जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: देशभर में बढ़ते डिजिटल अरेस्ट स्कैम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार (गृह मंत्रालय), CBI, हरियाणा सरकार और अंबाला साइबर क्राइम विभाग को नोटिस जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा “न्यायाधीशों के फर्जी हस्ताक्षरों और नकली न्यायिक आदेशों के जरिए जनता को फंसाया जा रहा है। यह न सिर्फ कानून के शासन पर हमला है, बल्कि न्यायपालिका की गरिमा और जनता के भरोसे पर भी सीधा प्रहार है।” अदालत ने इस स्कैम को “न्याय व्यवस्था की नींव को हिलाने वाला” बताया।
क्या है डिजिटल अरेस्ट स्कैम?
डिजिटल अरेस्ट स्कैम एक नया साइबर फ्रॉड है जिसमें साइबर ठग खुद को पुलिस, CBI या कोर्ट का अधिकारी बताकर संपर्क करते हैं। लोगों को झूठे मामलों में फंसाने और गिरफ्तारी का डर दिखाया जाता है। वीडियो कॉल पर “अदालत जैसी दिखने वाली फर्जी कार्यवाही” भी की जाती है। लोगों को कहा जाता है कि मामला सुलझाने के लिए ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करें।
वरिष्ठ नागरिक दंपति की शिकायत बनी वजह
यह कार्रवाई एक वरिष्ठ नागरिक दंपति की शिकायत के बाद हुई है। दंपति से पिछले महीने डिजिटल अरेस्ट स्कैम के जरिये उनकी जीवनभर की जमा पूंजी ठग ली गई थी। इस दर्दनाक घटना को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया।
जांच की रिपोर्ट तलब
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार और अंबाला साइबर क्राइम एसपी से अब तक की जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगी है। कहा कि इस तरह के साइबर अपराधों पर रोक जरूरी है, ताकि डिजिटल सिस्टम पर जनता का भरोसा बना रहे।
क्या कहा कोर्ट ने?
“डिजिटल अपराध अब आम नागरिकों की सुरक्षा और निजता को सीधे प्रभावित कर रहे हैं। न्यायपालिका के नाम का दुरुपयोग रोकना बेहद जरूरी है।”

