नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉट कॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनन्दन है। पूरे विश्व में यानि आज 13 फरवरी को वर्ल्ड रेडियो डे मनाया जा रहा है। एक समय हुआ करता था जब रेडियो की दीवानगी लोगों के सिर चढ़कर बोलती थी।

खासकर गावों में जहां बिजली की अक्सर समस्या होती थी, तो वहीं लोगों को रेडियो पर अपने पसंदीदा कार्यक्रम के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था। भले ही रेडियो सदियों पुराना माध्यम हो लेकिन संचार के लिए इसका इस्तेमाल आज भी हो रहा है। तो चलिए जानते है रेडियो का इतिहास…
विश्व रेडियो दिवस की शुरुआत
विश्व रेडियो दिवस की शुरुआत साल 2011 में की गई थी। साल 2010 में स्पेन में रेडियो अकादमी ने विश्व रेडियो दिवस मनाने का प्रस्ताव पेश किया था। वहीं साल 2011 में यूनेस्को के सदस्यों ने इस पर मुहर लगाई और इसे स्वीकार किया। तथा 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस मनाने की घोषणा की गई।

इसके बाद से विश्वभर में 13 फरवरी विश्व रेडियो दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य युवाओं को इसके महत्व व इतिहास से जागरूक करना है। तथा आने वाली नई पीढ़ियों को इससे अवगत कराना है। बता दें आज भी दुनियाभर में कुल 51000 से अधिक रेडियो स्टेशन हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो विकासशील देशों में आज भी करीब 75 प्रतिशत घरों में रेडियो है।
आजादी में निभायी भूमिका
रेडियो ने स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। कई स्वतंत्र सेनानियों ने रेडियो के द्वारा ही लोकप्रिय नारे का प्रसारण किया था।
महात्मा गांधी जी ने इसी रेडियो स्टेशन से “अंग्रेजो भारत छोड़ों” का प्रसारण किया था।
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान “तुम मुझे खून दो, ‘मै तुम्हें आजादी दूंगा” का लोकप्रिय नारा रेडियो के द्धारा जर्मनी में प्रसारित किया गया था।

रेडियो थीम 2023
इस बार पूरा विश्व नौवां रेडियो दिवस मना रहा है। बता दें इस बार की थीम रेडियो और शांति है।

