जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: प्रदेश के विधानसभा चुनाव की तैयारी में सत्तारुढ़ दल एवं विपक्षी दल जुट गये हैं। वर्तमान में जहां भाजपा सरकार अपनी जनहित नीतियों का प्रचार प्रसार करने में लगी है। वहीं, विपक्षी दलों के पास महंगाई एवं बेरोजगारी का मुख्य मुद्दा है और यही चुनाव में सत्तारुढ़ दल के लिये चुनौती बनकर उभरेगा।
पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के सरकार द्वारा निरंतर दाम बढ़ाए जाने से जहां लोगों की जेब हलकी हो रही है। वहीं, इससे महंगाई भी आसमान छू रही है। समाजवादी पार्टी के पूर्व पार्षद अफजाल सैफी, समाजवादी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव संजय यादव एवं सपा कार्यकर्ता शरीफ मेवाती ने एक संयुक्त बयान में इस मुद्दे पर कहा कि नहीं बुझ रही पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस के मूल्यों में लगी आग। इससे आम जनता का जीना दुश्वार हो रहा है।
जिससे देश प्रदेश का 80 प्रतिशत गरीब आदमी आसमान छू रही महंगाई की चक्की में पिस रहा है। गरीब जनता अब समझ चुकी है कि सरकार की गलत नीतियों की वजह से आम जनता आर्थिक रूप से कमजोर हो रही है और पूंजीपतियों के चेहरे खिल रहे हैं।
इन नेताओं जनहित का पक्ष लेते हुए केन्द्र एवं प्रदेश की भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए बताया कि सरकार गरीब मजदूर, अल्पसंख्यक पिछड़ा वर्ग विरोधी है और इस सरकार ने 36 बार में डीजल-पेट्रोल एवं रसोई गैस के दामों में अप्रत्याशित मूल्य में वृद्धि करके अपनी जनविरोधी एवं चंद पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाली नीतियों को उजागर किया है।
सरकार की गलत नीतियों के कारण वर्तमान में किसान, गरीब मजदूर, छोटा व्यापारी, दलित, अल्पसंख्यक, छात्र, नौजवान अपने आपको ठगा-सा महसूस कर रहा है। उधर, केन्द्र व प्रदेश की भाजपा सरकार जनहित होने का झूठा दावा करके वाहवाही लूटने का प्रयास कर रही है।
हालांकि चुनाव के लिये विपक्ष को महंगाई एवं बेरोजगारी का मुख्य मुद्दा मिल गया। जिसको आधार बनाकर सभी विपक्षी दलों के नेता चुनाव में भाजपा को घेरेंगे। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से महंगाई में बेतहाशा वृद्धि से आम जनता बेहद त्रस्त है। महंगाई बढ़ने से आटा, चावन, दाल, तेल, सब्जी आदि सब महंगे होने से गरीब जनता की जेब का बजट बिगड़ गया है।

