जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: काम्या कार्तिकेयन, भारतीय नौसेना अधिकारी की बेटी और नेवी चिल्ड्रन स्कूल की छात्रा ने एक अद्वितीय साहसिक कार्य करके इतिहास रच दिया है। महज 18 वर्ष की उम्र में, वह दक्षिणी ध्रुव (साउथ पोल) तक स्की करते हुए पहुंचने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय और दुनिया की दूसरी सबसे कम उम्र की महिला बनीं।
115 किमी का सफर, माइनस 30 डिग्री तापमान में
काम्या ने अंटार्कटिका की बर्फीली हवाओं और सर्दी का सामना करते हुए, माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तक गिरते तापमान में करीब 115 किलोमीटर की दूरी तय की। इस कठिन यात्रा के दौरान वह एक स्लेज (स्लेज गाड़ी) खींच रही थीं, जिसमें उनके पूरे अभियान का सामान था। अंततः, 27 दिसंबर 2025 को उन्होंने सफलतापूर्वक दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचकर तिरंगा लहराया।
एवरेस्ट से लेकर अंटार्कटिका तक – एक लंबी उपलब्धियों की सूची
काम्या ने इससे पहले ‘सेवन समिट्स चैलेंज’ पूरा किया था, जिसमें उन्होंने दुनिया के सात महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों को फतह किया। माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करके वह सबसे कम उम्र की भारतीय पर्वतारोही बनीं और दुनिया की दूसरी सबसे कम उम्र की महिला पर्वतारोही बनीं। इसके अलावा, अंटार्कटिका की माउंट विंसेंट पर चढ़ाई भी उनकी बड़ी उपलब्धियों में शामिल है।
अगला लक्ष्य: ‘एक्सप्लोरर्स ग्रैंड स्लैम’
काम्या का सफर अब भी जारी है। उनका अगला लक्ष्य ‘एक्सप्लोरर्स ग्रैंड स्लैम’ को पूरा करना है, जिसमें सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर चढ़ाई करना और उत्तर व दक्षिण दोनों ध्रुवों तक स्की करते हुए पहुंचना शामिल है। यदि वह यह लक्ष्य प्राप्त कर लेती हैं, तो वह इसे पूरा करने वाली सबसे कम उम्र की व्यक्ति बन जाएंगी।
भारतीय नौसेना और देश का गर्व
भारतीय नौसेना ने काम्या को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हुए इसे पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बताया। नौसेना का मानना है कि काम्या का साहस और संकल्प आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा, जो उन्हें बड़ी ऊंचाइयों को छूने और अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा देगा।
युवाओं के लिए प्रेरणा
काम्या की यह यात्रा यह साबित करती है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है और वास्तविक ताकत इरादों में होती है। उनका साहसिक कार्य आज के युवाओं को यह संदेश देता है कि कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता, यदि दिल में मजबूत इच्छाशक्ति हो। उनका सफर हमें यह सिखाता है कि मुश्किल से मुश्किल रास्ते भी मजबूत इरादों के आगे झुक जाते हैं।

