
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश का आर्थिक बजट 2026 पेश कर दिया है। यह बजट आम आदमी, महिलाओं, किसानों और युवाओं पर फोकस बताया जा रहा है। आम आदमी से लेकर किसानों पर फोकस होने वाले इस बजट में कुछ भी ऐसे ऐलान नहीं हो सके, जिनकी उम्मीदें की जा रही थीं। वित्तमंत्री ने इस बार बजट में इनकम टैक्स स्लैब के तहत कोई बदलाव नहीं किया है। ‘किसान सम्मान निधि’ में वृद्धि की आस लगाए बैठे किसानों को भी निराशा हाथ लगी। सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स में वृद्धि से शेयर बाजार निवेशकों को भी बड़ा झटका लगा है।
अपने बजट भाषण के दौरान सीतारमण ने 16 वें वित्त आयोग की रिपोर्ट भी सदन में पेश की, जिसमें वित्त वर्ष 2026-27 से 2031-32 के दौरान केंद्र और राज्यों के बीच टैक्स रेवेन्यू के बंटवारे का रोडमैप बताया गया है। केंद्र सरकार ने 16 वें वित्त आयोग की सिफारिशें पूर्णत: स्वीकार कर लीं हैं। वित्त मंत्री ने आयकर अधिनियम, 2025, को 1 अप्रैल 2026 से लागू होने की भी घोषणा की। नए आयकर अधिनियम में नियमों को सरल बनाया गया है ताकि आम आदमी इसे अच्छे से समझ सके।
वैश्विक परिदृश्य में अनिश्चितता के माहौल के चलते रक्षा बजट में वृद्धि अपेक्षित थी, इसलिए वित्त मंत्री ने रक्षा क्षेत्र के लिए 5.94 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। वहीं यातायात सुविधाओं के विकास के लिए भी 5.98 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जिसके द्वारा 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाए जाएंगे, और अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग शुरू होंगे। बजट में सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में कैपेक्स लक्ष्य 11.2 लाख करोड़ से बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड बनाने का भी प्रस्ताव है ताकि परियोजनाओं में निवेश बढ़े। रेयर अर्थ परमानेंट मैगनेट्स योजना के तहत खनिज समृद्ध राज्यों ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को माइनिंग, प्रोसेसिंग एंड रिसर्च तथा विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए विशेष रेयर अर्थ कोरिडोर स्थापित करने में सहायता देने का प्रस्ताव है।
केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री ने कई अहम घोषणाएं कीं हैं। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं- विदेश यात्रा पैकेज की बिक्री पर टीसीएस दर घटाकर 2 प्रतिशत करना, जो पहले 5 और 20 प्रतिशत थी, और अब इस पर किसी राशि की सीमा नहीं होगी, मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से मिलने वाले ब्याज को आयकर और टीडीएस से मुक्त करना, पर्यटन और पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, अराकू वैली और पश्चिमी घाट में इको-फ्रेंडली ट्रेल्स विकसित करना, कृषि क्षेत्र में ‘भारत विस्तार’ नामक बहुभाषी अक टूल शुरू किया जाना, 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर शहरों के बीच विकास का मजबूत लिंक विकसित करना, सेमीकंडक्टर विस्तार, ग्रीन कार्गो और राष्ट्रीय जलमार्गों के जरिए देश की इंफ्रास्ट्रक्चर गति को और तेज किया जाना, अगले 5 वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग विकसित करना, बायो-फार्मा सेक्टर को बढ़ावा देने हेतु बायो फार्मा शक्ति योजना का प्रस्ताव, जिसमें अगले 5 वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान होगा, ग्रीन इंडस्ट्री को बढ़ावा देने हेतु 5 औद्योगिक क्षेत्रों में कार्बन कैप्चर पर 20,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है, आदि।
