- पशु चिकित्सा अधिकारियों से निरंतर भ्रमण करके स्थिति पर नजर रखने के निर्देश
- बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने की एडवाइजरी की गई जारी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: लंपी स्किन रोग से ग्रस्त गोवंशों की संख्या में बहुत तेजी के साथ वृद्धि होने से पशु चिकित्सा विभाग में हड़कंप की स्थिति बन गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार पांच दिन के भीतर इनकी संख्या तीन से बढ़कर 157 तक पहुंच चुकी है। हालांकि पशु चिकित्सा विभाग अभी तक इसे महामारी मानने से इनकार करते हुए पशुपालकों और गोशाला संचालकों से सावधानी बरतने की सलाह दे रहा है।
साथ ही तहसील स्तर पर तैनात पशु चिकित्साधिकारियों को नोडल अधिकारी और ब्लॉक स्तर के पशु चिकित्सकों को सहायक नोडल अधिकारी बनाते हुए निरंतर भ्रमण करने और लंपी स्किन डिजीज की चपेट में आने वाले पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने की व्यवस्था कराने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
कई राज्यों के साथ-साथ पूर्वोत्तर में खास तौर पर गोवंश के बीच फैल रही लंपी स्किन डिजीज के बारे में पांच दिन पहले सदर क्षेत्र के पशु चिकित्सालय से रिपोर्ट भेजी गई थी। जिसमें बताया गया था कि उनके पास लाई गई तीन बीमार गायों में लंबी स्किन डिजीज के लक्षण पाए गए हैं। जिनके सैंपल लेकर विभाग ने जांच के लिए भिजवाए हुए हैं।

इस बीच शनिवार तक सरधना और गंगानगर में नए केस सामने आए, जिनके आधार पर विभागीय आंकड़ों में बीमार पशुओं की संख्या आठ बताई गई। रविवार तक इनकी संख्या 25 हुई। वहीं सोमवार दोपहर तक जिले के विभिन्न पशु चिकित्सों की ओर से भेजी गई रिपोर्ट ने अधिकारियों के चेहरे पर चिंता की लकीर डाल दी।
जिला पशु चिकित्सा अधिकारी डा. अखिलेश गर्ग ने बताया कि सोमवार तक मिली रिपोर्ट में लंबी स्किन डिजीज के लक्षण वाले गोवंशों की संख्या 157 तक पहुंच गई है। डा. अखिलेश गर्ग ने बताया कि तहसील मुख्यालयों पर तैनात पशु चिकित्साधिकारियों को नोडल अधिकारी और ब्लॉक मुख्यालय पर तैनात पशु चिकित्सकों को सहायक नोडल अधिकारी बनाते हुए लंबी स्किन डिजीज से ग्रस्त पशुओं पर नजर रखने,
उनके समुचित उपचार की व्यवस्था कराने, उन्हें स्वस्थ पशुओं से अलग रखते हुए चारा-पानी तक अलग कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसी के साथ पशुपालकों और गोशाला संचालकों के लिए भी यही एडवाइजरी जारी की गई है। पशु चिकित्सा विभाग से किसी भी रूप में जुड़े सहायकों को भी अपने-अपने क्षेत्र में सर्तकता बरतने और पशुपालकों को जागरूक करने के लिए कहा गया है।
जिला पशु चिकित्सा अधिकारी डा. अखिलेश गर्ग ने बताया कि लंपी स्किन डिजीज वायरस से फैलता है। उन्होंने बताया कि अभी तक यह रोग गाय और गोवंश में पाया गया है। बुखार, वजन कम होना, लार निकलना, आंख और नाक का बहना, दूध का कम होना, शरीर पर अलग-अलग तरह के नोड्यूल दिखाई देना इसके लक्षण पाए गए हैं।
इसके साथ ही इस रोग में शरीर में गांठें और चकत्ते बन जाते हैं। जो बड़े होकर घाव का रूप ले लेते हैं। उनका कहना है कि लंपी त्वचा रोग मच्छरों, मक्खियों, जूं-चिचड़ी की वजह से फैल सकता है।
पशुओं का कराया जाएगा वैक्सीनेशन
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. अखिलेश गर्ग का कहना है कि लंबी स्किन डिजीज से प्रभावित गोवंशों की संख्या में वृद्धि जरूर हुई है, लेकिन इसे महामारी का नाम देकर भय का माहौल बनाया जाना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि बहुत जल्द इस बीमारी से बचाव के लिए वैक्सीनेशन अभियान चलाया जाएगा। हालांकि इसके लिए उन्होंने फिलहाल कोई तिथि नहीं बताई है।

उनका कहना है कि रिसर्च सेंटर से मिली जानकारी के मुताबिक वैक्सीन तैयार कर ली गई है, जिसे शीघ्र उपलब्ध करा दिया जाएगा। इसके अलावा छुट्टा पशुओं में इस रोग के लक्षण नजर आने पर नगर निगम और नगर निकायों से कहा गया है कि ऐसे पशुओं के लिए अलग बाड़ों की व्यवस्था की जाए। उनके चारे और पीने के पानी की व्यवस्था भी अलग की जाए। इनके संबंध में तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सा केन्द्र या उपकेन्द्र पर सूचना दी जाए।
उबालकर पिएं बीमार गायों का दूध
डा. अखिलेश गर्ग का कहना है कि लंबी स्किन रोग पशुओं से मानव में नहीं फैलता है। फिर भी पशु चिकित्सा विभाग सलाह देता है कि इस रोग से ग्रस्त गाय का कच्चा दूध सेवन न किया जाए। ऐसी गाय के दूध को अच्छे से उबालने के बाद ही प्रयोग में लाया जाए।