- गठबंधन में दरार का रालोद पर अधिक पड़ेगा असर
- फीलगुड के बावजूद वेट एंड वॉच की मुद्रा में हैं सपाई
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: रालोद सुप्रीमो जयंत चौधरी के पाला बदलने की संभावनाओं से जिले के समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी फील गुड में हैं। हालांकि अभी खुलकर तो कोई भी सपाई सामने नहीं आ रहा है, लेकिन इनके चेहरों की चमक साफ इशारा कर रही है कि रालोद सुप्रीमो के सपाई गठबंधन से छिटकने से इनकी मुंहमांगी मुराद पूरी हो रही है। हालांकि फीलगुड के बावजूद सपाई अभी वेट एंड वॉच की मुद्रा अपनाये हुए हैं।
लोकसभा और विधान सभा में अपना सूपड़ा साफ होने तथा छोटे चौधरी के देहांत के बाद जयंत चौधरी ने काफी विचार-विमर्श के बाद समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर विधान सभा चुनाव लड़ा और अपनी दमदार स्थिति दर्ज कराई। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव और रालोद सुप्रीमो जयंत चौधरी की युवा जुगलबंदी ने भाजपा समेत बाकी सियासी खेमों में खासी हलचल मचा दी। जाट बाहुल्य पश्चिमी यूपी की सियासत में चौधरी चरण सिंह का खासा दबदबा रहा है।

सभी को साथ लेकर चलने की चौधरी साहब की इस विरासत को उनके बेटे और छोटे चौधरी स्व. चौधरी अजित सिंह ने भी काफी हद तक संभाले रखा तथा रालोद के परंपरागत वोटर जाट और मुस्लिमों को तमाम ऊंच-नीच के बावजूद सहेजकर रखा। हालांकि मुजफ्फरनगर विवाद से रालोद के प्रति मुस्लिमों का रुझान कम हुआ, लेकिन छोटे चौधरी ने मुस्लिमों के बीच अपना वर्चस्व दोबारा से बनाने में कामयाबी हासिल कर ली।
मुस्लिम वोटों पर सपा अपना एकाधिकार समझती है। यही वजह रही कि जब मुसलमानों का रुझान दोबारा से रालोद के प्रति जमता रहा तो इसी बीच चौधरी अजित सिंह का आकस्मिक निधन हो गया। अपने पिता की विरासत को जयंत चौधरी ने बखूबी संभाला तथा पिता के देहांत के बाद सपा के साथ गठबंधन करके अपनी स्थिति और मजबूत की। इसी गठबंधन की बदौलत 2023 के विधान सभा चुनाव में रालोद ने अपनी दमदार स्थिति दर्ज कराई,
लेकिन इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले रालोद सुप्रीमो जयंत चौधरी के भगवा खेमे में जाने की अटकलों के बीच रालोद के मुस्लिम नेता अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। हालांकि अभी सिर्फ कयास ही लगाये जा रहे हैं, लेकिन छोटे चौधरी के प्रति आस्था रखने वाले मुस्लिम मतदाता और रालोद के मुस्लिम नेता असमंजस में हैं। उधर, रालोद सुप्रीमो के पाला बदलने की खबरें सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी के जिले और शहर के सपाई बेहद खुशी की मुद्रा में हैं।
हालांकि अध्यक्षों से लेकर पार्षद तक सभी खुलकर बात तो कर रहे हैं और जयंत चौधरी के सपा गठबंधन से हटने को सपा के लिए बेहद मुफीद बताते हैं, लेकिन खुद फ्रंट पर आकर नेता बनने से वह गुरेज करते हैं। मेरठ के सपा नेताओं का कहना है कि गठबंधन से हटकर रालोद सुप्रीमो जयंत चौधरी अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मार रहे हैं। सपा नेताओं का कहना है कि सपा-रालोद गठबंधन से सबसे ज्यादा परेशानी भाजपा नेताओं को ही थी। अब गठबंधन तोड़कर यह रालोद को इसलिए ही अलग कर रहे हैं, ताकि रालोद का वजूद ही खत्म हो जाये।