इसके अतिरिक्त, आर्थिक विकास को तेज और स्थिर बनाने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने छह प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान देने की घोषणा की है। इनमें मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार, पारंपरिक उद्योगों का पुनर्जीवन, चैंपियन एमएसएमई का निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना, दीर्घकालिक सुरक्षा व स्थिरता सुनिश्चित करना और सिटी इकोनॉमिक रीजन का विकास शामिल हैं। उन्होंने कहा इन कदमों से विकास की गति बढ़ेगी और आर्थिक संरचना मजबूत होगी। लेकिन आर्थिक संरचना में क्या और कैसे बदलाव होंगे? उन बदलावों से कैसे विकास को गति मिलेगी? कौन सा इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा? दीर्घकालिक सुरक्षा कैसे मजबूत की जाएगी? इनके लिए संसाधनों की व्यवस्था कैसे करनी है? आदि बड़े सवाल हैं हैं जोकि अनुत्तरित हैं।
एमएसएमई के लिए 10,000 करोड़ रुपये का ‘एसएमई ग्रोथ फंड’ बनाये जाने प्रस्ताव है जोकि पर्याप्त नहीं है। एमएसएमई न केवल अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान करता है, बल्कि बहुत बड़ी मात्रा में रोजगार के अवसर भी प्रदान करता है। बजट के माध्यम से एमएसएमई सेक्टर को बड़ा प्रोत्साहन दिए जाने की आवश्यकता थी, जिससे उनकी उत्पादन लागत कम हो सके। इससे अर्थव्यवस्था में न केवल निर्यात को बढ़ाने में भी मदद मिलती बल्कि व्यापार घाटे को भी संतुलित किया जा सकता था। एमएसएमई की क्षमता संवर्धन हेतु भी बजट में कुछ नहीं कहा गया है। बजट में शिक्षा के साथ-साथ रिसर्च और डेवलेपमेंट पर आवंटन बढ़ाया जाना अपेक्षित था। उच्च शिक्षा में निवेश के नाम पर नए संस्थान, विश्वविद्यालय टाउनशिप, टेलिस्कोप इन्फ्रास्ट्रक्चर और छात्राओं के हॉस्टल बनाए जाने, देश के हर जिले में एक छात्राओं का हॉस्टल स्थापित करने का प्रस्ताव है। लेकिन 53.4 लाख करोड़ रुपए के कुल बजट में से शिक्षा के लिए केवल 1.39 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है। इतने कम बजट से ये सब कैसे संभव हो सकेगा? स्वास्थ्य सेवाओं पर जरूर सरकार कुछ प्रयास करती दिखती है, गंभीर बीमारियों की दवाओं को सस्ता कर दिया गया है। तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, आयुष फार्मेसियों व लैब्स के उन्नयन का प्रस्ताव है। लेकिन सरकार के प्रयास जरूरत से बहुत कम हैं।
आम आदमी तक शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को उपलब्ध कराना किसी भी सरकार की जिम्मेदारी होना चाहिए। यह विडम्बना ही है कि आजादी के 78 वर्ष बाद भी सरकारें लोगों को एक समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं करा सकीं।
बजट में कृषि क्षेत्र का आवंटन बढ़ाने की बजाय कम कर दिया है। कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए आवंटन 2025-26 में जहां कुल बजट का 3.38 प्रतिशत था, वह 2026-27 के बजट में घटकर सिर्फ़ 3.04 प्रतिशत रह गया है। हालांकि परिमाण के रूप में कृषि क्षेत्र के लिए आवंटन पिछले वर्ष से कुछ अधिक 1.62 लाख करोड़ रुपये किया गया है। संसाधनों के अभाव में कृषि संबंधी उक्त घोषणाएं कैसे पूरी होंगी? इनके लिए संसाधनों की व्यवस्था कैसे होगी? सरकार को समावेशी विकास के लिए बड़े शहरों एवं बड़े उद्योगों के साथ-साथ गांवों एवं कस्बों के विकास पर अधिक जोर देना चाहिए। जब ये विकसित होंगे तो समावेशी विकास के ग्रोथ के इंजन बनकर उभरेंगे, तभी देश स्वदेशी की राह पर आगे बढ़ेगा अन्यथा देश में आर्थिक और सामाजिक असमानता की खाई और गहरी होती जाएगी, और सस्टेनेबल और समावेशी विकास कोरी कल्पना बनकर रह जाएगा।
(लेखक सीसीएसयू, मेरठ में अर्थशास्त्र के एचओडी हैं)
