
मणिपुर में जो हुआ बेहद शर्मनाक था, उससे भी शर्मनाक पुलिस संरक्षण में जाती पीड़िता को भीड़ द्वारा छुड़ा लेना, उससे भी शर्मनाक अपराधियों की करतूत का विरोध का साहस दिखाने वाले पीड़िता के पिता और भाई की भी हत्या निर्वस्त्र पीड़िता के सामने होना, उससे भी शर्मनाक वहां के मुख्यमंत्री का बयान जिसमें कहना कि ऐसी सौ-सौ घटनाएं हुर्इं हैं? उससे भी शर्मनाक पता होकर भी पुलिस एफआईआर लिखे जाने में देरी है। जैसा झुलसते मणिपुरी कह रहे हैं कि इससे भी शर्मसार करने वाले वाकिये सामने आना बाकी है, दुखद है। देश गुस्से में है, होना भी चाहिए। अगर इंसानों का सभ्य समाज जिंदा है तो जिंदा दिखना भी चाहिए। माना कि 4 मई की घटना की सच्चाई का 21 सेकेंड का वीडियो इंटरनेट बंदी के चलते मणिपुर की बाहरी दुनिया को जल्द पता नहीं चल पाया, लेकिन वहां की स्थानीय पुलिस को 19 जुलाई तक पता नहीं चलना कई लिहाज से दुखद व शर्मनाक है।