- एक बार पिंजरे के अंदर घुसा लेकिन खटके से दूर रहा तेंदुआ
- ऊपर से तेंदुए के कूदने पर बंद हुआ पिंजरा
- पिंजरे की जगह बदलने से ग्रामीणों में रोष
जनवाणी संवाददाता |
किठौर: चार दिन से तेंदुआ परिवार फतेहपुर-भड़ौली के ग्रामींणों और वन विभाग के लिए सिरदर्द बना हुआ है। सोमवार को भी तेंदुए की धरपकड के लिए वनाधिकारियों द्वारा चलाया गया अभियान विफल रहा। बताया गया कि पहले तेंदुआ पिंजरें में आकर घुसा फिर वहां से निकलकर बकरी के शिकार के लिए पिंजरे के ऊपर कूद गया।
जिससे पिंजरे का शटर गिर गया। वन कर्मियों और ग्रामीणों ने बताया कि बंद पिंजरे के दोनों तरफ दो तेंदुए रात भर बाग में बैठे रहे। दिन निकलते ही ग्रामींणों और वनकर्मियों की आवाजाही देख वह बाग से निकलकर पुन: गन्ने के खेत में जा घुसे। उधर दो तेंदुए दिखने की सूचना पर मंगलवार सुबह डीएफओ राजेश कुमार रेंज अफसरों जगन्नाथ कश्यप और नरेश कुमार के साथ मौके पर पहुंचे। जिसके बाद वाइल्ड लाइफ की टीम को भी बुलाया गया।
वाइल्ड लाइफ टीम इंचार्ज जीएस खुशारिया ने बारीकी से निरीक्षण कर बताया कि यहां मादा तेंदुआ अपने शावकों सहित आसपास में ठिकाना बनाए हुए है। इसी बीच कुछ ग्रामींणों को गन्ने के खेत का मे पेड़ हिलता दिखा। जिस पर वाइल्ड लाइफ की टीम ने यूके लिप्टस के पेड़ पर चढ़कर देखा तो हिल रहे पेड़ के नीचे दो तेंदुए मौजूद थे।
लेकिन इसी बीच डीएफओ ने ग्रामीणो की भीड़ का हवाला देकर पिंजरा बाग से हटवाकर करीब एक किमी दूर दूसरे स्थान पर लगवा दिया। इससे ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। उनका कहना था कि वनाधिकारी मामले को गंभीरता से लेने के बजाय खानापूर्ति की कार्रवाई में लगा है। पिंजरा तेंदुए की सही लोकेशन पर लगा था। वहां रातभर तेंदुए मौजूद रहे फिर दिन निकलते ही पिंजरा क्यों हटाया गया। उन्होने दो टूक कहा कि अगर वन टीम तेंदुओ को पकड़ने में नाकाम है तो ग्रामींणों को इनसे निपटने की अनुमति दे।

