जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: बजट के एलानों के बाद, खासकर एसटीटी (सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स) में वृद्धि के प्रस्ताव के कारण, शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी गई। 1 फरवरी को दोपहर 12:31 बजे तक सेंसेक्स 2,174.33 अंक गिरकर 80,095.45 अंक पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 748.50 अंक गिरकर 24,592.15 अंक पर आ गया। हालांकि, इसके बाद बाजार में सुधार देखने को मिला।
एसटीटी में 0.05 प्रतिशत की वृद्धि
वित्त मंत्री ने शेयर बाजार को लेकर कुछ अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने छोटे शेयरधारकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बायबैक टैक्स में बदलाव का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव के तहत बायबैक की दुरुपयोग रोकने के लिए अतिरिक्त बायबैक कर लगाने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा, सभी शेयरधारकों के बायबैक पर पूंजीगत लाभ के रूप में टैक्स लगाने की बात कही गई। कॉर्पोरेट प्रवर्तकों पर 22 प्रतिशत और गैर-कॉर्पोरेट प्रवर्तकों पर 30 प्रतिशत टैक्स लागू किया जाएगा। साथ ही, वायदा सौदों पर एसटीटी बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया।
बाजार में उतार-चढ़ाव
कारोबार के दौरान, सुबह 10:39 बजे तक सेंसेक्स में 255.96 अंक की बढ़त देखने को मिली और यह 82,525.74 अंक पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी में 56.60 अंक का उछाल आया और यह 25,377.25 अंक पर पहुंच गया। हालांकि, शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 15.04 अंक (0.02 प्रतिशत) गिरकर 82,254.74 अंक पर आ गया, जबकि 50 शेयरों वाला निफ्टी 31.75 अंक (0.13 प्रतिशत) गिरकर 25,288.90 अंक पर चला गया।
विशेष लाइव ट्रेडिंग सत्र का आयोजन
एनएसई और बीएसई की ओर से बजट की अहमियत को देखते हुए 1 फरवरी को ‘विशेष लाइव ट्रेडिंग सत्र’ आयोजित किया गया। एक्सचेंजों का कहना था कि बजट के नीतिगत घोषणाओं पर बाजार को तत्काल प्रतिक्रिया देने का मौका मिलना चाहिए, इसलिए रविवार होने के बावजूद बाजार बंद नहीं रहेगा। इससे पहले, 28 फरवरी 1999 को जब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे, तब केवल एक बार रविवार को शेयर बाजार में कारोबार हुआ था।
क्यों लिया गया यह फैसला?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बजट के दिन बाजार का खुला रहना बहुत जरूरी था, क्योंकि वित्त मंत्री का भाषण आमतौर पर सुबह 11 बजे शुरू होता है और इस दौरान राजकोषीय घाटा, टैक्स स्लैब और सेक्टर-विशिष्ट घोषणाएं सामने आती हैं।
रविवार को बाजार खोलने के पीछे तीन मुख्य फायदे हैं:
तत्काल फैसला: निवेशक बजट के ऐलानों का असर तुरंत कीमतों पर देख सकते हैं और उसी दिन निर्णय ले सकते हैं।
जोखिम प्रबंधन: यदि बाजार बंद रहता, तो निवेशकों को सोमवार तक का इंतजार करना पड़ता, जिससे अनिश्चितता बढ़ती। अब निवेशक उसी दिन अपनी पोजीशन मैनेज कर सकते हैं।
पारदर्शिता: छुट्टी के दिन बजट के आने से ऑफ-मार्केट सट्टेबाजी का खतरा हो सकता था, लेकिन लाइव ट्रेडिंग इसे नियंत्रित करने में मदद करेगी।

