Friday, February 13, 2026
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Basant Panchami 2025: देशभर में आज मनाया जा रहा बंसत पंचमी का त्योहार, सरस्वती पूजन के दौरान इन बातों का रखें खास ध्यान

नमस्कार,दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। सनातन धर्म में आज बसंत पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण और शुभ माना जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह त्योहार माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस तिथि से सर्दी और गर्मी के बीच के सुहावने मौसम का आगमन होता है।

दरअसल, इस समय खेतों में सरसों की पीली फ़सल खिल उठती है, जो वसंत के स्वागत का प्रतीक है। बसंत पंचमी के दिन ज्ञान और बुद्धि की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है।

संगम में पवित्र डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करेंगे

वहीं, इस वर्ष प्रयागराज में महाकुंभ में बसंत पंचमी के दिन तीसरा अमृत स्नान होगा। इस अवसर पर करोड़ों श्रद्धालु संगम में पवित्र डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करेंगे। बसंत पंचमी के दिन कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं इस दिन ऐसे कौन से काम है जो करने चाहिए और ऐसे कौन से काम हैं जिन्हें करने से बचना चाहिए।

धार्मिक मान्यता के अनुसार यह दिन मां सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। कहते हैं इस दिन माँ सरस्वती की पूजा करने से व्यक्ति को उनके आशीर्वाद से ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति होती है।

पीले रंग का महत्व

बसंत पंचमी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। अर्घ्य देने के बाद पीले वस्त्र पहनकर विधिपूर्वक माँ सरस्वती की पूजा करना लाभकारी होता है। इस पूजा में मां सरस्वती को पीले रंग के वस्त्र, भोग और पुष्प अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

इस दिन क्या करना चाहिए

  • आप भोग में पीले मीठे चावल या केसर की खीर बना सकते हैं। इसके अलावा, हल्दी की गांठ भी अर्पित करना अच्छा होता है। इस दिन अपनी बहीखाते, पेन, पेपर और अन्य रजिस्टरों की पूजा करना भी शुभ माना जाता है।
  • इससे व्यापार और पेशेवर जीवन में सफलता और प्रगति के नए रास्ते खुलते हैं। इस दिन की पूजा से मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जो ज्ञान, बुद्धि और समृद्धि को बढ़ावा देती है।

इन बातों का रखें खास ध्यान

बसंत पंचमी के दिन कुछ विशेष आचार-व्यवहारों का पालन करना आवश्यक है। इस दिन पेड़-पौधों को काटना नहीं चाहिए, क्योंकि यह दिन वसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है। पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाना प्रकृति का अपमान माना जाता है।

इसके अलावा, बसंत पंचमी के दिन मांस और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे अशुभ परिणाम हो सकते हैं। इस दिन उपवास रखना और शुद्ध सात्विक भोजन करना बहुत लाभकारी होता है। साथ ही, अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें और किसी के प्रति कठोर शब्दों का प्रयोग न करें।

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