर व ठोस मिट्टी से बने छोटे-छोटे टुकड़े मिले हैं। पुराविदों का कहना है कि इस प्राचीन सभ्यता में यह क्षेत्र कुटीर उद्योग का क्षेत्र भी माना जा सकता है। खुदाई में रहे साक्ष्य के आधार पर यह कहा जा सकता है। हस्तिनापुर नगरी हमेशा गंगा से प्रभावित रही है। पूर्व में यहां गंगा से ऊंची-ऊंची लहरें उठती थी, जो हस्तिनापुर के विनाश का मुख्य कारण रही है।

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