Wednesday, February 11, 2026
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सोनिया गांधी ने दिया इस्तीफा!, जानिए- क्या हुआ फैसला ?

  • वर्किंग कमेटी में सोनिया ने कहा-यदि आपको लगता है कि गांधी परिवार की वजह से पार्टी कमजोर हो रही तो हम किसी भी त्याग को तैयार
  • इस्तीफे की पेशकश अस्वीकार, अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी सोनिया गाँधी 

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: पांच राज्यों में मिली करारी हार पर मंथन के लिए रविवार को कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक हुई। इस दौरान पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस्तीफे की पेशकश करते हुए कहा कि अगर पार्टी नेताओं को लगता है कि हार के लिए हम जिम्मेदार हैं तो हम तीनों (सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा) इस्तीफे के लिए तैयार हैं।

हालांकि, पार्टी नेताओं ने उन पर पूर्ण विश्वास जताया और उनसे संगठनात्मक चुनाव पूरे होने तक पार्टी की कमान संभालने का आग्रह किया। साथ ही पार्टी नेताओं ने उनसे अपील कि वह पार्टी को मजबूत और पुनर्जीवित करने के लिए तत्काल जरूरी कदम उठाएं। सीडब्ल्यूसी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को भी भंग नहीं किया जाएगा।

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव सहित आगामी चुनावों में चुनावी चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। सीडब्ल्यूसी ने सर्वसम्मति से सोनिया गांधी के नेतृत्व में अपने विश्वास की पुष्टि की और उनसे कांग्रेस का नेतृत्व करने का अनुरोध किया। बैठक के बाद कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी कांग्रेस का नेतृत्व करेंगी और भविष्य में भी वही निर्णय लेंगी। हम सभी को उनके नेतृत्व पर भरोसा है।

बताया जा रहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और तीन अन्य कांग्रेसी नेता पार्टी की कार्यसमिति की बैठक में शामिल नहीं हुए हैं। कांग्रेस नेता एके एंटनी भी बैठक में शामिल नहीं हुए, क्योंकि उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी।

राहुल गांधी को अध्यक्ष बनना चाहिए, पार्टी एकजुट रहेगी: गहलोत

इससे पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी दिल्ली पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि हमारा रास्ता तो एकता, अखंडता का है और एक रास्ता भाजपा का है- धर्म और ध्रुवीकरण का। पीएम और केजरीवाल एक जैसा बोलते हैं। ये आग लगाना काफी आसान काम होता है लेकिन उसे बुझाना काफी मुश्किल है। राहुल गांधी को अध्यक्ष बनना चाहिए पार्टी एकजुट रहेगी।

उन्होंने कहा कि चुनाव में हार-जीत होती है, एक समय भाजपा ने 542 में से केवल 2 सीटें जीती थी। लोग गुमराह हो रहे हैं क्योंकि भाजपा धर्म की राजनीति करती हैं, आज नहीं तो कल ये बात देशवासियों को जरूर समझ आएगा। इंदिरा गांधी ने अपनी जान दे दी, लेकिन खालिस्तान नहीं बनने दिया।

गांधी परिवार का अस्तित्व चुनावी हार-जीत पर निर्भर नहीं: श्रीनिवास बीवी

कांग्रेस की युवा इकाई के अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने सीडब्ल्यूसी की बैठक से पहले गांधी परिवार के नेतृत्व में विश्वास जताते हुए रविवार को कहा कि यह परिवार सिर्फ पार्टी नहीं है, बल्कि देश के सभी वर्गों को जोड़कर रखने वाली एक माला है। पार्टी का अस्तित्व किस चुनावी हार-जीत पर निर्भर नहीं करता। श्रीनिवास ने ट्वीट किया, ‘देश की अखंडता के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने वाली इस विरासत को मिटाने की साजिशें कई बार हुईं, लेकिन कभी कोई कामयाब नही हुआ।’

कांग्रेस मुख्यालय के निकट एकत्र हुए कांग्रेस कार्यकर्ता

कांग्रेस कार्य समिति की बैठक के दौरान पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता पार्टी के मुख्यालय के पास इकट्ठा हुए। उन्होंने राहुल गांधी के समर्थन में नारेबाजी की और उन्हें पार्टी की कमान एक बार फिर से सौंपे जाने की मांग की। इस दौरान दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नेता अलका लांबा, अनिल भारद्वाज और कई अन्य नेता-कार्यकर्ता राहुल गांधी के समर्थन में धरने पर बैठ गए।

कांग्रेस में फिर से जान फूंकने की जरूरत: थरूर

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा कि देश में कांग्रेस आज भी सबसे विश्वसनीय विपक्षी दल है। इसलिए इसमें सुधार तथा नई जान फूंकना जरूरी है। थरूर ने देश में विभिन्न दलों के विधायकों की संख्या वाला एक चार्ट साझा करते हुए ट्वीट किया कि यही वजह है कि कांग्रेस सबसे विश्वसनीय राष्ट्रीय विपक्षी पार्टी बनी हुई है। इसीलिए सुधार और नयी जान फूंकनी जरूरी है।

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