नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। छठ महापर्व भगवान सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और लोकआस्था का पर्व है। यह पर्व दीपावली के तुरंत बाद मनाया जाता है और विशेष रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में बड़े ही हर्ष और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। आज इसकी आस्था की गूंज देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक भी पहुँच चुकी है।
प्रकृति, जल और सूर्य की उपासना पर आधारित यह पर्व शुद्धता, आत्मसंयम और एकता का प्रतीक माना जाता है। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में व्रती कठोर नियमों और पवित्रता का पालन करते हुए सूर्य देव से परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की दीर्घायु की कामना करते हैं। छठ पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, इसके बाद खरना, फिर संध्या अर्घ्य और अंत में सूर्योदय अर्घ्य के साथ यह पर्व पूर्ण होता है।
चार दिवसीय छठ पूजा का कैलेंडर
25 अक्तूबर 2025, शनिवार- नहाय-खाय
26 अक्तूबर 2025, रविवार- खरना
27 अक्तूबर 2025, सोमवार- संध्या अर्घ्य
28 अक्तूबर 2025, मंगलवार- उषा अर्घ्य
नहाय-खाय
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थि तिथि से छठ पूजा की शुरुआत हो जाती है। छठ पर्व के पहले दिन नहाय-खाय की परंपरा है होता है। इस दिन श्रद्धालु विशेष रूप से लौकी-भात का सेवन करते हैं। इसे शुद्धता और सात्विकता का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं इस दिन स्नान कर लौकी और चावल से बने भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण करती हैं।
खरना
दूसरे दिन को खरना कहा जाता है। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं और शाम की पूजा की तैयारी करते हैं। इस दिन मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ की खीर, रोटी और फल बनाया जाता है और सूर्यास्त के बाद छठी मैया को अर्पित किया जाता है। पूजा के पश्चात यही प्रसाद व्रती ग्रहण करते हैं और यहीं से 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत आरंभ होता है।
संध्या अर्घ्य
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ का तीसरा दिन होता है, जो सबसे विशेष माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु सिर पर पूजा की टोकरी रखकर गीत गाते हुए घाट तक जाते हैं और नदी या तालाब के किनारे सूर्यास्त के समय जल में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। साथ ही सूर्य देव से अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
उषा अर्घ्य
अंतिम दिन प्रातःकाल उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। इसके साथ ही व्रत का पारण होता है। इस दिन सूर्य देव और छठी मैया से सुख, शांति और संतान की दीर्घायु का आशीर्वाद मांगा जाता है।

