नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का पर्व बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इस साल नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है। पहले दिन, यानी पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है और इस दिन विधि-विधान से कलश स्थापना भी की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता शैलपुत्री की पूजा करने से जीवन में स्थिरता आती है और मन की अशांति दूर होती है।
मां शैलपुत्री का रूप
पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिमालयराज के यहां पुत्री का जन्म हुआ और उनका नाम शैलपुत्री रखा गया।
उनका वाहन वृषभ है, इसलिए उन्हें वृषारूढा भी कहा जाता है।
दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल होता है।
उन्हें सती का दूसरा रूप भी माना जाता है।
मां शैलपुत्री की कथा
कथा के अनुसार, एक बार प्रजापति ने यज्ञ किया जिसमें सभी देवताओं को आमंत्रित किया गया, लेकिन भगवान शिव को बुलाया नहीं गया। माता सती ने यज्ञ में जाने की इच्छा जताई, पर भगवान शिव ने उन्हें पहले रोकने की कोशिश की। माता सती के आग्रह पर भगवान शिव ने उन्हें जाने की अनुमति दी। यज्ञ में जब माता सती पहुंचीं, तो केवल उनकी मां ने स्नेह दिखाया, जबकि बहनें और प्रजापति ने उनका अपमान किया। अपमान सहन न कर पाने पर माता सती ने योगाग्नि में स्वयं को भस्म कर लिया। इस दुख से व्यथित होकर भगवान शिव ने यज्ञ को नष्ट कर दिया।
इसके बाद, माता सती का अगला जन्म हिमालयराज के यहां पुत्री के रूप में हुआ, जिसे शैलपुत्री कहा गया। इन्हें पार्वती और हेमवती के नाम से भी जाना जाता है। उनका विवाह भगवान शिव से हुआ और वे उनकी अर्धांगिनी बनीं। इसी कारण नवरात्रि के पहले दिन उनकी पूजा की जाती है।
मां शैलपुत्री को भोग
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां शैलपुत्री को सफेद वस्तुएं और गाय के शुद्ध घी से बनी मिठाइयाँ अर्पित करना शुभ माना जाता है। घी या मखाने की खीर।
मां शैलपुत्री की पूजा विधि
- सुबह उठकर स्नान करें।
- घर के मंदिर में माता के लिए चौकी तैयार करें।
- मन में शैलपुत्री का ध्यान करते हुए रोली, चावल और सफेद फूल अर्पित करें।
- आरती के लिए घी का दीपक जलाएं।
- माता के सामने दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
मंत्र का जाप करें
“ॐ देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।”
मां शैलपुत्री की आरती
शैलपुत्री मां बैल असवार,
करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी,
तेरी महिमा कोई न जान पाया।
पार्वती तू उमा कहलावे,
जो तुझे सिमरें सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि प्रदान करे तू,
दया करे और धनवान करे तू।
शिव संग प्यारी, सोमवार को प्यारी,
आरती तेरी जिसने उतारी,
उसकी सभी आशाएं पूरी हों,
सभी दुख और तकलीफ दूर हों।
घी का दीपक जला के,
गोले या मिठाई का भोग लगाकर,
श्रद्धा भाव से मंत्र जपें,
प्रेम सहित शीश झुकाएं।
जय गिरिराज किशोरी अंबे,
शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।
भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण कर दो,
सुख और संपत्ति से जीवन भर दो।