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश का आर्थिक बजट 2026 पेश कर दिया है। यह बजट आम आदमी, महिलाओं, किसानों और युवाओं पर फोकस बताया जा रहा है। आम आदमी से लेकर किसानों पर फोकस होने वाले इस बजट में कुछ भी ऐसे ऐलान नहीं हो सके, जिनकी उम्मीदें की जा रही थीं। वित्तमंत्री ने इस बार बजट में इनकम टैक्स स्लैब के तहत कोई बदलाव नहीं किया है। ‘किसान सम्मान निधि’ में वृद्धि की आस लगाए बैठे किसानों को भी निराशा हाथ लगी। सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स में वृद्धि से शेयर बाजार निवेशकों को भी बड़ा झटका लगा है।
अपने बजट भाषण के दौरान सीतारमण ने 16 वें वित्त आयोग की रिपोर्ट भी सदन में पेश की, जिसमें वित्त वर्ष 2026-27 से 2031-32 के दौरान केंद्र और राज्यों के बीच टैक्स रेवेन्यू के बंटवारे का रोडमैप बताया गया है। केंद्र सरकार ने 16 वें वित्त आयोग की सिफारिशें पूर्णत: स्वीकार कर लीं हैं। वित्त मंत्री ने आयकर अधिनियम, 2025, को 1 अप्रैल 2026 से लागू होने की भी घोषणा की। नए आयकर अधिनियम में नियमों को सरल बनाया गया है ताकि आम आदमी इसे अच्छे से समझ सके।
वैश्विक परिदृश्य में अनिश्चितता के माहौल के चलते रक्षा बजट में वृद्धि अपेक्षित थी, इसलिए वित्त मंत्री ने रक्षा क्षेत्र के लिए 5.94 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। वहीं यातायात सुविधाओं के विकास के लिए भी 5.98 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जिसके द्वारा 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाए जाएंगे, और अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग शुरू होंगे। बजट में सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में कैपेक्स लक्ष्य 11.2 लाख करोड़ से बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड बनाने का भी प्रस्ताव है ताकि परियोजनाओं में निवेश बढ़े। रेयर अर्थ परमानेंट मैगनेट्स योजना के तहत खनिज समृद्ध राज्यों ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को माइनिंग, प्रोसेसिंग एंड रिसर्च तथा विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए विशेष रेयर अर्थ कोरिडोर स्थापित करने में सहायता देने का प्रस्ताव है।
केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री ने कई अहम घोषणाएं कीं हैं। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं- विदेश यात्रा पैकेज की बिक्री पर टीसीएस दर घटाकर 2 प्रतिशत करना, जो पहले 5 और 20 प्रतिशत थी, और अब इस पर किसी राशि की सीमा नहीं होगी, मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से मिलने वाले ब्याज को आयकर और टीडीएस से मुक्त करना, पर्यटन और पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, अराकू वैली और पश्चिमी घाट में इको-फ्रेंडली ट्रेल्स विकसित करना, कृषि क्षेत्र में ‘भारत विस्तार’ नामक बहुभाषी अक टूल शुरू किया जाना, 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर शहरों के बीच विकास का मजबूत लिंक विकसित करना, सेमीकंडक्टर विस्तार, ग्रीन कार्गो और राष्ट्रीय जलमार्गों के जरिए देश की इंफ्रास्ट्रक्चर गति को और तेज किया जाना, अगले 5 वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग विकसित करना, बायो-फार्मा सेक्टर को बढ़ावा देने हेतु बायो फार्मा शक्ति योजना का प्रस्ताव, जिसमें अगले 5 वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान होगा, ग्रीन इंडस्ट्री को बढ़ावा देने हेतु 5 औद्योगिक क्षेत्रों में कार्बन कैप्चर पर 20,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है, आदि।
