
बीते कुछ वर्षों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रसार के साथ, एक प्रतिस्पर्धी आॅनलाइन बाजार उभर कर आया है, यही कारण है कि कंपनियाँ ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए डिजिटल विज्ञापन और सोशल मीडिया मार्केटिंग पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही हैं। वर्ष 2024 में, भारतीय डिजिटल विज्ञापन पर 5.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक खर्च किए जाने का अनुमान है इससे यह समझ में आता है कि सोशल मीडिया मार्केटिंग बहुतेरे तरीके से ग्राहकों को प्रभावित कर रही है। दरअसल बात सिर्फ इतनी है कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और पिनटेरेस्ट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आॅनलाइन उत्पादों और सेवाओं की तलाश करने वालों के लिए जरूरी उपकरण बन गए हैं।
अब ग्राहक आसानी से किसी प्रोडक्ट का कस्टमर रिव्यू और उत्पाद जानकारी पा सकते हैं, तथा रियल टाइम में प्रोडक्ट या ब्रांड की जानकारी के लिए कंपनी के ग्राहक सेवा अधिकारी से बातचीत कर सकते हैं। इस बदलाव ने खरीदारों को अपनी प्राथमिकताओं, पसंद और विश्वासों के आधार पर खरीदारी के निर्णय लेने की अधिक शक्ति दी है।
उदाहरण के लिए, कोई व्यवसाय किसी उत्पाद को लॉन्च करने के लिए इंस्टाग्राम का उपयोग कर सकता है, अपने उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए बड़ी संख्या में फॉलोअर्स वाले प्रभावशाली लोगों (इन्फलुएंसर) को टैग कर सकता है, और अंतत: संभावित ग्राहकों को खरीदारी करने के लिए राजी कर सकता है।
इसी के साथ डिजिटल संस्कृति का एक और महत्वपूर्ण पहलू जो ग्राहकों के आॅनलाइन खरीदारी व्यवहार को प्रभावित करता है, वह है डिजिटल कूपन, प्रोमोकोड और फ्लैश सेल जैसे विभिन्न लागत-बचत अवसरों की उपलब्धता। अतीत में, बचत के लिए उपभोक्ताओं की खोज अक्सर अखबारों या फ्लायर्स जैसे पारंपरिक प्रिंट मीडिया तक ही सीमित थी, जो समय लेने वाली और असुविधाजनक थी। आॅनलाइन शॉपिंग और डिजिटलमार्केटिंग के उदय ने उपभोक्ता व्यवहार के इस पहलू को बदल दिया है।
आॅनलाइन शॉपिंग उपभोक्ताओं को अपने घर से ही उत्पादों को देखने और खरीदने की सुविधा देती है, बिना किसी भौतिक स्टोर पर जाने के, यह सुविधा विशेष रूप से व्यस्त उपभोक्ताओं को आकर्षित करती है जिनके पास भौतिक स्टोर पर जाने का समय नहीं होता है। इसके अलावा मोबाइल कॉमर्स की बदौलत उपभोक्ता अपने मोबाइल द्वारा आसानी से खरीदारी कर सकते हैं। फिंगरप्रिंटस्कैनिंग जैसी उन्नत सुरक्षा सुविधाओं तथा फोनपे, गूगल पे और पेटीएम जैसे ऐप विभिन्न मोबाइल भुगतान विकल्पों के कारण मोबाइल प्लेटफॉर्म ज्यादा सुरक्षित और व्यापक रूप से अपनाया जाने लगा है, जिससे बाजार की दशा व दिशा दोनों बदल गई है।
आनलाइन खरीदारी करते समय उपभोक्ता के व्यवहार को प्रभावित करने वाले कारकों में उत्पाद मूल्य एक महत्वपूर्ण कारक है। अपितु यह मूल्य कारक गुणवत्ता जैसे मूर्त तत्वों के साथ-साथ ब्रांड प्रतिष्ठा और विश्वास जैसे अमूर्त पहलुओं का मिश्रण है। दरअसल आॅनलाइन शॉपिंग व्यवहार कई कारकों जैसे जोखिम, सामाजिक प्रभाव और जनसांख्यिकी आदि से प्रभावित होता है।
चूंकि भारी छूट के कारण उपभोक्ता अप्रत्याशित खरीदारी करने की अधिक संभावना रखते हैं, जबकि जोखिम से विश्वास में कमी आ सकती है। सामाजिक प्रभाव और आॅनलाइन मार्केटिंग उपभोक्ता की धारणाओं और खरीद निर्णयों को प्रभावित करते हैं। आयु, लिंग, आय, शिक्षा और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि जैसी जनसांख्यिकी भी एक भूमिका निभाती हैं। महिलाएं उत्पादों की विस्तृत विविधता की सुविधा के कारण आॅनलाइन खरीदारी करती हैं।
सोशल मीडिया मार्केटिंग का भारत सहित वैश्विक स्तर पर व्यवसायों पर गहरा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि यह उपभोक्ता की धारणा को आकार देता है और खरीद निर्णयों को प्रभावित करता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ग्राहक सेवा इंटरैक्शन को स्वचालित करके और 24 घंटे सहायता प्रदान करके डिजिटल मार्केटिंग में क्रांति ला रहा है। इसने ग्राहक संतुष्टि रेटिंग में वृद्धि की है और व्यवसायों को अपने ग्राहकों की प्राथमिकताओं को बेहतर ढंग से समझने और अपनी मार्केटिंग रणनीतियों को अनुकूलित करने की अनुमति दी है।
लेकिन ऐसा नहीं है कि सोशल मीडिया से बाजार को केवल फायदे ही हुए हैं इसके खराब परिणाम भी देखने को मिले हैं, जैसे समाज में दिखावा करने का प्रचलन बढ़ा है जिससे लोगों के बीच अप्रत्याशित उपभोक्तावादी संस्कृति जागृत हुई है। उदाहरण के लिए हालिया मीडिया रपट के मुताबिक देश में बिकने वाले हर 10 में से 7 आईफोन किस्तों पर खरीदे जाते हैं।
इसके अलावा सोशल मीडिया के उपयोग को उत्पीड़न, मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और दूसरों की विकृत धारणाओं से जोड़ा गया है, खासकर युवा जनसांख्यिकी में। साथ ही सोशल मीडिया अपने उपयोगकतार्ओं के बीच भावनात्मक तनाव, निराशा, निर्भरता और सामाजिक अलगाव पैदा करता है।


