- यूपी बोर्ड टॉपर्स को मोबाइल से नहीं प्रेम, अच्छे नंबर लाने के लिए पढ़ाई में एकाग्रता जरूरी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जो लोग कहते है कि मोबाइल से उनको पढ़ाई में मदद मिलती है यह यूपी बोर्ड के 10वीं और 12वीं के छात्रों पर लागू नहीं होता। अगर विश्वास न हो तो यूपी बोर्ड टॉपर्स से बात कर लीजिए। यूपी बोर्ड टॉप टेन की लिस्ट में आने वाले छात्रों का कहना है कि मोबाइल सिर्फ समय बर्बाद करने के अलावा कुछ नहीं करता है। कोर्स में लगी किताबों में हर समस्या का समाधान मिल जाता है।
छात्रों को मोबाइल, लैपटॉप, वीडियो गेम, हैंडफोन से ज्यादा अपनी किताबों और स्कूल शिक्षकों पर ज्यादा भरोसा है। यही कारण है कि मेरठ के 12वीं जिला टॉपर सौरभ और तीसरे स्थान पर रहने वाली सानिया पढ़ाई के लिए इलेक्ट्रोनिक उपकरणों का प्रयोग करना सही नहीं मानते। एक सर्वक्षण में कहा गया है कि जो बच्चे हमेशा मोबाइल और अन्य गैजेट्Þस में लगे रहते है उनका बौद्धिक स्तर अन्य लोगों के मुकाबले कम होता है।
दरअसल, आजकल बच्चो को मोबाइल ने ज्यादा जकड़ रखा है। इस कारण जहां बच्चों की पढ़ाई पर असर पढ़ता है वहीं उनकी एकाग्रता भी भंग हो जाती है। मनोवैज्ञानिक डॉ. सोना कौशल भारती का कहना है कि अच्छे नंबर लाने के लिए पढ़ाई में एकाग्रता जरूरी है। इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के कारण बच्चों का पढ़ाई से ध्यान भंग हो जाता है। माता-पिता को चाहिए कि जरुरत के हिसाब से बच्चों को मोबाइल दिया जाए न कि पढ़ाई की कीमत पर।
मोबाइल की लत से पिछड़ रहे शहरी बच्चे
शहर के बच्चों को मोबाइल की लत से परीक्षा के परिणाम भी अनुकूल नहीं आ रहे हैं। क्योंकि शहर के बच्चे कभी टॉपर हुआ करते थे और अच्छे अंक लेकर उत्तीर्ण होते थे, लेकिन वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे अच्छे अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। यूपी बोर्ड के परीक्षा परिणाम तो यही बता रहे है कि मेरठ जनपद में ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं ने प्रतिभा के झंडे गाड दिये, लेकिन शहरी छात्र-छात्राएं पिछड़ गए। इसी वजह मोबाइल पर ज्यादा समय बीताना माना जा रहा हैं।
मोबाइल बच्चों की प्रतिभा को कुंठित कर रहा हैं। दरअसल, ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे मोबाइल का प्रयोग नहीं करते। एक वजह यह भी है उनके अच्छे अंक लाने की कहीं जा रही हैं। क्योंकि शहरी छात्र-छात्राएं मोबाइल पर ज्यादा समय दे रहे हैं, जो उनका भविष्य बिगाड़ रहा हैं तथा उनका शिक्षा से भटकाव हो रहा है। यही वजह है कि शहरी बच्चे शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ रहे हैं। मोबाइल का बेइंतहा इस्तेमाल छात्रों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है।
बारहवीं जिला टॉपर सौरभ कुमार का कहना है कि पढ़ाई के लिए जरुरी नहीं की हम इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स या फिर मोबाइल का प्रयोग करे। स्कूल में पढ़ाए जाने वाले विषयों का यदि हम घर आकर एकाग्रता के साथ अध्ययन करे तो हमें अच्छे नंबर लाने से कोई नहीं रोक सकता।

इसलिए छात्रों को कम से कम मोबाइल आदि का प्रयोग करना चाहिए।
बारहवीं में तीसरा स्थान प्राप्त करने वाली सानिया का कहना है कि अधिकांश छात्र सोचते है कि हम बिना लैपटॉप के शिक्षा ग्रहण नहीं कर सकते और वह माता-पिता पर दवाब बनाते है कि हमें लैपटॉप या फोन दिला तो ताकि हम उससे पढ़ाई कर सकें।

मगर यह गलत है। क्योंकि शिक्षकों द्वारा दिए गए नोट्स ही परीक्षा में काम आते है। इसलिए माता-पिता को जागरुक होना चाहिए।
सवी विनीत यादव कहती है कि गैजेटÞ्स का प्रयोग छात्रों को शिक्षा से दूर करने का काम करता है।

इसलिए पढ़ने में रुचि रखने वाले छात्र इससे बचने की कोशिश करते है। ताकि वह कुछ मुकाम हासिल कर सकें।