इसके अतिरिक्त, आर्थिक विकास को तेज और स्थिर बनाने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने छह प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान देने की घोषणा की है। इनमें मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार, पारंपरिक उद्योगों का पुनर्जीवन, चैंपियन एमएसएमई का निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना, दीर्घकालिक सुरक्षा व स्थिरता सुनिश्चित करना और सिटी इकोनॉमिक रीजन का विकास शामिल हैं। उन्होंने कहा इन कदमों से विकास की गति बढ़ेगी और आर्थिक संरचना मजबूत होगी। लेकिन आर्थिक संरचना में क्या और कैसे बदलाव होंगे? उन बदलावों से कैसे विकास को गति मिलेगी? कौन सा इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा? दीर्घकालिक सुरक्षा कैसे मजबूत की जाएगी? इनके लिए संसाधनों की व्यवस्था कैसे करनी है? आदि बड़े सवाल हैं हैं जोकि अनुत्तरित हैं।
एमएसएमई के लिए 10,000 करोड़ रुपये का ‘एसएमई ग्रोथ फंड’ बनाये जाने प्रस्ताव है जोकि पर्याप्त नहीं है। एमएसएमई न केवल अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान करता है, बल्कि बहुत बड़ी मात्रा में रोजगार के अवसर भी प्रदान करता है। बजट के माध्यम से एमएसएमई सेक्टर को बड़ा प्रोत्साहन दिए जाने की आवश्यकता थी, जिससे उनकी उत्पादन लागत कम हो सके। इससे अर्थव्यवस्था में न केवल निर्यात को बढ़ाने में भी मदद मिलती बल्कि व्यापार घाटे को भी संतुलित किया जा सकता था। एमएसएमई की क्षमता संवर्धन हेतु भी बजट में कुछ नहीं कहा गया है। बजट में शिक्षा के साथ-साथ रिसर्च और डेवलेपमेंट पर आवंटन बढ़ाया जाना अपेक्षित था। उच्च शिक्षा में निवेश के नाम पर नए संस्थान, विश्वविद्यालय टाउनशिप, टेलिस्कोप इन्फ्रास्ट्रक्चर और छात्राओं के हॉस्टल बनाए जाने, देश के हर जिले में एक छात्राओं का हॉस्टल स्थापित करने का प्रस्ताव है। लेकिन 53.4 लाख करोड़ रुपए के कुल बजट में से शिक्षा के लिए केवल 1.39 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है। इतने कम बजट से ये सब कैसे संभव हो सकेगा? स्वास्थ्य सेवाओं पर जरूर सरकार कुछ प्रयास करती दिखती है, गंभीर बीमारियों की दवाओं को सस्ता कर दिया गया है। तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, आयुष फार्मेसियों व लैब्स के उन्नयन का प्रस्ताव है। लेकिन सरकार के प्रयास जरूरत से बहुत कम हैं।
आम आदमी तक शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को उपलब्ध कराना किसी भी सरकार की जिम्मेदारी होना चाहिए। यह विडम्बना ही है कि आजादी के 78 वर्ष बाद भी सरकारें लोगों को एक समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं करा सकीं।
बजट में कृषि क्षेत्र का आवंटन बढ़ाने की बजाय कम कर दिया है। कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए आवंटन 2025-26 में जहां कुल बजट का 3.38 प्रतिशत था, वह 2026-27 के बजट में घटकर सिर्फ़ 3.04 प्रतिशत रह गया है। हालांकि परिमाण के रूप में कृषि क्षेत्र के लिए आवंटन पिछले वर्ष से कुछ अधिक 1.62 लाख करोड़ रुपये किया गया है। संसाधनों के अभाव में कृषि संबंधी उक्त घोषणाएं कैसे पूरी होंगी? इनके लिए संसाधनों की व्यवस्था कैसे होगी? सरकार को समावेशी विकास के लिए बड़े शहरों एवं बड़े उद्योगों के साथ-साथ गांवों एवं कस्बों के विकास पर अधिक जोर देना चाहिए। जब ये विकसित होंगे तो समावेशी विकास के ग्रोथ के इंजन बनकर उभरेंगे, तभी देश स्वदेशी की राह पर आगे बढ़ेगा अन्यथा देश में आर्थिक और सामाजिक असमानता की खाई और गहरी होती जाएगी, और सस्टेनेबल और समावेशी विकास कोरी कल्पना बनकर रह जाएगा।
(लेखक सीसीएसयू, मेरठ में अर्थशास्त्र के एचओडी हैं)

